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भ्रष्टाचार के मामलों में जांच लटकाई तो अफसरों पर कार्रवाई:पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एक महीने में जांच करनी होगी

पंच, सरपंचों से लेकर सभी पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की शिकायतों को दबाकर रखने और उन पर कार्रवाई नहीं करने पर पंचायतीराज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अब पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की शिकायत मिलने पर जांच कर रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा तय कर दी है। भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत मिलने पर अब एक महीने के भीतर जांच कर रिपोर्ट विभाग को भेजनी होगी। तय समय सीमा में जांच नहीं करने पर अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

पंचायती राज विभाग ने भ्रष्टाचार के मामलों को लटकाकर रखने के मामलों को देखते हुए सर्कुलर जारी किया है। विभाग के सर्कुलर के मुताबिक गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों में तय समय सीमा में जांच नहीं करने के कारण दोषी बच जाते हैं। कई बार सरंपचों और जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो जाता है। उसके बाद भी जांच नहीं होती है, इस वजह से दोषी बच जाते हैं।

शिकायतों की जांच के लिए 10 दिन से 30 दिन तक की समय सीमा तय

पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की जांच पूरी करने के लिए अलग अलग मामलों के लिए समय सीमा तय की गई है। जॉब कार्ड, पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना , स्वच्छ भारत मिशन जैसे व्यक्तिगत लाभ के मामलों में पद के दुरूपयोग की शिकायतों की जांच अब 10 दिन में पूरी करनी होगी। पट्टों और निर्माण के कामों में गड़बड़ी की जांच 15 दिन में करनी होगी। निर्माण कामों, भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की जांच 30 दिन में पूरी करनी होगी।

तय समय में जांच रिपोर्ट नहीं दी तो जिम्मेदार अफसरों पर एक्शन होगा

पंचायतीराज विभाग के सर्कुलर के मुताबिक भ्रष्टाचार के मामलों में तय समय सीमा में जांच रिपोर्ट नहीं देने पर पहले 7 दिन में रिमाइंडर लेटर जारी किया जाएगा। सात दिन में भी रिपोर्ट नहीं देने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर विभागीय एक्शन होगा। जिला परिषदों के सीईओ और जांच दल में शामिल अफसर अगर जांच में लापरवाही बरतेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। उनकी सालाना मूल्यांकन रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया जाएगा।

जांच रिपोर्ट में दोषियों को बचाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी सर्कुलर के मुताबिक जांच दल अगर करप्शन के मामलों में दोषियों को बचाने का प्रयास करता है तो सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में फिर से जांच करवाई जाएगी।

सरपंच और जनप्रतिनिधि दोषी पाए जाने पर पद से हटाए जाएंगे

विभागीय जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले सरपंचों सहित पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों को पहले निलंबित करना होगा। इसके बाद दोष साबित होने पर पद से हटाया जाएगा। पंचायत के सरपंच, उप सरपंच और पंच प्राथमिक जांच में दोषी हों तो उनके निलंबन के प्रस्ताव पंचायतीराज विभाग को भेजे जाएंगे।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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