आरयूएचएस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का निरंतर विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण हो रहा है। इसी कड़ी में अब यहां कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी भी प्रारंभ हो गई है। शुक्रवार को अस्पताल में पहली बार काॅक्लियर इम्पलांट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यह सर्जरी प्रारंभ होने से राजस्थान के गंभीर एवं अत्यधिक श्रवण बाधित बच्चों एवं वयस्कों को अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं के लिए एक बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
उल्लेखनीय है कि विगत दिनों चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने आरयूएचएस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने भी आरयूएचएस अस्पताल का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए थे कि अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी सेवाओं को सुदृढ़ बनाया जाए। इसी क्रम में अस्पताल प्रशासन ने यहां काॅक्लियर इम्पलांट सर्जरी प्रारंभ कर दी है।
अस्पताल अधीक्षक डाॅ. महेश मंगल ने बताया कि पहली कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की लाभार्थी भीलवाड़ा की तीन वर्षीय बच्ची वामिका है। वह जन्म से ही गंभीर श्रवण बाधिता से ग्रसित थी तथा श्रवण यंत्रों (हियरिंग एड्स) से भी अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा था। विस्तृत चिकित्सकीय जांच एवं विशेषज्ञ परामर्श के पश्चात उसे कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हेतु उपयुक्त पाया गया। इस सर्जरी के माध्यम से बच्चे को सुनने एवं बोलने की क्षमता विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ है।
सर्जरी टीम के डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि सर्जरी के पश्चात वामिका को लगभग दो वर्षों तक नियमित श्रवण एवं स्पीच थेरेपी की आवश्यकता होगी, जो कॉक्लियर इम्प्लांट उपचार प्रक्रिया का एक अत्यंत आवश्यक एवं अभिन्न अंग है। यह प्रमाणित है कि कम आयु में कॉक्लियर इम्प्लांट एवं समुचित पुनर्वास थेरेपी से बच्चों के श्रवण, वाक् एवं सामाजिक विकास में उल्लेखनीय सुधार संभव होता है।
डाॅ. राघव मेहता ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट उपचार की कुल अनुमानित लागत लगभग 8 लाख रूपए है, जिसमें उपकरण, शल्य क्रिया, अस्पताल में भर्ती तथा पुनर्वास सेवाएं सम्मिलित हैं। यह संपूर्ण उपचार राज्य सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के अंतर्गत निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को भी यह अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा सुलभ हो सकी है।
यह जटिल एवं उन्नत शल्य प्रक्रिया अस्पताल की विशेषज्ञ टीम द्वारा पूर्ण समन्वय एवं दक्षता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न की गई। ईएनटी विभाग की टीम में डॉ. रामलखन मीणा, डॉ. अंबिका देवड़ा एवं डॉ. सुनील यादव शामिल थे। एनेस्थीसिया विभाग की टीम में डॉ. वरूण सैनी, डॉ. मनीष खण्डेलवाल, डॉ. संदीप, डॉ. प्रतिमा, एवं डॉ. सतवीर सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नर्सिंग टीम में मानसिंह गहलोत एवं सीमा जाट शामिल रहे।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विनोद जोशी ने कहा है कि पहली कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का सफलतापूर्वक संपन्न होना उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में ऐसी और अधिक सर्जरी प्रारंभ की जाएंगी।






