जयपुर में पिता-पुत्र का अनूठा प्रेम देखने को मिला। पिता सुनील (25) 10 महीने के बेटे प्रिंस को दिनभर ऑटो चलाते हैं। जब वे शहर की सड़कों ये गुजरते है तो उनके इस प्रेम को देखकर हर कोई अचंभित हो जाता है।
जब इस हालात में सुनील को ऑटो चलाते हुए शहर के सहकार मार्ग पर देखा तो उनसे बातचीत की। सुनील ने बताया जब प्रिंस 4 महीने का था तब उसकी मां माया की मौत हो गई थी।
रात को हम लोग खाना खाकर सोए थे। सबकुछ ठीक था। सुबह जब उसे उठाया तो आंख नहीं खुली। हॉस्पिटल ले गया तो पता चला मौत हो गई।
सुनील ने बताया- उनकी शादी 7 साल पहले हुई थी। शादी के 6 साल बाद प्रिंस हुआ। लेकिन, माया की मौत के बाद प्रिंस की सारी जिम्मेदारी उन पर आ गई।
उन्होंने सोच लिया था कि मां की कमी कभी महसूस नहीं होने दूंगा। इसके बाद से उसे अपने साथ ऑटो में साथ लेकर चलने लगा। कई बार लोग भी कहने लगे कि इसे संभाल नहीं पाओगे, दूसरी शादी कर लो।

मां की मौत, घर में संभालने वाला कोई नहीं
सुनील ने बताया कि वे अभी शहर के प्रताप नगर इलाके में रहते हैं और दौसा के रहने वाले हैं। उनके पिता आसाम में महंत हैं। मां की मौत हाे चुकी है। उनके बेटे प्रिंस को संभालने वाला परिवार में कोई नहीं है। वे घर के इकलौते बेटे हैं।
ऐसे में माया की मौत के बाद प्रिंस की जिम्मेदारी उन पर आ गई। उन्होंने बताया कि वे रोजाना करीब 100 किलोमीटर तक ऑटो चलाते हैं। इस दौरान उनका बेटा उनके साथ ही रहता है। पूरे दिन पिता की गोद में चिपक कर रहता है।
पिता बोले- सुबह उठकर दूध पिलाने से लेकर तैयार करने की जिम्मेदारी मेरी
सुनील कहते हैं- प्रिंस के लिए मां भी मैं हूँ और पिता भी मैं हूं। सुबह उठ कर अपने बच्चे को दूध पिलाने से लेकर नहलाने तक का काम करने के बाद मैं प्रिंस को को लेकर काम पर निकल जाता हूं।
दूर तक की थकान अपने बेटे की हंसी खुशी और छोटी हरकतों को देख कर दूर हो जाती है। घर से निकलने से पहले प्रिंस के लिए तेल मालिश और तैयारी करनी पड़ती है।
इसके बाद इसे तैयार करता हूं। सुनील ने बताया कि मुझे ऑटो चलते हुए 6 महीने हो गए, लेकिन आज भी वो दिन याद आते है।जब मैं अपने बच्चे को ऑटो सीट पर बैठने से पहले अपने कमर से बांध कर सफ़र पर निकलता था।
कुछ ग्राहक हम बाप बेटे को देख खुशी जताते तो कुछ डांट भी देते थे। जब कभी प्रिंस रोता तो मैं ऑटो चलने की बजाय उसके साथ खेलता। कभी पैसों की जरूरत होने पर रोते प्रिंस के साथ ही ऑटो चलाता ।

शुरुआत की मजबूरी अब आदत और खुशी बन गई
सुनील कहते हैं कि अचानक बेठे बैठे ही पत्नी माया की मृत्यु हो जाना मेरे लिये बहत बड़ा झटका था। चार महीने के बच्चे के साथ खुद को अकेला पा कर बहुत ही घबरा उठा ,लेकिन इसी प्रिंस ने मुझे हिम्मत दी।
पहले में पिकअप गाड़ी चलाता था। लेकिन, जब मुझे लगा कि प्रिंस को ही मुझे पालना है तो मैंने ऑटो चलाना शुरू कर दिया। सुनील ने बताया कि बेटे को देख कई लोग कहने लगे कि ये बहुत छोटा है, तुम नहीं संभाल पाआगे, दूसरी शादी कर लो। कई बार तो यह भी सुनने को मिला कि छोटे बच्चे को लेकर क्यों डोलते रहते हो।

दस महीने के प्रिंस के लिए दूध की बोतल साथ लेकर निकलता हूं
सुनील ने अपने बेटे के लिए खुद को बदल दिया। सुनील ने बताया कि शुरू में प्रिंस के छोटे-छोटे इशारों को समझने में दिक्कत आती थी।
जैसे-कब उसे भूख लगी, कब प्यास लगी या फिर कब उसे नींद आ रही है। लेकिन, अब उसके हर मूवमेंट को समझने लगा हूं। घर से निकलते वक्त दो बोतल दूध लेकर निकलता हूं।
जब उसे भूख लगती है तो किसी ढाबे पर रुक कर उसे गर्म करता हूं और प्रिंस को दूध पिलाता हूं। कई बार ऑटो चलते वक्त प्रिंस को नींद आ जाती है तो ऐसे में बेटे को ऑटो के पिछली सीट पर उसे सुलाना पड़ता है।






