विधानसभा में बजट सत्र का तीसरा दिन भी हंगामेदार रहा। प्रश्नकाल में प्रश्नों को पढ़ा हुआ मान लिए जाने की स्पीकर की व्यवस्था पर संसदीय कार्य मंत्री ने दो बार कह दिया कि इसे पढ़ा न मानकर मंत्रियों को उत्तर देने दिया जाए।
फिर ओरण की भूमि का आवंटन कांग्रेस सरकार में पूर्व विधायक खुशवीर सिंह व उनके परिवार को देने पर सत्ता पक्ष ने हमला बोला। इसके बाद शून्यकाल में कांग्रेस ने हंगामे के साथ वेल में नारेबाजी की, क्योंकि जिलों का स्थगन प्रस्ताव आया लेकिन इस पर चर्चा टल गई। गुरुवार को फिर प्रस्ताव लाया जाएगा।
राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस में सबसे बड़ा आरोप कांग्रेस की इंद्रा मीणा ने लगाया, जिस पर भाजपा सदस्य आक्रामक हो गए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल व अन्य मंत्री भड़क गए। बोले कि आरोप लगाने से पहले प्रूफ दीजिए। बिना प्रूफ नहीं बोलने देंगे। बाद में इसे सदन की कार्यवाही से हटा लिया गया। चर्चा के दौरान कांग्रेस के हरिमोहन शर्मा ने कहा- यहां हर संभाग में अलग-अलग मुख्यमंत्री हैं।
30 विधायकों ने जिलों पर चर्चा की मांग की, पटेल बोले- मामला कोर्ट में
शून्यकाल में कांग्रेस के 30 विधायकों ने 3 संभाग व 9 जिलों को निरस्त करने को लेकर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की बात कही। स्पीकर ने स्थगन पर उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा व विधायक सुरेश मोदी को बोलने का मौका दिया।
लेकिन, संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि मामला हाई कोर्ट में है और ऐसे विचाराधीन मामले की सदन में चर्चा साधारणतया नहीं होती। इस पर नेता प्रतिपक्ष जूली, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, उपनेता रामकेश मीणा आदि ने विरोध किया। जूली ने कहा कि संभाग-जिले खत्म कर दिए और चर्चा से भी डर रहे हो, लेकिन पटेल अड़े रहे। इस पर कांग्रेसी सदस्यों ने वेल में नारेबाजी की।
आठ मिनट यही बहस चली- प्रश्न का लिखित उत्तर पढ़ा जाए या नहीं
प्रश्नकाल के दौरान लिखित उत्तर को पढ़ा माना जाए या नहीं, इस पर सदन में 8 मिनट तक बहस होती रही। दरअसल, स्पीकर वासुदेव देवनानी ने व्यवस्था दी थी कि प्रश्नकाल में जो लिखित उत्तर विधानसभा सदस्य को मिल चुका है, उसे सदन में फिर से पढ़ने की जरूरत नहीं है।
इस पर भाजपा विधायकों की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने दो बार यह मांग की कि उत्तर को पढ़ा जाना चाहिए। इस पर स्पीकर ने कहा कि सोमवार को ही व्यवस्था दे दी गई है। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने फिर कहा कि सभी सदस्यों के पास लिखित उत्तर नहीं पहुंचता है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पहले भी ऐसी व्यवस्था आसन से दी गई है।





