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नेचुरल क्लाइमेट सोल्यूशन पर कार्यशाला:अरावली बचाने पर जोर, वक्ता बोले- अर्बन फॉरेस्ट के बिना कोई भी शहर स्मार्ट सिटी नहीं बन सकता

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट और नेचुरल क्लाइमेट सोल्यूशन पर शनिवार देर शाम अरण्य भवन सभागार में विशेष कार्यशाला हुई। मुख्य वक्ता रिटायर्ड पीसीसीएफ और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. डीएन पांडे ने कहा कि अरावली हमारा सुनहरा भविष्य है। इसे बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने जल संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के 6.6 लाख गांवों में 15 लाख से ज्यादा तालाब हैं, जो इकोसिस्टम को जीवन दे रहे हैं। इन जल स्रोतों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की बड़ी झील राज्य की सबसे स्वच्छ झील है। इसके चारों ओर जंगल हैं और इसमें सीवरेज नहीं आता। लेकिन इसके आसपास होटल्स बन रहे हैं। अगर सीवरेज इसमें पहुंचा तो इसके विनाश को कोई नहीं रोक पाएगा। उन्होंने कहा कि अर्बन फॉरेस्ट के बिना कोई भी शहर स्मार्ट सिटी नहीं बन सकता। उन्होंने अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट पर कहा कि इसके जरिये राजस्थान की जैव विविधता को बचाने की दिशा में बड़ा कदम है। राज्य सरकार भी इस पर गंभीर है। डॉ. पांडे ने बताया कि यह प्रोजेक्ट अफ्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल से प्रेरित है। इसका उद्देश्य अरावली की पहाड़ियों पर हरियाली लौटाना है। ये पहाड़ियां थार से दिल्ली-एनसीआर तक रेगिस्तान जैसी स्थिति को रोकने वाली एकमात्र बाधा हैं। प्रोजेक्ट का लक्ष्य 2027 तक राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली में 1.15 मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र को बहाल करना है। उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ जिले के आरामपुरा जैसे घने जंगल को खत्म करना आसान है, लेकिन वैसा जंगल दोबारा तैयार करने में हजार साल लगेंगे। राजस्थान में 5 मिलियन से ज्यादा खेतों के पेड़ खत्म हुए कार्यशाला में उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए राजस्थान की जैव विविधता, चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर चर्चा की। साल 2010-2011 में मैप किए गए बड़े पेड़ों में से 11 प्रतिशत 2018 तक गायब हो गए। 2018 से 2022 के बीच 5 मिलियन से ज्यादा खेतों के पेड़ भी खत्म हो गए। उन्होंने बताया कि नेचुरल क्लाइमेट सोल्यूशन की दृष्टि से राजस्थान देश के टॉप 10 राज्यों में है। यहां 188 वंश की 375 घास प्रजातियां हैं। क्रॉप लैंड्स और ग्रास लैंड्स में सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं। लेकिन, लेंटाना और जुलिफ्लोरा जैसी प्रजातियां बड़ी चुनौती हैं। इस दौरान ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष और रिटायर्ड सीसीएफ राहुल भटनागर, सेवानिवृत्त एसीएफ डॉ. सतीश कुमार शर्मा, शरद श्रीवास्तव उपाध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस विक्रमसिंह आदि मौजूद रहे।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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