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बसों में नहीं कागजों में दौड़ रहे रोडवेज कर्मचारी:14 कर्मचारी तीन साल से ऑफिस नहीं आ रहे, वेतन बराबर उठा रहे

घाटे में चल रही राजस्थान रोडवेज में बिना ऑफिस आए और काम किए बिना वेतन देने का मामला सामने आया है। मामला झुंझुनूं डिपो का है। यहां तीन साल से 14 कर्मचारी कागजों में ही काम कर रहे हैं और लेकिन मौके पर कभी नहीं दिखे। आश्चर्य ये है कि बिना अनुपस्थित वेतन हर माह उठा रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब जयपुर एसीबी को शिकायत मिली।

इसमें बताया गया कि झुंझुनूं डिपो में भ्रष्टाचार हो रहा है। चालक और परिचालकों से मुख्य प्रबंधक 15 हजार रुपए प्रति माह तक रिश्वत ले रहे हैं और कार्मिक घर बैठे वेतन ले रहे हैं। एसीबी ने शिकायत रोडवेज मुख्यालय को भेजी। इस पर जांच कमेटी बनाई गई। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नदारद कर्मचारियों की संख्या एक-दो नहीं, बल्कि 14 हैं। इनमें से कई कर्मचारियों का तो 4 से 5 साल में किसी ने चेहरा ही नहीं देखा। ये ड्यूटी पर नहीं आते, लेकिन हाजिरी पूरी होती है। हर महीने पूरा वेतन मिल रहा है।

ये कर्मचारी बिना ड्यूटी उठा रहे वेतन

  • कनिष्ठ लिपिक विजय सिंह थाकन : 3-4 साल से नहीं देखा गया, ड्यूटी करते ही नहीं।
  • वरिष्ठ सहायक गौरव चौधरी : चिड़ावा बुकिंग पर ड्यूटी, लेकिन कभी नहीं जाते।
  • परिचालक सुमेर सिंह गावड़िया : बिना ड्यूटी के ही वेतन उठा रहे हैं।
  • परिचालक महेंद्र चारण : 4-5 साल से कहां कार्य कर रहे हैं, किसी को पता ही नहीं।
  • परिचालक सरिता धतरवाल: क्या कार्य कर रही? कोई सूचना नहीं है।
  • चालक विजेंद्र चौधरी, सुरेश कुमार, परिचालक विमला देवी, विनोद कुमारी, विजय सिंह चाहर, सुमन कटेवा, संजय भास्कर, विजय सिंह व रणवीर सिंह पर भी लंबे समय से ड्यूटी नहीं करने, पूरा वेतन लेने का आरोप।​​​​​​​

यातायात निरीक्षक व मुख्य प्रबंधक का चालक भी दोषी

मुख्यालय ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इसमें कार्यकारी प्रबंधक/शिकायत और कार्यकारी प्रबंधक/विजिलेंस शामिल थे। इन्होंने जो रिपोर्ट सब्मिट की है, उसमें मुख्य प्रबंधक गणेश कुमार शर्मा, यातायात निरीक्षक महेश कुमार और मुख्य प्रबंधक के चालक नरेन्द्र झाझड़िया को मुख्य दोषी माना है। झाझड़िया पर सरकारी गाड़ी निजी उपयोग में लेने का भी आरोप है। सूत्रों के मुताबिक झाझड़िया ने गाड़ी का जीपीएस हटा दिया है। वह गाड़ी को अपने गांव राणासर, नवलगढ़ ले जाता है। कमेटी ने मुख्य प्रबंधक द्वारा यूपीआई के जरिए पैसे लेने के सबूत भी सौंपे हैं। साथ ही जिन कार्मिकों ने लंबे समय से ड्यूटी नहीं की, उनकी तथ्यात्मक रिपोर्ट भी सौंपी है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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