मंत्री किरोड़ीलाल मीणा को फोन टैपिंग के बयान पर नोटिस देने के मामले में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि यह हमारी पार्टी का अंदरूनी मामला है। संगठन को कहीं कुछ लगता है तो पार्टी उचित निर्णय लेती है। व्यवस्था बनाए रखना बहुत जरूरी है। यह मीडिया ट्रायल के लिए नहीं है। यह हमारे परिवार का मामला है। आप जानते हैं कि परिवार में किसी सदस्य को कुछ समय-समय पर बताना भी पड़ता है। समझाना भी पड़ता हैं।
परिवार के किसी सदस्य से कोई पूछताछ करनी होती है, सवाल-जवाब करने होते है तो पार्टी करती है। परिवार का मामला है, इसे परिवार में सुलझा लेंगे। मदन राठौड़ दिल्ली में अपने आवास मीडिया से बात कर रहे थे।
हम सब एक है
किरोड़ी को नोटिस देने के बाद उनके समर्थकों की प्रतिक्रिया के सवाल पर मदन राठौड़ ने कहा- उनके समर्थकों को भी उग्र होने की जरूरत नहीं है। उनके समर्थक भी नहीं चाहेंगे कि कोई अनियमितता हो। उनके समर्थक क्या है? वो कोई अलग ग्रुप तो है नहीं। हम सब एक हैं। सभी साथ बैठते हैं, चर्चा करते हैं। यह हमारे परिवार का मामला है।
नोटिस के बाद किरोड़ी के बयान ‘मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं पर मदन राठौड़ ने कहा- यह अच्छी बात है, हम सभी को पार्टी का अनुशासित सिपाही बनकर की काम करना चाहिए।
पार्टी ने सोमवार को दिया था कारण बताओ नोटिस
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोमवार को कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा को अनुशासनहीनता का नोटिस भेजा था। पार्टी ने किरोड़ी के फोन टैपिंग के बयान को अनुशासनहीनता माना था। किरोड़ी को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है।
नोटिस में कहा गया था कि आप भाजपा के सदस्य हैं। पार्टी के टिकट पर सवाई माधोपुर क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए हैं। आप राजस्थान सरकार में मंत्री भी है। आपने पिछले दिनों मंत्रिपरिषद से इस्तीफे की खबर न्यूज पेपर में छपवाने के लिए उपलब्ध करवाई और सार्वजनिक रूप से बयान देकर भाजपा नीत सरकार पर फोन टैप कराने का आरोप लगाया, जो असत्य है। आपने बयान देकर भाजपा की बहुमत वाली सरकार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का काम किया है।

मंत्री का इस्तीफा मुख्यमंत्री के पास
लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने अपने मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने की जानकारी उन्होंने जयपुर में 4 जुलाई को एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मीडिया को दी थी।
उन्होंने कहा था कि मैंने मुख्यमंत्री को 8 और 25 जून को इस्तीफा भेजा था, लेकिन उन्होंने मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। उसके बाद मैंने उनका इस्तीफा मिलकर दिया। हालांकि इसके बाद किरोड़ी लाल मीणा बतौर मंत्री विभागीय फाइलें निपटाते रहे, लेकिन वह कैबिनेट बैठकों में शामिल नहीं हुए। उनके इस्तीफे को लेकर हमेशा पार्टी ने कहा कि वह हमारे वरिष्ठ नेता हैं। मंत्री के तौर पर सरकार में काम कर रहे हैं।
अब जब पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस जारी कर दिया है। ऐसे में सियासी हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि अब जो इस्तीफा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास रखा हुआ है, क्या वह अब स्वीकार हो जाएगा?






