Home » राजस्थान » केबल का पेमेंट नहीं किया,JVVNL पर लगा 30-हजार का जुर्माना:ग्राहक से मंगवाई थी सर्विस लाइन केबल, आयोग ने माना सेवा दोष

केबल का पेमेंट नहीं किया,JVVNL पर लगा 30-हजार का जुर्माना:ग्राहक से मंगवाई थी सर्विस लाइन केबल, आयोग ने माना सेवा दोष

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने ग्राहक से सर्विस लाइन केबल मंगवाने और उसका भुगतान नहीं करने को सेवा दोष माना है। इस पर आयोग ने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) पर 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। यह आदेश आयोग अध्यक्ष ग्यारसीलाल मीणा और सदस्य हेमलता अग्रवाल की बैंच ने चित्रकूट योजना निवासी नरेन्द्र कुमार गुप्ता के परिवादी पर दिए।

परिवाद में कहा गया था कि 28 जुलाई 2021 को परिवादी के घर की बिजली अचानक चली गई। उसने जेवीवीएनएल के कस्टमर केयर पर इसकी शिकायत दर्ज कराई। इस पर निगम की फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम मौके पर आई।

टीम के सदस्यों ने परिवादी से कहा- खंभे से उसके मीटर में आने वाली सर्विस लाइन केबल खराब हो गई है। इसे बदलना पड़ेगा। लेकिन निगम के स्टोर में अभी केबल उपलब्ध नही हैं, ऐसे में परिवादी स्वयं केबल खरीदकर ले आए। इसका भुगतान निगम बाद में कर देगा।

अंधेरा हो चुका था ऐसे मे परिवादी के सामने कोई विकल्प नहीं था। ऐसे में उसने 8,260 रुपए का भुगतान करके केबल खरीदी। लेकिन निगम ने उसका भुगतान नहीं किया।

जेवीवीएनएल ने कहा- 10 एमएम केबल के भुगतान को तैयार

सुनवाई के दौरान जेवीवीएनएल ने कहा- फॉल्ट वाले दिन हमने परिवादी को बता दिया था कि उनके कनेक्शन के हिसाब से 10 एमएम मोटाई की केबल पर्याप्त हैं। लेकिन परिवादी 16 एमएम मोटाई की केबल लगवाना चाहता था। हमने परिवादी को बता दिया था कि निगम 10 एमएम मोटाई की केबल का ही भुगतान करेगा। लेकिन परिवादी की ओर से अनुचित तरीके से भुगतान की मांग की गई। इसके लिए निगम किसी भी प्रकार से न तो जिम्मेदार है और नही देनदार हैं।

परिवादी को 10 एमएम केबल का मूल्य, जो निगम की उपलब्ध सूची में तय है, उसके भुगतान के लिए निगम पहले भी तत्पर था और आज भी सहमत हैं।

केबल उपलब्ध कराना निगम की जिम्मेदारी

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि फॉल्ट होने पर केबल उपलब्ध कराना निगम की जिम्मेदारी है। निगम द्वारा ही परिवादी से कहा गया कि स्टोर में केबल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वह बाजार से लेकर आए। वहीं अगर परिवादी तय क्षमता से ज्यादा की केबल लेकर आया तो निगम को उसी समय कहना चाहिए था कि इसका भुगतान निगम नहीं करेगा। निगम ने ऐसा कोई भी कथन उस समय नहीं किया।

वहीं, बाद में भी केबल का भुगतान परिवादी को नहीं किया गया। ऐसे में निगम परिवाद दायर करने की तिथि से भुगतान तिथि तक 9 प्रतिशत ब्याज की दर से केबल राशि का भुगतान परिवादी को करें। इसके साथ ही इस पूरे घटनाक्रम में जो मानसिक संताप परिवादी को हुआ है, उसकी एवज में 30 हजार रुपए की राशि का भुगतान भी परिवादी को एक माह में किया जाए।

अगर एक माह में भुगतान नहीं किया जाता है तो निगम को उस पर भी 9 प्रतिशत की ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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