राजस्थान में संचालित 3 फीसदी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC) नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। ये खुलासा पिछले दिनों केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए एक पत्र में हुआ है। इसमें उस रिपोर्ट का जिक्र किया है, जो केन्द्र सरकार की कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) की टीम विजिट के बाद तैयार की गई।
टीम ने अपनी विजिट में पाया कि इन पीएचसी, यूपीएचसी में पर्याप्त जरूरी दवाइयों के अलावा इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टेंडर्ड के अनुरूप जांच की सुविधा नहीं थी। यही नहीं कई पीएचसी में तो बेसिक सुविधा जैसे पीने का पानी, बिजली बैकअप जैसी सुविधाएं नहीं थी।
दरअसल, ये टीम पिछले साल नवंबर में सीकर और भरतपुर जिले का दौरा करने आई थी। टीम ने जब इन दोनों जिलों की रिपोर्ट मंत्रालय में पेश की तो उसमें प्रदेश में संचालित हेल्थ सिस्टम में खामियां उजाकर करते हुए सुधार के लिए जरूरी सुझाव दिए।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव और मिशन निदेशक (NHM) की ओर से लिखे गए इस पत्र में बताया- स्कूलों में चलाए जाने वाले स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रोगाम भी इन दोनों ही जिलों में नहीं करवाए जा रहे। वहीं, केन्द्र सरकार की ओर से टेली कंसलटेंसी के लिए उपलब्ध करवाई गई सुविधा का भी सही से उपयोग नहीं हो रहा। इसके पीछे कारण पर्याप्त इंटरनेट सुविधा का अभाव बताया। इसके बाद पूरे राजस्थान की रिपोर्ट मंगवाई गई।

मंत्रालय की ओर से जारी पत्र के मुताबिक राजस्थान के सभी जिलों में कुल 9940 पीएचसी, यूपीएचसी, जिला हॉस्पिटल, उप जिला हॉस्पिटल समेत अन्य स्तर के हॉस्पिटल संचालित है। लेकिन इनमें से केवल 216 ही पीएचसी, यूपीएचसी ऐसी हैं, जो NQAS मानक के अनुरूप सर्टिफाइड मिली है। रिपोर्ट में बताया कई पीएचसी में तो जरूरी दवाइयों का भी स्टॉक पर्याप्त नहीं मिला। वहीं, अधिकांश पीएचसी में छोटी-मोटी जरूरी जांचों की भी सुविधा नहीं थी। इसके अलावा अधिकांश पीएचसी में पर्याप्त स्टाफ की भी कमी मिली। कुछ पीएचसी में जरूरत से ज्यादा स्टाफ की तैनाती पाई गई।
मेडिकल ऑफिसर या सीएचओ को नहीं पता JAS के बारे में
कमेटी की टीमों ने दोनों जिलों की कई पीएचसी का दौरा किया। वहां मौजूद मेडिकल ऑफिसर (MO) और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) से जन आरोग्य समितियों (JAS) की बैठकों का रिकॉर्ड मांगा। पता चला कि कई जगह समितियां ही नहीं। कई MO और CHO को तो इस JAS के बारे में जानकारी तक नहीं थी।
आपको बता दें कि ग्राम पंचायत स्तर पर आमजन में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने और सरकार के हेल्थ कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से इन समितियों का गठन किया जाता है। इसमें जिला पंचायत का सदस्य या ग्राम सरपंच चेयरमैन होता है। वहीं, MO या CHO को मेम्बर सचिव बनाया जाता है।






