हरियाणा BJP के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के भ्रष्टाचार और फोन टैपिंग के आरोपों पर कहा- डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पार्टी के वरिष्ठ और सम्माननीय नेता हैं। हम सबका मान और काम पार्टी के कारण है। मैं उनके बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करता हूं। जो भी व्यक्ति कोई बात कहता है तो उसकी बात को वही बता सकता है।
पूनिया ने कहा- पार्टी सबको अवसर देती है। किसी को मंत्री, मुख्यमंत्री, किसी मेयर, किसी को दूसरा पद दिया जाता है। बीजेपी ने ही यह साहस किया है कि पहली बार विधायक बनने वालों को मध्यप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में मुख्यमंत्री बनाया है।
सतीश पूनिया मंगलवार को निजी कार्यक्रम में भाग लेने अलवर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार, आमेर से चुनाव नहीं लड़ने और राजस्थान में राजनीतिक बदलाव, विपक्ष के पर्ची की सरकार के आरोपों समेत कई मुद्दों पर बात की।

कांग्रेस के पास नेतृत्व का अभाव पूनिया ने विधानसभा में कांग्रेस के विरोध के कारण बने गतिरोध और स्पीकर वासुदेव देवनानी के भावुक होने पर कहा- सदन चलना चाहिए। विपक्ष का धर्म है कि तार्किक आधार पर लड़ाई लड़े। कांग्रेस के पास नेतृत्व का अभाव है। मुद्दे भी नहीं हैं। उनको सदन चलने देना चाहिए था, ताकि जनता की बात रख सकें। विपक्ष धारदार तरीके से अपनी बात रखे। कांग्रेस के नेता सत्ता में ज्यादा रहे हैं। उनको विपक्ष की ट्रेनिंग नहीं है। अब उनको ट्रेनिंग ले लेनी चाहिए।
दादी शब्द असंसदीय नहीं था, तौर-तरीके पर आपत्ति हो सकती है उन्होंने कहा- मंत्री अविनाश गहलोत ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को ‘दादी’ कहकर संबोधित किया था। यह शब्द कोई ‘असंसदीय’ नहीं था। शब्द पर आपत्ति नहीं है। तौर-तरीके और परिस्थिति पर आपत्ति हो सकती है। उसका कोई न कोई रास्ता निकलता है।
मुझे लगता है कि स्पीकर ने पूरे प्रयास किए हैं। शब्द को पकड़ विरोध करना शुरू कर दिया। गतिरोध की एक सीमा होती है। कांग्रेस को उसे तोड़ना चाहिए। मुझे लगता है शब्दों की लड़ाई की जरूरत नहीं है। प्रदेश के और भी मुद्दे हैं। उन पर बात करनी चाहिए।

कांग्रेस नीति, व्यवहार और विचार से नकार दी गई है मीडिया ने सतीश पूनिया से बीजेपी की लगातार जीत और कांग्रेस के भविष्य को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा- किसी समय कांग्रेस मुक्त भारत का नारा अतिशयोक्ति लगता था। अब लगता है कांग्रेस नीति, व्यवहार व विचार से नकार दी गई है। उनके पास नेतृत्व नहीं है। अब नक्शे से गायब हो जाए तो भी ताज्जुब नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा- मुझे तो कांग्रेस में ऐसा दूर-दूर तक कोई नेता नजर नहीं आता। कोई अवतार हो जाए तो बात अलग है।
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा-
कांग्रेस का सत्ता से बाहर जाने का मुद्दा भ्रष्टाचार ही रहा था। केंद्र में बड़े भ्रष्टाचार के मुद्दे आए तो जनता ने नकार दिया था। राजस्थान में भी सड़क, खान और पोषाहार में भ्रष्टाचार बड़ा था। इसी कारण बदलाव हुआ।

उन्होंने कहा- अब बीजेपी के राज में कांग्रेस के नेता भ्रष्टाचार का मामला लेकर आते हैं, लेकिन ठोस प्रमाण नहीं है। केवल चिपकाने का प्रयास करते हैं।
बीजेपी ऐसी पार्टी जो सबको अवसर देती है पूनिया ने विपक्ष के पर्ची की सरकार के आरोपों पर कहा- जो लोग इस बात पर आपत्ति करते हैं, उनको समझ लेना चाहिए कि देश का प्रधानमंत्री भी सामान्य कार्यकर्ता है। प्रदेश का सीएम भी सामान्य कार्यकर्ता हैं। ये चीज सत्ता में लंबे समय तक जमे लोगों को हजम नहीं हो सकती, इसलिए टिप्पणी करते होंगे। ये दुस्साहस, साहस, परंपरा बीजेपी ने विकसित की है कि सामान्य कार्यकर्ता मध्य प्रदेश, दिल्ली व राजस्थान में सीएम बन सकता है। पार्टी सबको अवसर देती है। इसी के तहत किसी को मंत्री, मुख्यमंत्री, मेयर सहित अन्य भूमिका देती है।
भविष्य में मुझे आमेर से चुनावी राजनीति नहीं करनी सतीश पूनिया ने आमेर से चुनाव नहीं लड़ने के सवाल पर कहा- मैं इस बात को स्पष्ट कर चुका हूं। पिछले 10 साल तक परिवार की तरह वास्ता रहा। चुनाव निर्णय से तकलीफ हुई। मैं स्पष्ट कर चुका हूं कि भविष्य में मुझे वहां चुनावी राजनीति नहीं करनी है। उन्होंने राजस्थान में कोई बदलाव होने और हरियाणा-दिल्ली में जाट समाज के नेता को सीएम नहीं बनाने पर कहा- देखिए, जाति की चर्चा होती है लेकिन कुर्सियां जाति से तय नहीं होती हैं। पार्टी अपने हिसाब से तय करती है। पार्टी का संसदीय बोर्ड सक्षम है। मान-सम्मान पार्टी के कारण ही मिलता है।






