जयपुर डेयरी 3 लाख लीटर पानी JDA को और 1 लाख लीटर पानी एमएनआईटी कैंपस में सप्लाई कर रहा है। जो जयपुर डेयरी में लगे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए किया जा रहा है। इससे रोज करीब 6.5 लाख लीटर पानी को साफ करके उसका उपयोग किया जा रहा है। जेडीए और एमएनआईटी को सप्लाई के बाद बचे 2.5 लाख लीटर पानी डेयरी प्लांट में लगे बॉयलर, रेफ्रिजरेशन प्लांट में उपयोग लिया जा रहा है। इसके मदद से जयपुर डेयरी अपने प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी से सालभर में 24 करोड़ लीटर पानी बचाएगा।
जयपुर डेयरी के एमडी मनीष फौजदार ने बताया- कुछ समय पहले ही डेयरी में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज मशीन (टर्शरी ट्रीटमेंट) लगी लगाई गई है। इससे पानी खरीदने में 1.30 करोड़ रुपए की बचत होगी। वहीं, आरसीडीएफ की एमडी श्रुति भारद्वाज ने बताया कि जयपुर डेयरी के इस प्रयास से हम हर साल अब करीब 24 करोड़ लीटर पानी की बचत कर सकेंगे।
डेयरी को करोड़ों की बचत होगी
जयपुर डेयरी के एमडी मनीष फौजदार ने बताया- जयपुर डेयरी प्लांट में दूध की प्रोसेसिंग, मशीनों की सफाई समेत अन्य कार्यों के लिए हर रोज 12 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है। इसमें से करीब 10-11 लाख लीटर पानी की सप्लाई PHED के जरिए की जाती है। जबकि एक से डेढ़ लाख लीटर पानी टैंकरों के जरिए मंगवाया जाता है। इस मशीन (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज मशीन, टर्शरी ट्रीटमेंट) के पूरी तरह काम शुरू करने के बाद डेयरी से निकलने वाले गंदे पानी में से हर रोज 6.5 लाख लीटर तक पानी की बचत होगी। इसके साथ ही डेयरी प्रशासन को हर साल पानी की खरीद पर होने वाली 1.30 करोड़ रुपए की भी बचत होगी।

जवाहर सर्किल पर डेयरी दे रहा पानी
फौजदार ने बताया- प्लांट में हर रोज 6.5 लाख लीटर पानी को साफ करके उसका उपयोग किया जा रहा है। इसमें पानी को 3 स्तर पर साफ करके उसका 100 फीसदी उपयोग किया जा रहा है। अभी इस मशीन के जरिए ट्रीटमेंट किए गए पानी में से 3 लाख लीटर पानी हम जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को सप्लाई कर रहे हैं। जो जवाहर सर्किल में सिंचाई के लिए उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा 1 लाख लीटर पानी एमएनआईटी कैंपस में दिया जा रहा है। 2.5 लाख लीटर पानी हम डेयरी प्लांट में लगे बॉयलर, रेफ्रिजरेशन प्लांट में उपयोग लेते हैं।
24 करोड़ लीटर पानी बचा सकेंगे
आरसीडीएफ की एमडी श्रुति भारद्वाज ने बताया- गर्मियों के मौसम में राजस्थान में पीने के पानी को लेकर बहुत परेशानी रहती है। जयपुर डेयरी के इस प्रयास से हम हर साल अब करीब 24 करोड़ लीटर पानी की बचत कर सकेंगे। जो मुख्यमंत्री के जल बचाओ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। भारद्वाज ने बताया- जल्द ही हम इस तरह का प्लांट राजस्थान में संचालित दूसरी दुग्ध उत्पादन डेयरियों में भी स्थापित करवाएंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा पानी की बचत की जा सके।
अब समझिए कैसे काम कर रही मशीनरी
- सबसे पहले प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी का प्राइमरी ट्रीटमेंट किया जाता है। जिसे केवल पार्कों में सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। ये पानी एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के जरिए साफ किया जाता है। इसमें पानी में रखी गाद को अलग करके पानी को केमिकल के जरिए साफ किया जाता है।
- दूसरी स्टेज में इस साफ पानी (ईटीपी से निकले) में से आधे पानी को टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट से तीन लेयर पर साफ करते हैं। टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट में तीन अलग-अलग जगहों पर आरओ सिस्टम (कॉमर्शियल रिवर्स ओसमोसिस) लगे हैं। इनमें लगी मेम्ब्रेन ( फील्टर) के जरिए पानी को इतना साफ किया जाता है कि उसकी गुणवत्ता पीने जैसी हो जाती है। इन मेम्ब्रेन से निकले साफ पानी को डेयरी प्लांट में लगे बॉयलर, रेफ्रिजरेशन प्लांट में उपयोग करने के साथ मशीनों को धोने में काम लिया जाता है। जबकि वेस्ट पानी (डिस्चार्ज योग्य पानी) को अगले लेवल पर ट्रीटमेंट के जरिए भेजा जाता है।
- डिस्चार्ज योग्य पानी (इसमें टीडीएस का लेवल बहुत ज्यादा होता है) को मैकेनिकल वैपर री कम्प्रेशन (एमवीआर) के जरिए ट्रीट करके पानी में से टीडीसी को पाउडर के रूप में बाहर निकाला जाता है। बचा हुआ पानी पार्कों में पानी देने और प्लांट में फर्श धुलाई के काम आता है।





