Home » राजस्थान » राजस्थान के सीएम पहुंचे डबवाली:राजकनाल से सटे क्षेत्र का किया दौरा, पानी आपूर्ति के दिए निर्देश; जल संसाधन मंत्री रहे साथ

राजस्थान के सीएम पहुंचे डबवाली:राजकनाल से सटे क्षेत्र का किया दौरा, पानी आपूर्ति के दिए निर्देश; जल संसाधन मंत्री रहे साथ

राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा मंगलवार को सिरसा जिले के डबवाली क्षेत्र में पहुंचे। इस दौरान सीएम भजनलाल शर्मा ने डबवाली क्षेत्र के लोहगढ़ हेड राजकनाल का दौरा किया। उनके साथ जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत भी मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों के साथ नहरी जल प्रबंधन की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की।

जानकारी के अनुसार मंगलवार दोपहर ढाई बजे सीएम भजनलाल शर्मा लोहगढ़ में पहुंचे। लोहगढ़ हेलीपैड पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर सीएम का स्वागत किया। सीएम ने लोहगढ़ हेड पर नहरों में पानी की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों को पानी की आपूर्ति और भविष्य की जल चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया।

अब नहरबंदी आने वाली है। इससे पहले राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा ने राजकनाल का दौरा किया। इस दौरान सीएम ने गर्मी के मौसम को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को जल आपूर्ति सुचारू रखने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन मंत्री ने अधिकारियों को नहरों की समय पर सफाई और मरम्मत कार्य सुनिश्चित करने को कहा।

दरअसल सीएम भजनलाल शर्मा पहले पंजाब में राजकनाल का दौरा करने के लिए गए थे। इसके बाद हरियाणा में दौरा किया। अब वह पंजाब-हरियाणा दौरे के बाद इस राजकनाल से राजस्थान के सटे इलाकों में भी जाएंगे।

डबवाली में लोहगढ़ क्षेत्र में राजकनाल का दौरा करते हुए राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा व अन्य
डबवाली में लोहगढ़ क्षेत्र में राजकनाल का दौरा करते हुए राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा व अन्य

राजकनाल हरियाणा के 35 किमी एरिया में बहती है

हरियाणा हेड राजकनाल के जरिए राजस्थान में पानी जाता है। यह राजकनाल हरियाणा के 35 किलोमीटर एरिया में बहती है। इसमें लोहगढ़ हेड के अलावा कुल 9 पुल हैं। यह राजकनाल पंजाब के हरि के पतन से आती है।

राजस्थान की सीमा पर इस राजकनाल की गहराई 21 फीट है और तल की चौड़ाई 134 फीट और सतह की चौड़ाई 218 फीट है। यह राजस्थान के 19 से ज्यादा जिलों को कवर करती है। इस राजकनाल में पानी प्रवाहित होने की क्षमता 18 हजार क्यूसेक है।

राजकनाल का दौरा करते हुए राजस्थान के सीएम भजनलाल व साथ में जल संसाधन मंत्री।
राजकनाल का दौरा करते हुए राजस्थान के सीएम भजनलाल व साथ में जल संसाधन मंत्री।

पहले पंजाब के हरि के पतन में किया दौरा

सीएम भजनलाल ने पहले पंजाब के हरि के पतन एरिया में दौरा किया। इसके बाद हरियाणा के लोहगढ़ में पहुंचे। उन्होंने राजकनाल से हरियाणा के सटे इलाकों में दौरा किया है। पता लगाया कि इससे सिंचाई के लिए कितना पानी इस्तेमाल हो रहा है और पीने के लिए कितना।

सिरसा के डबवाली क्षेत्र के लोहगढ़ में पहुंचने पर राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा का स्वागत करते हुए कार्यकर्ता।
सिरसा के डबवाली क्षेत्र के लोहगढ़ में पहुंचने पर राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा का स्वागत करते हुए कार्यकर्ता।

इन दिनों राजस्थान में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा

कारण यह भी बताया जा रहा है कि इन दिनों राजकनाल से राजस्थान में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस गर्मी में पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसलिए सीएम ने स्वयं राजकनाल का दौरा किया और संबंधित अधिकारियों को सुचारू रूप से पानी की आपूर्ति के आदेश दिए।

राजस्थान के सीएम को ग्रामीणों ने मांग पत्र सौंपा

इस दौरान डबवाली क्षेत्र के लोगों ने राजस्थान के सीएम भजनलाल को मांगों का ज्ञापन सौंपा है। जिसमें कहा कि राजकनाल में पीछे से आने वाले फैक्ट्रियों के गंदे पानी को रोका जाए। साथ ही उन्होंने लोहगढ़ हेड और अलग-अलग गांवों में 9 पुल की मरम्मत करवाने के लिए मांग रखी। सीएम ने उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

राजस्थान की जीवनरेखा: एक नहर जो नदी जैसी

राजस्थान के लिए जीवनदायिनी साबित हो चुकी राजकनाल नहर किसी नदी से कम नहीं है। इसका आरंभ पंजाब के फिरोजपुर जिले में सतलज और ब्यास नदियों के संगम पर बने हरिके बैराज से होता है। कुल 649 किलोमीटर लंबी इस नहर का 204 किलोमीटर हिस्सा पंजाब में “राजस्थान फीडर” के नाम से जाना जाता है, जबकि शेष 445 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर राजस्थान में फैली हुई है।

यह मुख्य नहर हनुमानगढ़ के मसीतांवाली से शुरू होकर जैसलमेर के मोहनगढ़ तक जाती है और इसके मार्ग में कुल 9 शाखाएं निकलती है। सिंचाई के लिए इस नहर से जुड़ी वितरिकाएं कुल 9,245 किलोमीटर लंबी हैं, जो राजस्थान के सूखे इलाकों में खेती का आधार बन चुकी हैं।

1961 में छोड़ा गया था पहली बार पानी

यह राजकनाल इंदिरा गांधी नहर के नाम से भी जानी जाती है। इस नहर का पानी पहली बार 11 अक्टूबर 1961 को हनुमानगढ़ जिले की नौरंगदेसर वितरिका में छोड़ा गया था। यह एक ऐतिहासिक पल था, जिसे आज भी ग्रामीण बड़े गर्व और उत्साह से याद करते हैं।

नहर में पानी आने पर महिलाएं ने गाए गीत

गांव मैनांवाली के बुजुर्ग किसान निहालचंद बिश्नोई ने बताया कि जब नहर में पानी आया था, तब गांव की महिलाएं मंगल गीत गाते हुए उसका स्वागत करने पहुंची थीं। उस समय वे लगभग 20-22 वर्ष के थे। उन्होंने कहा कि पानी आने के बाद क्षेत्र की तस्वीर ही बदल गई और धीरे-धीरे खुशहाली आने लगी।

वहीं, गांव चौहिलांवाली के किसान जगदीश सहारण ने बताया कि जैसे ही यह खबर फैली कि नौरंगदेसर वितरिका में पानी छोड़ा जाएगा, लोगों में कई दिन पहले से ही उत्साह और चर्चा का माहौल बन गया था। यह घटना आज भी ग्रामीणों के लिए गर्व और भावुकता से जुड़ी हुई याद है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

0
0

RELATED LATEST NEWS