जयपुर में पुलिस ने 27 जनवरी को खून की तस्करी कर रहे तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 255 यूनिट ब्लड और क्रेटा कार जब्त की है। पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं।
- इस 255 यूनिट का कहीं भी रिकॉर्ड दर्ज नहीं था।
- कैंप के एक दिन पहले ही खून चोरी के लिए खाली ब्लड बैग मकराना पहुंच गए थे।
- कमीशन भी तय कर रखा था। 30% हिस्सा मकराना ब्लड बैंक के मालिक और 70% चार लोगों के बीच बंटना था।
- 255 बैग्स में 340 यूनिट ब्लड था, क्योंकि हर डोनर से 450 एमएल के बजाय 600 यूनिट ब्लड निकाला गया था।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

जोबनेर थाना पुलिस ने सोमवार को नाकाबंदी में एक कार को पकड़ा था। कार में मकराना निवासी तीन युवक मोहम्मद जाबीर (35) पुत्र मोहम्मद हनीफ, मोहम्मद आमीन (26) पुत्र यूसुफ सोलंकी और श्रवण सिंह (28) पुत्र उम्मेद सिंह सवार थे।
पुलिस ने कार की जांच की तो तीन गत्ते के कार्टन मिले। इन कार्टन में 255 ब्लड बैग बिना किसी सेफ्टी के पड़े थे। तीनों से ब्लड बैग से जुड़े डॉक्युमेंट्स मांगे गए। तीनों में से किसी के पास कोई दस्तावेज नहीं था। इसके बाद खून की काला बाजारी करने के शक में पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया और थाने ले आए।
24 जनवरी को बस से पहुंचे थे बिना टैग के ब्लड बैग मकराना में आयोजित इस ब्लड डोनेशन कैंप में ब्लड बैंक की तरफ से टैग लगे ब्लड बैग थे। मेडिकल की टीम इस पर निगरानी रखती है। खून के दलाल ये बैग पार नहीं कर सकते हैं।
ऐसे में खून चाेरी के लिए अलग से बिना टैग वाले खाली ब्लड बैग मकराना मंगवाए गए थे। 24 जनवरी को यह खाली बैग RJ37PB3017 नम्बर की बस से मकराना भेजे गए थे। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बैग श्री महादेवी ब्लड सेंटर सवाई माधोपुर के कर्मचारी देवेंद्र ने भेजे थे। मकराना ब्लड बैंक और श्रीमहादेवी ब्लड सेंटर के बीच ही खून के लेनदेन की डील हो गई थी।

कैम्प में छिपाकर रखे थे बैग 25 जनवरी को मकराना के रवि मार्बल परिसर में लगे ब्लड डोनेशन कैंप में 4 हजार से ज्यादा लोगों ने शिरकत की थी। शिविर में मकराना ब्लड बैंक के मालिक और कुछ कर्मचारियों ने खून चोरी के लिए अलग से ये ब्लड बैग छिपा रखे थे।
इन ब्लड बैग की जांच की गई तो सभी 255 बैग में 600 एमएल तक ब्लड मिला। जबकि सामान्यत: एक यूनिट में 450 एमएल ब्लड होता है। जयपुर से सवाईमाधोपुर पहुंचने के बाद इन बैग्स से एक्सट्रा ब्लड निकालकर दूसरे बैग्स में डालने का प्लान था।
खून के दलाल इस एक्स्ट्रा ब्लड से 85 और बैग भरने वाले थे। साधारण शब्दों में समझें तो डोनेशन कैंप में 255 लोगों से 340 यूनिट ब्लड डोनेट करा लिया गया था। 455 की जगह 600 एमएल ब्लड निकालकर उन 255 लोगों की भी जान खतरे में डाल दी।

जयपुर में 200 फीट बाइपास पर देनी थी सप्लाई 25 जनवरी को कैंप के बाद इन ब्लड बैग्स को सुरक्षित फ्रीज में रख दिया गया था। इसके बाद 27 जनवरी की दोपहर आरोपी ये ब्लड लेकर जयपुर के लिए रवाना हुए थे। इन ब्लड बैग्स को श्री महादेवी ब्लड सेंटर सवाई माधोपुर के कर्मचारी देवेंद्र को सौंपना था।
इसके लिए देवेंद्र जयपुर में 200 फीट बाईपास पर उनका इंतजार कर रहा था। इससे पहले ही यह लोग पुलिस की नाकाबंदी में पकड़े गए। पुलिस अब सवाईमाधोपुर ब्लड बैंक और मकराना ब्लड बैंक के कर्मचारियों से पूछताछ करेगी।
1300 रुपए में एक यूनिट ब्लड की डील, 30 प्रतिशत हिस्सा मालिक का नाकाबंदी में पकड़े गए तीनों आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि कैम्प से चुराए ब्लड की डील 1300 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से की गई थी। पूरी डील 4.42 लाख (340 यूनिट X1300 रुपए) रुपए की थी।
इसमें 30 प्रतिशत हिस्सा मकराना ब्लड बैंक के मालिक महावीर पारीक, 20 प्रतिशत हिस्सा मोहम्मद शाबिर, 20 प्रतिशत हिस्सा प्रकाश प्रजापत, 20 प्रतिशत हिस्सा सुरेंद्र माहेश्वरी और 10 प्रतिशत हिस्सा पांचूराम घियला का था।

एक साल से सवाईमाधोपुर में हो रही थी खून की सप्लाई पुलिस की जांच में सामने आया है कि श्री महादेवी ब्लड सेंटर सवाई माधोपुर और मकराना ब्लड बैंक के बीच पिछले एक साल से डील चल रही थी। एक साल से मकराना ब्लड बैंक से सवाई माधोपुर में ब्लड सप्लाई किया जा रहा था।
कैंप दो दिन लगाया था। पहला कैंप मकराना में 25 जनवरी को लगा था। यह कैम्प मकराना के पूर्व विधायक रूपाराम के भाई प्रेमप्रकाश मुरावतिया की याद में लगा था। कैंप में 2767 लोगों ने ब्लड डोनेशन किया था। दूसरा कैंप 26 जनवरी को मौलासर में लगा था। तस्करों ने दोनों दिन के कैंप में आने वाले खून के लिए डील कर रखी थी।





