जयपुर में नीरजा मोदी स्कूल की स्टूडेंट अमायरा सुसाइड मामले दो टीचर्स को पद से हटा दिया गया है। इनमें से एक अमायरा की क्लास टीचर पूनीता शर्मा और गणित सब्जेक्ट की टीचर रचना हैं।
मामला सीबीएसई और राज्य शिक्षा विभाग दोनों स्तर पर भी जांच के दायरे में है। शिक्षा विभाग ने जांच पूरी कर उच्च अधिकारियों और शिक्षा मंत्री को रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें कई खामियां सामने आई है।
सीबीएसई ने घटना के लिए बुलिंग और टीचर-मैनेजमेंट की ओर से इस पर ध्यान नहीं देने को कारण माना था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के नोटिस में बुलिंग का कोई जिक्र नहीं है। इस बीच सीबीएसई और राज्य शिक्षा विभाग की कार्रवाइयों के दबाव के बाद स्कूल प्रबंधन ने दोनों टीचर्स को हटा दिया है।

अमायरा को बुलिंग को परेशान करने की बात आई थी सामने दरअसल, एक नवंबर को नीरजा मोदी स्कूल की कक्षा 4 की स्टूडेंट अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर सुसाइड कर लिया था। इस घटना ने न सिर्फ जयपुर बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। अमायरा के परिजनों ने आरोप लगाया था कि स्कूल परिसर में अन्य छात्रों की ओर से उसे लगातार बुलिंग किया जा रहा था, जिसकी शिकायत के बावजूद स्कूल प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
शिक्षा विभाग ने उच्च अधिकारियों को सौंपी रिपोर्ट मामला सीबीएसई और राज्य शिक्षा विभाग दोनों स्तर पर जांच के दायरे में है। शिक्षा विभाग ने भी इस मामले में अपनी जांच पूरी कर उच्च अधिकारियों और शिक्षा मंत्री को सोमवार को रिपोर्ट सौंप दी है। राज्य शिक्षा विभाग को सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के मामले में केवल एनओसी जारी करने का अधिकार होता है। हालांकि जांच रिपोर्ट में सामने आई खामियों के आधार पर विभाग ने स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया है।
स्कूल को शो कॉज नोटिस किया था जारी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 20 नवंबर को नीरजा मोदी स्कूल को शो कॉज नोटिस जारी किया था। नोटिस में स्कूल प्रबंधन से एक महीने (20 दिसंबर) के भीतर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
सूत्रों के अनुसार- स्कूल प्रबंधन ने निर्धारित समय से पहले ही सीबीएसई को अपना जवाब सौंप दिया है। फिलहाल, सीबीएसई की गठित समिति स्कूल की रिपोर्ट और जांच निष्कर्षों की समीक्षा कर रही है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

अब सीबीएसई के अंतिम निर्णय का इंतजार अब इस पूरे मामले में अगली बड़ी कार्रवाई सीबीएसई के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। अगर बोर्ड गंभीर लापरवाही मानता है तो स्कूल की मान्यता, जुर्माना या अन्य सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। बता दें कि अमायरा की मौत ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और बुलिंग रोकने की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिसको रोकने को लेकर शासन और प्रशासन दोनों के पास ही कोई ठोस रणनीति नहीं है।






