गुलाबी नगरी जयपुर के जवाहर कला केंद्र में आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 ने अत्यंत भव्य, रंगीन और उत्साह से भरे वातावरण में अपनी शानदार शुरुआत की। मेले का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री राजस्थान भजनलाल शर्मा द्वारा गुरुवार को किए जाने से इस आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई। देश के कोने-कोने से आईं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं के चेहरों पर इस अवसर पर आत्मविश्वास, खुशी और गर्व साफ झलक रहा था।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला जयपुरवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे मेले में उमड़ती भीड़ इस बात का प्रमाण बन गई कि यह आयोजन लोगों के दिलों को छू रहा है। मेले के दूसरे दिन शुक्रवार को भारी संख्या में आगंतुकों ने देश के विभिन्न राज्यों से आईं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा प्रदर्शित हस्तनिर्मित उत्पादों को देखा, सराहा और जमकर खरीदारी कर ग्रामीण महिलाओं के हुनर को प्रोत्साहन दिया।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला केवल भारतीय हस्तकला, हथकरघा और पारंपरिक कलाओं का उत्सव नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण एसएचजी महिलाओं की सृजनात्मक प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने की एक सशक्त पहल भी है। यह मेला महिलाओं की आर्थिक सशक्तता और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। इस वर्ष ‘भारत – एक सूत्रधार’ की थीम पर सजा यह मेला देश के अलग-अलग प्रांतों की समृद्ध टेक्सटाइल परंपराओं को एक ही छत के नीचे पिरोता हुआ नजर आ रहा है। रंगों की विविधता, बुनाई की बारीकियां और सदियों पुरानी परंपराओं की जीवंत झलक दर्शाती यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सुंदर प्रतीक बन गई है।
मेले का प्रत्येक दिन सांस्कृतिक रंगों की जीवंत छटा से सजा हुआ है। विशेष सांस्कृतिक संध्याओं के माध्यम से आगंतुकों को देश की समृद्ध लोक कलाओं से साक्षात्कार करने का अवसर मिल रहा है। मेले में प्रतिदिन देश की विविध लोक कलाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नए-नए रंग आगंतुकों को देखने और अनुभव करने को मिलेंगे।
स्वाद के शौकीनों के लिए मेले का फूड कोर्ट किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां राजस्थान के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और झारखंड के लोकप्रिय स्वाद लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। दूध जलेबी, दाल के पकौड़े, गर्मागर्म चाय, भेलपूरी, दाबेली, स्वीटकॉर्न, गाजर का हलवा, टमाटर सूप, दाल-बाटी-चूरमा से लेकर राब और बाजरे की रोटी तक—हर स्वाद ने आगंतुकों के अनुभव को और भी यादगार बना दिया है।
कुल मिलाकर सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 शिल्प, संस्कृति, स्वाद और महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत संगम बनकर उभरा है, जो न केवल ग्रामीण महिलाओं के सपनों को उड़ान दे रहा है, बल्कि आगंतुकों को भारत की विविधता में एकता का अनुपम अनुभव भी करा रहा है।





