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जयपुर डबल मर्डर- पूरे परिवार को मारना चाहता था प्रेमी:पति-पत्नी को गोली मार बच्चे की जान लेने स्कूल पहुंचा था, टीचर की सूझबूझ से जान बची

जयपुर में 24 जनवरी को दिनदहाड़े घर में घुसकर पति-पत्नी को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस वारदात के पीछे प्रेम प्रसंग की कहानी सामने आ रही है। आरोपी मोनू उपाध्याय उर्फ मोनू पंडित मूल रूप से आगरा (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है।

वह राजूराम मीणा उर्फ राजू की पत्नी आशा मीणा के साथ एक गारमेंट कंपनी में काम करता था। दोनों में चोरी-छिपे बातें भी होती थीं। पति को पता लगा तो उसने पत्नी की नौकरी छुड़वा दी थी। इसी बात से मोनू गुस्साया हुआ था। कुछ दिन पहले धमकी भी दी थी।

परिवार वालों का कहना है कि मोनू का इरादा राजूराम मीणा के पूरे परिवार को खत्म करना था। वह उनके 4 साल के बेटे को मारने के लिए स्कूल भी गया था। स्कूल की टीचर की समझदारी के चलते उसकी जान बच गई। मोनू के इरादों को राजू भांप गया था। इसलिए उसने अपनी छोटी बहन को वारदात से कुछ ही देर पहले सामने पड़ोसी के घर भेज दिया था।

सांगानेर सदर थाना इलाके में हुए डबल मर्डर की पूरी कहानी जानने के लिए भास्कर टीम मौके पर पहुंची।

कंपनी से सुबह 9 बजे वापस आ गया राजू, बहन को बाहर भेजा राजूराम मीणा सांगानेर में संचालित आदित्य सोलर कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर की पोस्ट पर था। उसकी पत्नी आशा मीणा, छोटा भाई आशाराम मीणा उर्फ गोलू और हत्या का आरोपी मोनू उपाध्याय तीनों सांगानेर की एक गारमेंट कंपनी में काम करते थे। बीते कई दिनों से राजूराम मीणा ने अपनी पत्नी का गारमेंट कंपनी में काम पर जाना बंद करवा दिया था।

राजूराम मीणा के चाचा नरसिंह मीणा ने बताया- कुछ दिन पहले ही मोनू उपाध्याय से आशा मीणा (राजूराम की पत्नी) और भाई गोलू उर्फ आशाराम से फैक्ट्री में ही झगड़ा हुआ था। तब से आशा मीणा काम पर नहीं जा रही थी। इसके बाद से वह (आशा मीणा) गुस्से में था।

घटना के दिन राजूराम अपनी कंपनी में काम पर नहीं गया था। उसके फोन नंबर पर मोनू ने कॉल कर कहा कि वह झगड़े का निपटारा करना चाहता है। राजू ने उससे किसी भी तरह से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। बावजूद इसके 24 जनवरी सुबह 10 से 10.30 के बीच मोनू अचानक घर आ धमका।

ब्लैक शर्ट में मोनू उपाध्याय उर्फ मोनू पंडित। तस्वीर में दूसरा शख्स आशाराम मीणा है।
ब्लैक शर्ट में मोनू उपाध्याय उर्फ मोनू पंडित। तस्वीर में दूसरा शख्स आशाराम मीणा है।

राजूराम की छोटी बहन मीनाक्षी ने बताया- घटना के दिन सामने वाले रिश्तेदार के घर मौजूद थी। भैया (राजू) ने यह कहकर उन्हें वहां भेज दिया कि वे भाभी से कुछ पर्सनल बात करना चाहते हैं। शायद वह जानते थे कि कुछ अनहोनी होने वाली है। मैं सामने वाले घर चली गई थी। तभी पीछे से मोनू पंडित ने भैया राजूराम मीणा और भाभी आशा मीणा की गोली मारकर हत्या कर दी।

शोर-शराबे में गोलियों की आवाज सुनाई नहीं दी। मैंने मोनू को घर से बाहर निकलते देखा था। वह अंगुली पर बाइक की चाबी घुमाते हुए बाहर निकला था। उसने बहुत गुस्से में मेरी तरफ देखा और बोला जाकर अपने भाई-भाभी को देख लो और बाइक भगाकर ले गया।

