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मजदूर का बेटा लाया 99%, पड़ोसी डीजे पर नाचे:पिता की मौत के बाद भी नहीं मानी हार, बने जिला टॉपर; पढ़िए… होनहारों के संघर्ष की कहानी

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 12वीं क्लास का रिजल्ट गुरुवार को जारी हुआ। विज्ञान, कला और वाणिज्य संकायों के नतीजे एक साथ आए। इनमें साइंस का रिजल्ट 98.43%, कॉमर्स का 99.07% और आट्‌र्स का 97.78% रहा।

नतीजों में होनहारों ने सफलता की नई कहानी लिखी। पाली में खेतिहर मजदूर की बेटी मीनाक्षी चौधरी ने आट्‌र्स में 97.80 प्रतिशत अंक हासिल किए।

वहीं, जोधपुर के भोपालगढ़ में भेड़- बकरियां चराने वाले चरवाहे दुर्गाराम देवासी की बेटी प्रीति साइंस में 97.80% मार्क्स लाईं।

पाली के जैतारण निवासी मुकेश गहलोत आट्‌र्स में 98% अंक लाए। उनके पिता मजदूर है, वहीं मां घर- घर जाकर सब्जियां बेचने का काम करती है।

जालोर के भीनमाल की निकिता ने 92.60 मार्क्स लाकर अपने पिता जबरदान से किया वादा निभाया। दरअसल, पिता ने कहा था कि 90% से अधिक अंक आए तो बेटी का फोटो अखबार में छपवा दूंगा।

रिजल्ट आया तो सभी की आंखें नम थी, क्योंकि 11 मई को ही पिता की हार्ट अटैक से मौत हुई है, लेकिन बेटी ने उनका सपना पूरा किया है।

पढ़िए… होनहारों के सफल होने की कहानी

चित्तौड़गढ़ में साइंस (बायो) में दिलीप जोशी को 98.20% मार्क्स मिले है। पिता का साया उठा तो भी वे टूटे नहीं और पढ़ाई में लगे रहे।
चित्तौड़गढ़ में साइंस (बायो) में दिलीप जोशी को 98.20% मार्क्स मिले है। पिता का साया उठा तो भी वे टूटे नहीं और पढ़ाई में लगे रहे।

चित्तौड़गढ़ के टॉपर बने, सरकारी स्कूल के स्टूडेंट

चित्तौड़गढ़ के बोहेड़ा गांव के स्टूडेंट दिलीप जोशी के पिता रामलाल का 5 साल पहले देहांत हो गया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानीं और साइंस वर्ग (बायो) में 98.20% अंक लाकर जिले में टॉप किया।

पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बोहेड़ा के स्टूडेंट दिलीप फिजिक्स और बायोलॉजी में 100 में से 100, केमिस्ट्री में 97, अंग्रेजी में 98 और हिंदी में 96 मार्क्स लाए हैं। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी उन्होंने रेगुलर स्टडीज जारी रखी।

दिलीप ने बताया कि उसे प्रेरणा पिछले वर्ष के टॉपर से मिली और तभी से उसने ठान लिया था कि इससे भी अधिक अंक लाकर दिखाना है।

खेतिहर मजदूर पिता की बेटी मीनाक्षी 12वीं कक्षा (कला वर्ग) में 97.80 प्रतिशत अंक लाई है।
खेतिहर मजदूर पिता की बेटी मीनाक्षी 12वीं कक्षा (कला वर्ग) में 97.80 प्रतिशत अंक लाई है।

पिता मजदूर, स्कूल में लेक्चरर तक नहीं, फिर भी 97.80% मार्क्स

पाली के रानी निवासी मीनाक्षी चौधरी 12वीं कक्षा (कला वर्ग) में 97.80 प्रतिशत अंक लाई है। उन्होंने गजनीपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में पढ़ाई की।

मीनाक्षी के पिता खेतिहर मजदूर हैं। परिवार के पास खुद का मकान भी नहीं है। ऐसे में अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती है। पढ़ाई के साथ-साथ वह खेतों में भी माता-पिता की मदद करती है और हाथ बंटाती है।

स्कूल के प्रिंसिपल रणछोड़ लाल बंजारा के अनुसार, इस सत्र में स्कूल में कला संकाय के तीनों विषयों के लेक्चरर तक नहीं थे। इसके बावजूद मीनाक्षी ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों की मदद और अपनी मेहनत के बल पर उपलब्धि हासिल की।

मीनाक्षी दसवीं क्लास में भी 91% अंक ला चुकी है। उनका लक्ष्य शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में करियर बनाना है।

12वीं साइंस के रिजल्ट में जब बेटे दीपक के 95.80% अंक आए तो पिता श्रवण कुमावत भावुक हो गए। (पीली कॉलर की टी शर्ट में दीपक)
12वीं साइंस के रिजल्ट में जब बेटे दीपक के 95.80% अंक आए तो पिता श्रवण कुमावत भावुक हो गए। (पीली कॉलर की टी शर्ट में दीपक)

