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अपराध जांच को मिलेगा वैज्ञानिक आयाम: सीडीटीआई जयपुर में ‘सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट’ प्रशिक्षण शुरू

राजस्थान पुलिस के चयनित कांस्टेबलों के लिए वैज्ञानिक जांच कौशल को मजबूत करने के उद्देश्य से सेंट्रल डिटेक्टिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीडीटीआई) जयपुर में आज ‘सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) गांधीनगर, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी) के सीडीटीआई और राजस्थान एफएसएल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य अपराध स्थल प्रबंधन, फोरेंसिक साक्ष्य संग्रह और वैज्ञानिक जांच कौशल को मजबूत बनाना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सीडीटीआई के निदेशक डॉ. अमनदीप सिंह कपूर के स्वागत एवं पाठ्यक्रम परिचय के साथ हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध स्थल का सही संरक्षण और साक्ष्यों का वैज्ञानिक संग्रह सफल जांच की रीढ़ है।
कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों के प्रमुख विचार:
मुख्य अतिथि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर सावंत ने कहा कि अपराध जांच में वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का उपयोग अब अनिवार्य हो चुका है। उन्होंने एक माह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रदेश में अपराध जांच की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया और प्रतिभागियों को इस अवसर का पूरा लाभ उठाने की प्रेरणा दी।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थान पुलिस अपराध जांच को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रगति कर रही है और यह प्रशिक्षण पुलिस बल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।
उपमहानिरीक्षक पुलिस सीआईडी अपराध शाखा दीपक भार्गव ने कहा कि अपराध स्थल पर पहली प्रतिक्रिया पुलिसकर्मियों की पेशेवर दक्षता तय करती है, और यह प्रशिक्षण जांच प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाएगा।

फोरेंसिक शिक्षा और तकनीक पर फोकस
फोरेंसिक विशेषज्ञता वाले अतिथियों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। निदेशक एसएसएल डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि प्रशिक्षित ‘सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट’ अधिकारियों से साक्ष्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे मामलों की त्वरित और सटीक जांच संभव हो सकेगी।
कैंपस डायरेक्टर एनएफएसयू जयपुर डॉ. एस. ओ. जुनारे ने फोरेंसिक शिक्षा और पुलिस प्रशिक्षण के मजबूत समन्वय को अपराध जांच के भविष्य को बदलने वाला बताया।
प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं
सीडीटीआई डायरेक्टर कपूर ने बताया कि एक माह के इस विशेष कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं को वैज्ञानिक जांच तकनीकों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनमे अपराध स्थल संरक्षण एवं दस्तावेज़ीकरण, फोटोग्राफी, फिंगरप्रिंट एवं डीएनए साक्ष्य संग्रह और डिजिटल फोरेंसिक शामिल है।
यह कोर्स बीपीआरडी और एनएफएसयू के संयुक्त प्रमाणन के साथ-साथ नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों के क्रियान्वयन में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो राजस्थान को वैज्ञानिक पुलिसिंग की अग्रणी पंक्ति में प्रवेश कराएगा।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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