राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा उर्वरकों की दैनिक उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कम उपलब्धता और अधिक खपत वाले जिलों व ब्लकों को चिन्हित कर प्रदेश भर में प्राथमिकता के साथ पूर्ण पारदर्शिता से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। उर्वरकों की कालाबाजारी व जमाखोरी को रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश भर में पूर्ण सतर्कता से कार्य कर रहे हैं तथा खाद के अवैध भंडारण, कालाबाजारी व यूरिया डायवर्जन के प्रकरणों में प्रदेशभर में व्यापक कार्यवाहियां की गई हैं।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि अवैध भंडारण व यूरिया डायवर्जन के 7 प्रकरणों में, श्रीगंगानगर जिले में 2 प्रकरणों में टोंक जिले में, 4 प्रकरणों में अलवर जिले में, 2 प्रकरणों में पाली जिले में, 1 प्रकरण में कोटपुतली जिले में, 5 प्रकरणों में नागौर जिले में, 1 प्रकरण में सीकर जिले में, 2 प्रकरणों में भरतपुर जिले में, 1 प्रकरण में डूंगरपुर जिले में, 2 प्रकरणों में दौसा जिले में, 1 प्रकरण में जैसलमेर जिले में, 1 प्रकरण में करौली जिले में, 1 जालौर जिले में इस प्रकार प्रदेा में कुल 30 एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर केंद्र सरकार के समन्वय स्थापित कर प्रदेश की मांग अनुसार उर्वरकों की आपूर्ती करवाई जा रही है। राज्य के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु रबी 2025 में अक्टूबर से दिसम्बर तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 11 लाख 34 हजार मैट्रिक टन यूरिया के विरुद्ध दिनांक 01 अक्टूबर 2025 को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 10 लाख 50 हजार मैट्रिक टन की उपलब्धता की जा चुकी है जो 92.59 प्रतिशत है एवं 25 हजार मैट्रिक टन यूरिया परिवहन में है। दिसम्बर में लगभग 3 लाख मैट्रिक टन यूरिया की आवक संभावित है।
रबी 2025 में अक्टूबर से दिसम्बर तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 2 लाख 68 हजार मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध दिनांक 01 अक्टूबर 2025 को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 3 लाख 50 हजार मैट्रिक टन की उपलब्धता की जा चुकी है एवं 10 हजार मैट्रिक टन डीएपी परिवहन में है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1 लाख 67 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 66 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 61 हजार मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 43 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टक उपलब्ध है। वर्तमान में गत वर्ष की तुलना में फस्फेटिक उर्वरकों का स्टक 79 हजार मैट्रिक टन अधिक है।
कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से यूरिया, डीएपी एव अन्य उर्वरकों का राज्यों को माहवार व कम्पनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन एवं जिलों की मांग के अनुसार जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर प्रदेश में उर्वरकों का वितरण कराया जाता है।
कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिशानुसार ही उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रेरित करने, उर्वरकों का समान रूप से पारदर्शिता के साथ वितरण कराने और उर्वरक वितरण में अनियमित्ता बरतने वाले विक्रेताओं, जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कठौर कार्यवाही हेतु समस्त जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
विभाग द्वारा राज्य में प्रत्येक उर्वरक विक्रेता के विक्रय परिसर पर उर्वरकों का वितरण व प्रभावी मोनेटरिंग किये जाने हेतु विभागीय अधिकारियों/कार्मिकांे की नामजद ड्यूटी लगायी गई है, किसी विक्रेता के यहां कृषकों की संख्या अधिक होने पर कृषकों को पंक्तिबद्ध किया जाकर उनकी देख-रेख में उर्वरकों का वितरण करवाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य के सीमावर्ती जिलों से उर्वरकों के अन्य राज्यों में परिगमन रोकने हेतु विभागीय कार्मिक एवं आवयकतानुसार पुलिस के सहयोग से 61 चैक पोस्ट स्थापित की गई है, जिनके द्वारा नियमित निगरानी जारी है।
विभाग द्वारा समय-समय पर विोष अभियान चलाये जाकर उर्वरक वितरण में जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया डायवर्जन सहित अन्य अनियमितता बरतने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की गई है। अब तक उर्वरक सहित अन्य आदानों में विक्रेताओं/विनिर्माताओं द्वारा नियमों का उल्लघंन किये जाने पर 89 एफ.आई.आर. पुलिस थानों में दोषियों के विरूद्ध दर्ज करवायी गई है तथा साथ ही 97 लाईसेंस निलम्बन/निरस्त किये गये हैं। विभाग द्वारा सभी जिलों में कन्ट्रोल रूम स्थापित कर सतत् निगरानी की जा रही है।
Author: Kashish Bohra
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