भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) लगातार सरकारी मुलाजिमों को रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ रही है। लेकिन विभाग केस चलाने की अभियोजन स्वीकृति नहीं दे रहा है। इस कारण पूरे प्रदेश में अभियोजन स्वीकृति को लेकर 600 से ज्यादा केस लंबित हैं।
इसको लेकर अब एसीबी डीजी ने एक पत्र मुख्य सचिव वी.श्रीनिवासन को लिखा है, जिसमें उन्होंने विभागों से इस लंबित मामलों को जल्द क्लियर करने के लिए कहा है। इस पत्र में डीजी ने बताया कि इन 607 में से 541 केस तो ऐसे हैं, जो तीन महीने या उससे अधिक समय से लंबित हैं, लेकिन विभाग उनमें अब तक अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं कर रहा है।
सबसे ज्यादा स्वायत्त शासन विभाग में भ्रष्टाचारी डीजी की तरफ से जो पत्र लिखा गया है, उसमें सबसे ज्यादा केस पेंडेंसी स्वायत्त शासन विभाग (नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका और स्वायत्त शासन निदेशालय) में बताई गई है। यहां 142 केस ऐसे है, जिनमें विभाग की तरफ से अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं की गई है। जबकि दूसरा नंबर पंचायती राज विभाग का है, जहां 51 केस पेंडिंग है। इन विभागों के अलावा पुलिस, ग्रामीण विकास, राजस्व विभाग, ऊर्जा विभाग, कार्मिक विभाग के भी प्रकरण है।
45 फीसदी पद खाली एसीबी डीजी ने इस पत्र में एसीबी में खाली पड़े पद भी जल्द से जल्द भरने की मांग की है। उन्होंने बताया- वर्तमान में एसीबी में सबसे ज्यादा पुलिस इंस्पेक्टर की कमी है। यहां 106 पोस्ट सेशन है, जिनमें से 58 खाली है। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के स्वीकृत 68 में से 28 पद और उप पुलिस अधीक्षक के 31 में से 6 पद खाली है।






