अगर किसानों को सरकारी स्कीम्स की जानकारी हो तो न केवल केवल उनका जीवन बदल सकता है, बल्कि आमदनी भी कई गुना बढ़ सकती है। यह कहना है राजसमंद जिले के छोटे से गांव कनावदा के किसान रोड़ सिंह (62) का। रोड सिंह ने 30 साल हिंदुस्तान जिंक (भीलवाड़ा) में प्राइवेट नौकरी की।
रिटायरमेंट के बाद वे गांव लौट आए। वे गांव में खेती करना चाहते थे, लेकिन खेती लायक जमीन कम थी। जो जमीन थी वह भी पहाड़ी इलाके में होने के कारण बंजर थी। ऐसे में उन्हें जानकारी मिली अटल भूजल योजना के बारे में। इस योजना के बारे में जानकारी जुटाई और फायदे लेना शुरू किया। अब रोड़ सिंह आधुनिक तरीके से कई खेती कर रहे हैं और लाखों की कमाई भी
किसान रोड़ सिंह ने बताया- मैंने 30 साल प्राइवेट नौकरी की। गांव लौटा तो पहाड़ी इलाके में खेत होने के कारण समझ नहीं पा रहा था कि बंजर जमीन में क्या करूं। जनवरी 2024 में मैं राजसमंद उद्यान विभाग में गया। यहां मुझे केन्द्र सरकार की अटल भूजल योजना की जानकारी मिली। इस स्कीम में अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया। कृषि विभाग (राजसमंद) के उप निदेशक हरि ओम सिंह राणा ने मुझे पूरी जानकारी दी।
इसके बाद मैंने सबसे पहले बारिश का पानी जुटाने के लिए अपने खेत में डेढ़ लाख रुपए की लागत से 1200 घनमीटर का फार्म पौंड बनवाया। इस पर मुझे सरकार से सब्सिडी मिली और 88 हजार रुपए का अनुदान मिल गया। इस सीजन में अच्छी बारिश हुई। पौंड में करीब 12 लाख लीटर पानी भर गया। खुदाई के दौरान निकली मिट्टी को मैंने बंजर और पथरीले एरिया पर डाला। इससे खेत का एरिया बढ़ गया।
सरकारी स्कीम्स का फायदा उठाया, सब्सिडी ली
किसान ने बताया- अटल भूजल योजना में ही मैंने खेत में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया। इस पर मुझे सरकार से 2.98 लाख का अनुदान मिला। इससे मेरे खेत में 1 हैक्टेयर जमीन पर सिंचाई संभव हुई। इसके बाद मैंने स्कीम में ही 2000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में शेडनेट हाउस बनाया और खीरा की फसल की बुवाई शुरू की।
मैंने इसी साल बारिश के सीजन में खीरा बोया था। 80 दिन बाद खीरे का उत्पादन भी शुरू हो गया। अब तक मैं 13 क्विंटल खीरा-ककड़ी बेच चुका हूं। मार्केट में यह 35 रुपए किलो के हिसाब से बिका। पहली ही खेप से 45 हजार रुपए की आमदनी हुई।
अब हर दूसरे दिन 100 से 150 किलो तक खीरा पैदा हो रहा है और बिक्री हो रही है। फसल का यह उत्पादन सर्दी के मौसम तक जारी रहेगा। सरकारी स्कीम से ही मैंने खेत में उन्नत तकनीक से सिंचाई के लिए मिनी स्प्रिंकलर भी लगाया। शेडनेट के अलावा 2 बीघा में गेहूं की फसल लगा रखी है। जिसमें ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई कर रहा हूं। बारिश के पानी से ही सिंचाई हो रही है। इससे फसल की गुणवत्ता अच्छी है।
शेड नेट में खीरा का बंपर उत्पादन
किसान ने बताया- मुझे खेती का कोई अनुभव नहीं था। इसलिए मैंने जो कुछ भी किया वह एक्सपर्ट से पूछ-पूछकर किया। शेड नेट हाउस में मैं जब खीरे की फसल लगा रहा था तो कृषि एक्सपर्ट ने कहा कि मुझे मल्चिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे पौधे खरपतवार से बच जाएंगे।
मैंने मल्चिंग शीट का उपयोग किया। इससे खरपतवार रुकी और पौधों को अच्छी ग्रोथ मिली। मौसम के विपरीत परिस्थितियों से फसल को बचाने के लिए लो टनल तकनीक का भी प्रयोग किया। अब पता चल गया कि आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाए तो पौधों को मौसम से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है और अच्छी ग्रोथ ली जा सकती है। किसी भी मौसम में कोई भी फसल ली जा सकती है।
किसान ने बताया- मैंने अपने छोटे से खेत में जितनी भी सरकारी स्कीम्स ली उनमें कुल लागत 22.30 लाख रुपए आई। जबकि मुझे 15.07 लाख रुपए अनुदान के रूप में उद्यान विभाग से मिल गए। इस तरह सिर्फ 7 लाख में मेरे खेत में ऐसा स्ट्रक्चर खड़ा हो गया जो मुझे हर सीजन में लाखों की कमाई देगा।
पूरे जिले में मेरे सहित 6 किसान हैं जो अटल भूजल स्कीम का फायदा ले रहे हैं। राजस्थान में यह योजना भूजल, कृषि, उद्यानिकी, जल संसाधन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास, जल ग्रहण विकास एवं मृदा संरक्षण, ऊर्जा एवं वानिकी विभाग द्वारा सम्मिलित प्रयासों से क्रियान्वित की जा रही है।





