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मुख्यमंत्री ने ‘डेयरी के स्वर्णिम दो वर्षः ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त उत्कर्ष’ पुस्तक का किया विमोचन

राज्य सरकार के सफल दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने ‘डेयरी के स्वर्णिम दो वर्षः ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त उत्कर्ष’ पुस्तक का विमोचन किया। सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में गौसेवा का पुण्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम में पुस्तक के विमोचन के बाद मुख्यमंत्री ने आरसीडीएफ के उत्कृष्ट कार्याे और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने आरसीडीएफ द्वारा डेयरी एवं पशुपालन क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिले दो राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवॉर्ड के लिए भी बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। 40 पृष्ठ की पुस्तक में राज्य सरकार के पिछले दो वर्षों में डेयरी एवं पशुपालन क्षेत्र में हुए नवाचार, सहकारिता के विस्तार तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को समाहित किया गया है।
इस अवसर पर पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पशुपालन एवं गोपालन शासन सचिव डॉ. समित शर्मा, राजस्थान कोऑपरेटिव फेडरेशन की प्रशासक एवं प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज तथा गोपालन निदेशक पंकज कुमार ओझा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

ऐतिहासिक पहलः 1000 करोड़ रुपये का कोरपस फण्ड-

डेयरी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण हेतु 1000 करोड़ रुपये के कोरपस फण्ड की स्वीकृति एक दूरदर्शी निर्णय रहा है। इस फण्ड के माध्यम दुग्ध प्रोसेसिंग क्षमता 75 लाख लीटर एवं पशु आहार उत्पादन क्षमता 2550 मैट्रिक टन प्रतिदिन, डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण तथा दीर्घकालिक निवेश को गति देने के प्रयासों का उल्लेख है।

मात्र 20 माह की अवधि में आरसीडीएफ, इसकी इकाईयों और सम्बद्ध जिला दुग्ध संघों ने अर्जित किया 16116 करोड़ रुपये का टर्नओवर-

पिछले 47 वर्षों के इतिहास में सभी रिकार्ड तोड़ते हुऐ मात्र 20 माह की अवधि में आरसीडीएफ, इसकी इकाईयों और सम्बद्ध जिला दुग्ध संघों ने रिकार्ड 16116 करोड़ रुपये का टर्नओवर और 681 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित कर स्वर्णिम उपलब्धियों के बारे में बताया गया है।

सम्बल योजना में 1172 करोड़ रूपये का भुगतान-

सहकार से समृद्धि के मंत्र के तहत दुग्ध समितियों के विस्तार, सदस्यता अभियान और ग्रामीण स्तर पर रोजगार एवं आय सृजन को नई दिशा दी गई। मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर की दर से आर्थिक संबल प्रदान करते हुए 1172 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है एवं भुगतान प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सशक्त बनाया गया।

दुग्ध भुगतान में 58 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी-
आरसीडीएफ एवं सम्बद्ध जिला दुग्ध संघों से जुड़े दुग्ध उत्पादकों के दुग्ध भुगतान दरों में 58 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी से उनकी आय में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। इस पहल से पशुपालकों का आर्थिक सशक्तिकरण हुआ तथा सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण सुनिश्चित हुआ है।

नवाचार एंव अवॉर्ड का उल्लेख-

पुस्तक में उच्च गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पादन को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सरस अमृतम अभियान एवं दूध का दूध पानी का पानी अभियान, फैट दरों में वृद्धि और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने के प्रयासों का भी विवरण है। साथ ही आरसीडीएफ द्वारा अपनाए गए नवाचारों की श्रृंखला, समग्र ईआरपी आधारित मॉनिटरिंग, डिजिटल व्यवस्थाओं और पारदर्शी सप्लाई चेन के माध्यम से राजस्थान को डेयरी क्षेत्र में सिरमौर बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया गया है। इसके अतिरिक्त दुग्ध उत्पादकों के कल्याण हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं, पशु आहार एवं पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा आरसीडीएफ को प्राप्त राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवॉर्ड सहित अन्य सम्मानों के माध्यम से राज्य की उपलब्धियों को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया गया है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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