Home » राजस्थान » बैंक-डकैती के लिए खोदी थी सुरंग:4 आरोपी 2 साल बाद बरी, कोर्ट ने कहा- जांच अधिकारी ने कमियां छोड़ी, डीजीपी करें कार्रवाई

बैंक-डकैती के लिए खोदी थी सुरंग:4 आरोपी 2 साल बाद बरी, कोर्ट ने कहा- जांच अधिकारी ने कमियां छोड़ी, डीजीपी करें कार्रवाई

जयपुर शहर में करीब दो साल पहले बैंक और ज्वेलर्स शॉप में डकैती डालने की योजना बनाने वाले चार आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया। जयपुर महानगर द्वितीय की बम ब्लास्ट केसेज की विशेष अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जांच अधिकारी द्वारा छोड़ी गई विभिन्न कमियों के कारण पुलिस की कहानी को प्रमाणित नहीं माना जा सकता है।

कोर्ट ने कहा-

QuoteImage

यह कमियां गंभीर प्रकृति की हैं। इसके कारण केस पर संदेह पैदा होता है। इसलिए जांच अधिकारी द्वारा छोड़ी गई कमियों के संबंध में विभागीय कार्रवाई के लिए डीजीपी को लिखा जाना न्यायोचित है।

QuoteImage

जयपुर के अंबाबाड़ी इलाके में 23 जनवरी 2024 को एक बड़ा गड्ढा मिला था। इस पर देखा गया तो सुरंग मिली थी।

सुरंग के अंदर मिट्टी से भरे हुए कट्टे भी मिले।
सुरंग के अंदर मिट्टी से भरे हुए कट्टे भी मिले।

ट्रक धंसने से हुआ था घटना का खुलासा अधिवक्ता विजय कुमार मालावत ने कहा- पुलिस के अनुसार 23 जनवरी 2024 को अंबाबाड़ी सब्जी मंडी के पास एक ट्रक धंसने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर वहां बड़ा गड्ढा हो गया था। गड्ढे में नीचे उतरकर देखा तो वहां सुरंग दिखाई दी। इसी दौरान पास में खड़ा एक व्यक्ति अमन खान पुलिस को देखकर भागने लगा।

उसे पकड़कर पूछताछ करने पर उसने बताया- मोहम्मद रिजवान खान उर्फ गुड्डू अपने साथियों के साथ मिलकर बैंक और ज्वैलरी शॉप में डकैती के लिए सुरंग खोद रहा था। उसकी निशानदेही पर पुलिस उस दुकान तक भी पहुंची, जिसमें से सुरंग खोदने का काम किया जा रहा था। यह दुकान भी रिजवान ने फर्जी नाम से मनोज बनकर किराए पर ली थी।

इसके बाद पुलिस ने दो अन्य आरोपी पप्पू उर्फ शरीफ और राशिद हुसैन अबरार को गिरफ्तार किया।

जांच अधिकारी ने ये कमियां छोड़ी जज अजीत कुमार हिंगर ने अपने आदेश में कहा- किरायानामा बनाने वाला मनोज ही सोनू उर्फ रिजवान उर्फ गुड्डू है। इस संबंध में कोई साक्ष्य संकलित नहीं की। उसके दोनों प्रकार के हस्ताक्षर की एफएसएल जांच नहीं करवाई।

मामले में मुख्य गवाहों से आरोपियों की पहचान परेड आयोजित नहीं करवाई गई। यह अभियोजन पक्ष की गंभीर कमी रही। घटना में आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल और सिमकार्ड जब्त नहीं किए गए। न ही घटना वाले दिन और उससे पहले की उनकी लोकेशन निकलवाई गई।

सुरंग खोदने के काम आने वाले सामान तुरंत जब्त नहीं करके घटना का खुलासा होने के 24 दिन बाद 15 फरवरी को क्यों जब्त किया गया। इसका कोई संतुष्टिपूर्वक जवाब पुलिस नहीं दे सकी।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

0
0

RELATED LATEST NEWS

Top Headlines

सीकर में प्रवर्तन निदेशालय में राहत दिलाने के नाम पर 13 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए आरोपी उत्तम पाण्डेय गिरफ्तार

*सीकर में प्रवर्तन निदेशालय में राहत दिलाने के नाम पर 13 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए आरोपी उत्तम पाण्डेय