डूंगरपुर कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में भाजपा सांसद मन्नालाल रावत और BAP सांसद राजकुमार रोत भिड़ गए थे। विवाद के बाद दोनों सांसदों ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर जमकर हमला बोला।
भाजपा सांसद ने कहा- राजकुमार रोत मुझे थप्पड़ मारने की कोशिश में थे। वहीं BAP सांसद ने कहा- मन्नालाल रावत मुझे उकसा रहे थे।
दरअसल, पूरा विवाद जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान सोमवार सुबह हुआ था। बैठक में सबसे पहले उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और बांसवाड़ा-डूंगरपुर से बीएपी सांसद राजकुमार रोत के बीच तीखी बहस हुई थी। थोड़ी देर में बात तू-तू, मैं-मैं तक पहुंच गई थी। इसके बाद विधायक उमेश डामोर भी बहस में कूद पड़े थे।

घटनाक्रम को लेकर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने सोमवार देर रात सांसद राजकुमार रोत पर आरोप लगाया कि वे डूंगरपुर को अलगाववाद का टापू बनाना चाहते हैं। वे स्कूलों में दोपहर का भोजन बंद करने का षड्यंत्र कर रहे हैं।
बैठक के दौरान सांसद के साथ आसपुर विधायक उमेश डामोर ने गलत टिप्पणियां की, थप्पड़ मारने की कोशिश की, जान से मारने की धमकी दी और राजनीतिक छिछोरापन करने की कोशिश की।
रावत ने कहा कि बीएपी नेताओं को डूंगरपुर और आदिवासी एरिया के विकास से कोई मतलब नहीं था, बल्कि उन्होंने राज्य सरकार की ओर से करवाए जा रहे शिविरों और विकास कार्यों को लेकर बयानबाजी की।
रावत ने कहा कि सांसद राजकुमार रोत ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए कहा कि वे भ्रष्ट हैं और राशन के सामान को गुजरात ले जाकर बेच देती हैं। सांसद रोत ने आंगनबाड़ी बहनों का अपमान किया है।
प्री प्लान से आए थे सांसद रावत सांसद राजकुमार रोत ने कहा- बैठक में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत प्री प्लान से ही आए थे। हमने बैठक में कहा था कि काम गुणवत्ता का होना चाहिए। वन अधिकारी के पट्टे के लिए लोग ठोकर खा रहे हैं, हमारी कई बातें थी लेकिन उन्होंने हमारी बातों पर टोकने का काम किया। वे लड़ाई करने के उद्देश्य से आए थे। वे बखेड़ा करना चाहते थे।
रोत ने कहा कि दिशा समिति की पूर्व बैठक को सांसद रावत ने कबाड़ा शब्द कहा, तब मैंने उनको रोकने का प्रयास किया। वे हर बार रोकने का काम कर रहे थे, उन्होंने हमें उकसाने का काम किया, जबकि हम मर्यादित भाषा में बात कर रहे थे।

विवाद का क्या था कारण? सांसद डॉ. रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जनसमस्याओं के निवारण के लिए शिविर लगा रखे हैं।बअिब सांसद राजकुमार रोत इन शिविरों को लेकर टिप्पणी करते रहे कि टेंट का पैसा कहां से आ रहा है, खाने का पैसा कहां से आ रहा, ये हम लोगों का पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि यह बैठक का एजेंडा ही नहीं था, जो एक जनप्रतिनिधि के लिए अशोभनीय बात है।






