सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 इन दिनों अपने पूरे वैभव और रंग-रौनक के साथ आगंतुकों को आकर्षित कर रहा है। गुरुवार को क्रिसमस की छुट्टी के अवसर पर मेला परिसर दिनभर चहल-पहल से भरा रहा। छुट्टियों के चलते बड़ी संख्या में बच्चे भी अपने परिवार के साथ मेले में पहुंचे और उनके लिए आयोजित लाइव कक्षाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चे लाइव क्लासेज में रुचि लेते नजर आए, और उन्होंने मिट्टी के बर्तन, क्रोशिया, मंडला आर्ट, पेंटिंग जैसी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। वहीं, बड़ी संख्या में लोग अपने मित्रों एवं परिवार के साथ मेले में पहुंचे और हस्तकला से सजे उत्पादों की खरीदारी के साथ-साथ फूड कोर्ट में विविध व्यंजनों का आनंद लेते दिखाई दिए।
आज मेले के अंतर्गत आयोजित एक विशेष टॉक शो में राजीविका की ब्रांड एम्बेसडर डॉ. रूमा देवी ने “एम्पॉवरिंग वीमेन, ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स – फ्रॉम स्किल टू सेल्फ रिलायंस” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक रहा, जिसमें डॉ. रूमा देवी ने स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, अपने कौशल को पहचानने और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सत्र के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के राजीविका के मूल उद्देश्य को प्रभावी रूप से रेखांकित किया गया।
संध्या कालीन कार्यक्रमों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मेले की शोभा को और बढ़ा दिया। महाराष्ट्र की पारंपरिक लावणी एवं गोंडल नृत्य की मोहक प्रस्तुति कलाकार शिखा जोशी द्वारा दी गई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात आयोजित भव्य फैशन शो मेले का मुख्य आकर्षण रहा।
फैशन शो की शो स्टॉपर अभिनेत्री डेज़ी शाह रहीं, जिन्होंने हेरिटेज दरबार कश्मीरी सिल्क साड़ी में रैम्प पर उतरकर उपस्थित दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस फैशन शो की विशेष बात यह रही कि इसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ रैम्प वॉक कर दर्शकों का दिल जीत लिया। एसएचजी सदस्यों में उत्तराखंड से जयश्री वर्मा, चूरू से सुमित्रा, हिमाचल प्रदेश से रुचिका, पश्चिम बंगाल से माधोबी तथा आंध्र प्रदेश से रहीमुनीसा ने फैशन शो के दौरान रैम्प पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
फैशन शो के दौरान मॉडलों द्वारा देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक एवं हस्तनिर्मित परिधानों और उत्पादों का भव्य प्रदर्शन किया गया। इसमें गुजराती लहंगा, आंध्र प्रदेश की साड़ियां, बाड़मेर की शॉल एवं जैकेट, सिल्क साड़ियां, कढ़ाई वाली जैकेट, कश्मीरी सूट तथा हाथ से पेंट किया हुआ लहंगा शामिल रहे। साथ ही बाड़मेर कढ़ाई वाले स्लिंग बैग, जूट स्लिंग एवं टोट बैग, पश्चिम बंगाल के हाथ से पेंट किए गए बांस के पंखे तथा हाथ से बने नेट के फूल जैसी आकर्षक एक्सेसरीज़ ने भी दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 न केवल ग्रामीण शिल्प, संस्कृति और परंपरा को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहा है।