बेटा 95.80% मार्क्स लाया तो, चाय बेच रहे पिता की आंखें नम हुई

अजमेर के पुष्कर के ब्रह्म चौक के पास चाय की दुकान लगाने वाले श्रवण कुमावत के बेटे दीपक कुमावत के मार्क्स देखने के बाद घर में खुशियों का माहौल है।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के स्टूडेंट साइंस के स्टूडेंट हैं। उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 95.80% अंक हासिल किए हैं।

बेटे की सफलता की खबर मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं और उन्होंने बधाई देने आए लोगों को चाय पिलाकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेरी मेहनत चलती रहेगी, लेकिन बच्चों का सपना जरूर पूरा होना चाहिए।

हालांकि दीपक ने विज्ञान संकाय से परीक्षा पास की है, लेकिन अब वे विषय बदलकर आर्ट्स में जाना चाहते हैं, क्योंकि उनका लक्ष्य UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में जाना है।

अलवर के कठूमर कस्बे के रहने वाले शुभम ने 12वीं साइंस में 99.20% मार्क्स लाकर टॉप किया, तो पड़ोसी डीजे पर जमकर नाचे।
अलवर के कठूमर कस्बे के रहने वाले शुभम ने 12वीं साइंस में 99.20% मार्क्स लाकर टॉप किया, तो पड़ोसी डीजे पर जमकर नाचे।

अलवर टॉपर, डीजे बजाया, सम्मानित किया

अलवर के कठूमर ड्राइविंग करने वाले शेरसिंह राजपूत के बेटे शुभम सिंह राजपूत ने कक्षा 12वीं साइंस में 99.20% अंक हासिल किए। उन्होंने अलवर में एक निजी स्कूल से पढ़ाई की है।

स्कूल ने जब उन्हें अलवर जिला टॉप करने की सूचना दी तो जश्न जैसा माहौल हो गया।इसके बाद पड़ोसियों के साथ डीजे और आतिशबाजी से शुभम और उनके पेरेंट्स को सम्मानित किया गया।

शुभम की मां ममता कवर ने बताया कि बेटे की पढ़ाई में शुरू से ही इंटरेस्ट था। कक्षा 10वीं में भी 95.17 प्रतिशत अंक प्राप्त किये थे। शुभम का कहना है कि वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर देश सेवा करना चाहते हैं।

कोटा के विशाल प्रजापत ने 12वीं साइंस संकाय में 96.80% अंक हासिल किए। पेरेंट्स के साथ विशाल।
कोटा के विशाल प्रजापत ने 12वीं साइंस संकाय में 96.80% अंक हासिल किए। पेरेंट्स के साथ विशाल।

धूमधाम से एक शादी देखी तो मेरिट में आने की ठानी, साइंस में लाए 96.80% अंक

कोटा के तीरथ गांव के रहने वाले विशाल प्रजापत ने 12वीं साइंस संकाय में 96.80% अंक हासिल किए हैं। विशाल ने बताया- 6वीं क्लास में था, तब परिवार में एक शादी में गया था।

उन्होंने काफी धूमधाम से शादी की और तब ही मैंने ठान लिया था कि मुझे भी अपनी बहन की शादी धूमधाम से करनी है। तभी से मैंने मेहनत करना शुरू किया।

पिता स्टेशन इलाके में दूसरे के यहां पर फ्रूट के ठेले पर काम करते हैं और जब वहां काम नहीं होता तो मजदूरी करते हैं। घर पर पापा- मम्मी के अलावा हम दो भाई बहन हैं, जिसमें बहन बड़ी है।

विशाल ने बताया- रोजाना 10 घंटे पढ़ाई की। फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी में 100 नंबर हैं। डॉक्टर बनना चाहता हूं और नीट की तैयारी कर रहा हूं। लक्ष्य हासिल करने के लिए मोबाइल का उपयोग बंद कर दिया है।

दुर्गाराम देवासी भेड़-बकरियां चराकर परिवार का पालन- पोषण करते है। बेटी प्रीति साइंस में 97.80% अंक लाई तो परिवार के साथ गांव में भी माहौल जश्न का हो गया।
दुर्गाराम देवासी भेड़-बकरियां चराकर परिवार का पालन- पोषण करते है। बेटी प्रीति साइंस में 97.80% अंक लाई तो परिवार के साथ गांव में भी माहौल जश्न का हो गया।

चरवाहे की बेटी लाई 97.80%, गांव में जश्न

जोधपुर के रामनगर छापला की प्रीति देवासी ने 12वीं विज्ञान वर्ग में 97.80 प्रतिशत अंक हासिल कर भोपालगढ़ क्षेत्र में टॉप किया है। पिता दुर्गाराम देवासी रोज भेड़-बकरियां चराकर परिवार का पालन- पोषण करते हैं।

घर की आर्थिक स्थिति कमजोर है, लेकिन सपनों में कोई कमी नहीं है। रेगुलर पावर कट के कारण तेल के लैंप की रोशनी और सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई कर प्रीति ने यह मुकाम हासिल किया।

दिन की शुरुआत मां का हाथ बंटाने से होती, फिर स्कूल और लौटकर घंटों की पढ़ाई। परिणाम आया तो पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

प्रीति का सपना साइंटिस्ट बनने का है। प्रीति ने बताया कि माता-पिता ने मेरे लिए सब कुछ किया, अब उनकी उम्मीदों को साकार करना मेरा कर्तव्य है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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