मृतक राजूराम की छोटी बहन मीनाक्षी।
मृतक राजूराम की छोटी बहन मीनाक्षी।

मीनाक्षी ने बताया कि 12 बजे जब उसने घर जाकर देखा तो मेन गेट और हॉल का दरवाजा खुला हुआ था। अंदर जाकर देखा तो भाभी चौक में और भाई बाथरूम के पास खून से लथपथ तड़प रहे थे। मोनू पहली बार ही घर पर आया था। इससे पहले उसने उसे कभी घर आते नहीं देखा था।

टीचर की सूझबूझ से बची बेटे की जान राजूराम के चाचा नरसिंह मीणा और छोटी बहन मीनाक्षी ने बताया कि मोनू का इरादा घर के एक-एक सदस्य की हत्या करना था। राजूराम मीणा और आशा मीणा की हत्या करने के बाद सुबह करीब 11 बजे मोनू उनके इकलौते चार साल के बेटे भाविन को उसके किड्स विलेज स्कूल से लेने गया था। लेकिन वहां की टीचर रेखा गौतम ने यह कह कर बच्चे को साथ भेजने से मना कर दिया कि वह केवल परिजनों के साथ ही बच्चों को भेज सकती हैं। आरोपी ने उन्हें विश्वास में लेने की काफी कोशिश की, लेकिन रेखा ने मना कर दिया। इसके बाद आरोपी वहां से गुस्से में भाग निकला।

हत्या के बाद भाइयों को बोला- संभाल लो दोनों को मोनू उपाध्याय पति-पत्नी की हत्या के बाद स्कूल जा रहा था। तब बीच रास्ते में मोनू ने फैक्ट्री में काम कर रहे कॉल कर रहे गोलू उर्फ आशाराम मीणा को कहा कि जा तेरे भाई-भाभी को संभाल ले।

राजूराम की बहन मीनाक्षी ने बताया- उस वक्त उसके हाथों में खून लगा हुआ था। उस वक्त वह बहुत गुस्से में था और उसे घूर रहा था। इसके बाद वह कंपनी की ओर गया। राजू के छोटे भाई गोलू को कॉल करके बोला कि अपने भैया-भाभी को संभाल ले। स्कूल पहुंचने पर यही बात उसने लालाराम के उसी स्कूल में सातवीं में पढ़ने वाले बेटे से भी कही।

मर्डर के बाद घर में मातम का माहौल है।
मर्डर के बाद घर में मातम का माहौल है।

4 साल के मासूम को रील्स दिखाकर बहला रहे घर वाले 4 साल का मासूम बच्चा अपने मम्मी-पापा की मौत से बेखबर है। वह रह-रह कर दोनों को याद कर बुलाता है। बच्चे की बुआ मीनाक्षी ने बताया कि वह उसे दोनों की फोटो दिखाकर, कभी मोबाइल पर कार्टून और रील्स दिखाकर बहला रही है। इधर, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। राजू के माता-पिता का 12 साल पहले ही देहांत हो चुका है। चाचा लालाराम ने ही बच्चों को पाला पोसा है।

4 साल का मासूम बच्चा जिसकी जान स्कूल में होने के कारण और टीचर की सूझबूझ से बच गई।
4 साल का मासूम बच्चा जिसकी जान स्कूल में होने के कारण और टीचर की सूझबूझ से बच गई।

7 दिन से आशा घर थी, 3 दिन से मोनू गायब था राजू का छोटा भाई आशाराम मीणा, उसकी पत्नी आशा मीणा और मोनू के. ए. डिज़ाइन हाउस कंपनी में काम करते थे। तीनों की शिफ्ट सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक की थी। कंपनी के मैनेजर मुनेश कुशवाहा ने बताया कि मोनू उपाध्याय 21 जनवरी को बिना बताए लंच के बाद गांव जाने की बात कहकर चला गया था। तब से ही वह न तो कारखाने आया न ही उसने कोई सूचना दी।

