जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में साहित्यकार-गीतकार जावेद अख्तर ने ज्ञान सीपियां सेशन में मातृभाषा को लेकर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी अंग्रेजी मीडियम में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
मैं अंग्रेजी की जरूरत से इनकार नहीं कर रहा, लेकिन अगर अपनी मातृभाषा से कट जाएंगे तो यह ठीक नहीं है। गीतकार ने कहावतों के डेली इस्तेमाल पर भी बात की।
श्इस सेशन में साहित्यकार-समाजसेवी सुधा मूर्ति, एक्टर अतुल तिवारी भी थे। इससे पहले गुरुवार सुबह 10 बजे राजस्थानी परंपरा के साथ पांच दिवसीय फेस्टिवल का उद्घाटन हुआ।
जेएलएफ का ये 18वां एडिशन है और इस साल दुनियाभर से इसमें 600 स्पीकर्स शामिल हो रहे हैं। इस साहित्यिक मंच पर कई लेखकों की बुक भी लॉन्च होगी।

ज्ञान सीपियां का आइडिया मेरे दोस्त का – जावेद अख्तर
एक्टर अतुल तिवारी के साथ ज्ञान सीपियां के सेशन में जावेद अख्तर ने भारतीय परंपराओं और जुबान से जुड़े दोहों के इस्तेमाल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि – सीपियां लिखने का ख्याल मेरे दोस्त विक्रम मेहरा को आया था।
वे बड़े क्रिएटिव इंसान हैं। उन्होंने कहा कि दोहा एक फॉर्म ऑफ राइटिंग है। इसके बारे अब बहुत लोग नहीं जानते न समझते हैं। इसलिए अगर आप लिखेंगे तो बड़ी आबादी तक यह पहुंचेगा।
हमारी जुबान में जो कहावत थी। वह पर्ल्स ऑफ विजडम ही है। कई दोहे 500 साल पुराने हैं। उन्हें आप सुनेंगे तो लगेगा कि पिछले महीने की बात है।
अंग्रेजी का मजाक बनाए बगैर मातृभाषा जरूरी – अख्तर
जावेद अख्तर ने कहा- यह सिर्फ दोहों के साथ नहीं हुआ है। हमारा एजुकेशन सिस्टम ही ऐसा हो गया है। सभी अंग्रेजी मीडियम में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
अगर अपनी मातृभाषा से कट जाएंगे तो यह ठीक नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो इसका मतलब है कि आपने तने और शाखाएं, जड़ काट दी। इसलिए उन्हें अपनी जुबान से जोड़ना जरूरी है। अंग्रेजी का मजाक बनाए बगैर। अपनी भाषा बहुत जरूरी है।
आज फर्स्ट हाफ डे में ये होगा खास
फेस्टिवल के दौरान गुरुवार (30 जनवरी) को जावेद अख्तर, सुधा मूर्ति, और कैलाश सत्यार्थी के सेशन होंगे। सुधा मूर्ति का सत्र ‘द चाइल्ड विद इन’ 3:00 से 3:50 बजे तक होगा। कैलाश सत्यार्थी का सत्र ‘फर्स्ट एडिशन: दियासलाई’ दोपहर 1:00 से 1:50 बजे तक होगा, जिसमें उनकी बुक का लॉन्च कार्यक्रम भी होगा।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के इंटरेस्टिंग PHOTOS…










