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मंत्री ने खुद ही दिए विभाग बदलने के संकेत:बड़े अफसर का क्यों हुआ मोहभंग, मंत्री ने महिला अफसर को क्यों किया फोन

सत्ता की राजनीति में कई नेताओं के परिवार भी शिद्दत से भागीदारी करते हैं। कहते हैं भी है एक से भले दो, एक और एक ग्यारह। ये बातें कुछ सत्ताधारियों ने भी गांठ बांध ली है। सरपंच पति, प्रधान पति, एमएलए पति जैसे शब्द खूब प्रचलन में हैं। अब मंत्री-भाई का पद भी कई जगह चर्चित होने लगा है। एक मंत्रीजी के भाई फील्ड में उनकी गैरमौजूदगी में बखूबी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। मंत्री भाई मुख्य अतिथि भी बन रहे हैं। अब मंत्री तो सब जगह जा नहीं सकते, इसलिए मंत्री भाई ही अब एक और एक ग्यारह की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। मंत्री भाई कई बार तो सरकारी गाड़ी से ही जिम्मेदारी निभा आते हैं। अब जो रुतबा सरकारी गाड़ी से होता है, वो प्राइवेट से थोड़े ही होगा। अब मंत्री-भाई सक्रिय होंगे तो निगाह में भी आएंगे और बातें भी बनेंगी, क्योंकि विरोधी भी तो चाौकन्ने हैं।

काम नहीं होने पर मंत्री ने महिला अफसर को दी अनोखी धमकी सत्ता को साधना हर किसी के बस की बात नहीं है। मंत्री बनकर भी अफसरों से काम करवा लेना बच्चों का खेल नहीं है। इसके लिए पावर पॉलिटिक्स और ब्यूरोक्रेसी की समझ कॉम्बो चाहिए। एक सीधे साधे मंत्री कई मामलों में अपने ही विभाग में परेशान हो जाते हैं। मंत्रीजी की पीड़ा वही है, जो कई नेताओं की रहती है। अफसर उनके काम नहीं करते। मंत्रीजी ने भी महकमे की अफसर को कुछ साधारण काम बताए थे, जब नहीं हुए तो लोगों ने फिर याद दिलाया। अब फील्ड के काम नहीं होते हैं तो कार्यकर्ता भी ताने देते हैं। तानों से परेशान होकर सीधे-साधे मंत्रीजी ने अफसर को फोन लगाकर काम नहीं होने पर नाराजगी जताई। लगे हाथ इस्तीफे की धमकी भी दे दी। अब कई लोगों के सामने इस्तीफे की धमकी दी तो बात बाहर आ गई। अब अफसर को फोन कर इस तरह आत्मघाती बात करने का किस्सा नमक-मिर्च लगाकर सुनाया जा रहा है।

नेताजी का एस्कॉर्ट प्रेम और आत्मनिर्भर रुतबा सियासत में सादगी और साधारण रहना बीते दिनों की बात हो गई है। दबदबा और रुतबा झाड़े बिना कोई आपको कैसे पावरफुल मानेगा? हूटर बजाते हुए जब तक पुलिस का एस्कॉर्ट जब तक नहीं चलता तब तक कई नेताओं को पावरफुल होने का अहसास नहीं होता। अब एस्कॉर्ट की सुविधा कुछ बड़े पदों वालों को ही मिलती है। गृह मंत्री के अलावा बाकी मंत्रियों के भी रेगुलर एस्कॉर्ट नहीं लगती। कुछ मंत्रियों ने इसका तोड़ निकाल लिया, सरकारी एस्कॉर्ट नहीं मिली तो क्या खुद की प्राइवेट गाड़ी लगाकर उसमें सुरक्षाकर्मी बैठा दिए। इसे कहते हैं आत्मनिर्भर रुतबा। मंत्रीजी के अत्मनिर्भर रुतबे का कइ्यों को पता लग गया, इसलिए चर्चाएं भी होने लगी हैं।

महिला नेता का हूटर से रुतबा दिखाने की स्टाइल राजधानी में एक से बढ़कर एक पावरफुल नेता, अफसर रहते हैं। जहां ज्यादा पावर वाले लोग हों, वहां बेवजह पावर के दिखावे का कोई मतलब नहीं रह जाता, लेकिन यह बात हर कोई थोड़े ही समझता है। राजधानी की एक महिला निकाय प्रमुख ने पावर दिखाने की ठान रखी है। इसीलिए जो सुविधा मंत्रियों को नहीं मिलती वो भी चहिए। वे जहां भी जाए, उनकी गाड़ी के आगे हूटर बजाते हुए एस्कॉर्ट चलती है। अब तक उनका पद कामचलाऊ ही है। जानकार कह रहे हैं- शायद इसी वजह से पावर एक्सरसाइज करके उसे दिखाने की इतनी होड़ है।

मंत्री ने खुद ही दिए विभाग बदलने के संकेत सत्ता केंद्रों के ईर्द-गिर्द रहने वालों को आगे होने वाले बदलावों का पहले ही पता लग जाता है। सियासी महारत इसी को कहते हैं। एक चर्चित मंत्री को भी विभाग बदलने की आहट सुनाई देने लगी है। चर्चित मंत्री ने पिछले दिनों कई मिलने वालों को भी बता दिया कि इस महकमे से उनकी विदाई हो रही है। अब नॉलेज मैनेजमेंट आने वाला ही संभालेगा। मंत्री के इन संकेतों के सियासी मायने हैं। मंत्री का पुराना रिकॉर्ड भी बीच में बदलने का ही रहा है। अब सत्ता वाली पार्टी के कई वंचित विधायक भी मंत्रिमंडल फेरबदल का इंतजार कर रहे हैं। बदलाव की आहट वाले मंत्री पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

बड़े अफसर का क्यों हुआ मोहभंग बड़े नेताओं और बड़े अफसरों के संबंध मौसम की तरह बदलते हैं। सत्ता में तो ट्यूनिंग पर ही सब दारोमदार है। इसमें बदलाव होते ही बहुत कुछ बदल जाता है। पिछले कई दिनों से एक बड़े अफसर का यहां से मोहभंग होने की गलियारों में चर्चाएं हैं। बड़े अफसर की जो धमक और नरेटिव कुछ महीने पहले था वो अब नहीं रहा। इसके संकेत कई दिनों से दिख रहे हैं। बड़े अफसर ने कई मिलने वालों को भी मोहभंग के बारे में बताया है। मोहभंग यहां तक हो चुका बताया कि वे देश की राजधानी तक में सूटेबल पोजिशन का रास्ता तलाश रहे हैं।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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