मोनू मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा के गांव बंडपुरा, तहसील जगनेर का रहने वाला है। आशंका जताई जा रही है कि हत्या की प्लानिंग करने के बाद ही मोनू हथियार लेने के इरादे से गांव के बहाने गया होगा। गांव से वापस आने के बाद घटना वाले दिन वह सुबह 8.30 बजे अपने कमरे से निकला और उसके बाद वापस नहीं आया।

यह वही फैक्ट्री है, जिसमें हत्या का आरोपी मोनू काम करता था।
यह वही फैक्ट्री है, जिसमें हत्या का आरोपी मोनू काम करता था।

पत्नी से होता था मोनू का झगड़ा, आत्महत्या करने रेलवे लाइन भी गई मोनू भी शांति विहार कॉलोनी के पास ही किराए के कमरे में रहता था। मकान मालिक प्रमोद ने बताया कि मोनू और उसकी पत्नी मंजू उपाध्याय चार महीने पहले ही उनके यहां किराए से रहने आए थे। उनके दो बेटी और एक बेटा है। अक्सर दोनों में झगड़ा होता था। कई बार झगड़ा इतना बढ़ जाता था कि मंजू बेहोश हो जाती थी।

झगड़े की असल वजह का तो नहीं पता लेकिन पति-पत्नी के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था। हत्या वाले दिन भी दोनों का झगड़ा हुआ था। इसके बाद मोनू की पत्नी सुसाइड करने चली गई थी। लेकिन पास में रहने वाली उसकी बड़ी बहन ने उसे बचा लिया। घटना के बाद से सभी लोग ताला लगाकर जा चुके हैं।

हत्या के बाद घर में फर्श पर बिखरा खून।
हत्या के बाद घर में फर्श पर बिखरा खून।

प्रेम-प्रसंग ने उजाड़ी हंसते-खेलते घर की खुशियां राजू के चाचा नरसिंह ने बताया- मोनू का कामकाज को लेकर गोलू (आशाराम) से झगड़ा हुआ था। लेकिन हत्या की इस वारदात के पीछे पुलिस प्रेम प्रसंग को ही वजह मानकर चल रही है।

सांगानेर सदर थाने के इंचार्ज नंदलाल चौधरी ने बताया- प्रथम दृष्टया मामला प्रेम प्रसंग के चलते हत्या का है। पूछताछ में राजूराम के छोटे भाई आशाराम ने बताया कि उसकी भाभी आशा काफी वक्त से मोनू से मोबाइल पर बात करती थी। एक दिन आशा की अलमारी में कपड़ों में छुपाकर रखा मोबाइल आशाराम के हाथ लग गया, जिससे खुलासा हुआ कि मोनू ने ही ये मोबाइल उसे बात करने को दिलाया था।

इस बात का पता चलने पर राजू ने आशा का काम पर जाना छुड़वा दिया था। मोनू से भी सख्ती से कह दिया था कि वह परिवार से दूर रहे। एक दिन स्कूल से बेटे को लेकर आ रही आशा को रोक कर मोनू उससे बात कर रहा था। तब आशाराम ने उसे देख लिया। इस पर दोनों में झगड़ा भी हुआ था। तब मोनू ने उसे धमकाया था। घटना वाले दिन मोनू ने राजू को कॉल कर कहा था कि वह घर आकर बात करना चाहता है। जहां कहा सुनी के बाद मोनू ने दोनों को गोली मार दी और फरार हो गया। रविवार की शाम आरोपी को उदयपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।

दो घंटे लगे सिर में फंसी गोली निकालने में सीआई नंदलाल चौधरी ने बताया कि मोनू ने पिस्टल से दो गोलियां दागी थीं। इसमें एक गोली राजू के बाएं कान की कनपटी को छेदती हुई सिर में जाकर फंस गई। दूसरी गोली राजू की पत्नी आशा के चेहरे की हड्डी को चीरती हुई सिर में घुस गई। गोली लगने के कुछ देर बाद तक दोनों की सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल पहुंचने तक आशा ने दम तोड़ दिया।

वहीं इलाज के दौरान राजू ने भी दम तोड़ दिया था। शनिवार को पोस्टमॉर्टम के दौरान आशा के सिर से गोली निकालने में दो घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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