जम्मू कश्मीर के डोडा में तैनात राजस्थान के एक जवान का तबीयत बिगड़ने के बाद निधन हो गया। जवान ईश्वर सिंह गुर्जर (42) भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज की 6 पैरा कमांडो में हवलदार थे। डोडा में बर्फवारी के दौरान 1 जनवरी को उनकी तबीयत खराब हुई थी। साथी जवान ईश्वर सिंह को आर्मी अस्पताल उधमपुर ले गए। जहां 2 जनवरी को वे कोमा में चले गए। बुधवार 8 जनवरी को उनका इलाज के दौरान निधन हो गया।
ईश्वर सिंह की पार्थिव देह गुरुवार देर रात सिंघाना थाने पहुंची। इसके बाद सुबह 10 बजे थाने से उनके पैतृक गांव डूमोली कलां तक 8 किलोमीटर तिरंगा यात्रा निकाली गई। जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान जयपुर से आई राज रिफ यूनिट के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

जब पार्थिव देह घर पहुंची तो ईश्वर की पत्नी किरण देवी पति से लिपटकर रोने लगीं। इस दौरान बेटे आकाश ने पिता को सैल्यूट किया। आकाश ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान अंतिम संस्कार में सैनिक कल्याण अधिकारी सुरेश जांगिड़, थाना अधिकारी कैलाश चंद यादव के साथ स्थानीय प्रशासन के अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
बेटियों को डॉक्टर बनाना चाहते थे ईश्वर सिंह
ईश्वर सिंह गुर्जर झुंझुनूं जिले के सिंघाना थाना क्षेत्र के गांव डूमोली कलां के रहने वाले थे। उनके दो बेटियां और एक बेटा है। बेटी प्रिया (20) कॉलेज में फर्स्ट ईयर में हैं। दूसरी बेटी ज्योति (18) 11वीं कक्षा है। दोनों बेटियां सीकर में रहकर नीट की तैयारी कर रही हैं। पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। बेटा आकाश (15) 8वीं कक्षा का छात्र है। वह पचेरी में प्राइवेट स्कूल का छात्र है।
ईश्वर के छोटे भाई संत कुमार भी स्पेशल फोर्सेज में नायब सूबेदार हैं। उनके पिता लीलाराम और सबसे बड़े भाई मदन किसान हैं। मां बनारसी देवी गृहणी हैं।

एक महीने पहले ही बेंगलुरु से डोडा पदस्थापन हुआ था
भाई संत कुमार ने बताया- वे हम तीन भाइयों में मंझले थे। भाई ईश्वर सिंह ने 2002 में बेंगलुरु (कर्नाटक) में सेना में सिपाही के तौर पर जॉइन किया था। उनकी पहली पोस्टिंग आगरा में थी। इसके बाद वे सिपाही से लांस नायक और लांस नायक से नायक पद पर पदोन्नत हुए। 3 साल पहले वे नायक से हवलदार पदोन्नत हुए थे। 10 दिसंबर को छुट्टी पूरी होने के बाद उन्होंने डोडा जाकर जॉइन किया था।
बेंगलुरु से 1 महीने पहले ही उनका नया पदस्थापन जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुआ था। डोडा इलाके में बर्फबारी और तेज सर्दी के कारण 1 जनवरी को ड्यूटी के दौरान अचानक उनका बीपी बढ़ गया। दिमाग में क्लॉट हो गया। उन्हें उधमपुर के कमांड अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 2 जनवरी को वे कोमा में चले गए। 8 जनवरी बुधवार की रात उन्होंने अंतिम सांस ली। कल गुरुवार को उधमपुर अस्पताल में कमांड ने उन्हें गार्ड ऑफ आनर दिया। इसके बाद शव पैतृक गांव के लिए रवाना किया गया।






