जोधपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर एक कॉलेज छात्र के साथ विश्वासघात कर उसे साइबर ठगी के जाल में फंसाने का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने छात्र के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी बैंक खाता खोला और उसमें ठगी की लाखों रुपए की राशि का लेन-देन किया। इस गंभीर जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब पंजाब पुलिस की साइबर क्राइम टीम पीड़ित छात्र के घर पूछताछ के लिए पहुंची।
इस घटना के बाद पीड़ित आयुष जांगिड़ ने अपने पूर्व सहकर्मी अभिषेक बिश्नोई और बंधन बैंक के मैनेजर सहित अन्य संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कोर्ट में इस्तगासा पेश किया। अब कोर्ट के कड़े रुख के बाद देवनगर थाना पुलिस ने सोमवार को धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है
जानिए, क्या है पूरा मामला?
एफआईआर के मुताबिक, मसूरिया श्रमिकपुरा निवासी पीड़ित आयुष जांगिड़ जोधपुर की मोगड़ा स्थित जीत (JIET) कॉलेज में फाइनल ईयर का स्टूडेंट है। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वह पढ़ाई के साथ-साथ ‘बायजूस’ कंपनी में पार्ट-टाइम जॉब करता था। वहां उसकी मुलाकात मंडोर निवासी आरोपी अभिषेक बिश्नोई से हुई, जो वहां उसका सहकर्मी था।
आरोप है कि अभिषेक ने आयुष को बंधन बैंक में अच्छी नौकरी लगवाने का झांसा दिया। 6 जुलाई 2024 को अभिषेक ने आयुष से उसका मोबाइल फोन यह कहकर लिया कि उसे नौकरी के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना है। इसी दौरान, अभिषेक ने आयुष के मोबाइल पर आए ओटीपी का उपयोग कर चुपके से बंधन बैंक की ब्यावर खास शाखा (अजमेर) में आयुष के नाम से एक ऑनलाइन खाता खोल दिया।
बैंक मैनेजर पर मिलीभगत का आरोप
परिवादी का आरोप है कि वह कभी ब्यावर गया ही नहीं और न ही उसने बैंक में कोई दस्तावेज जमा कराए। इसके बावजूद, बैंक मैनेजर भानु प्रताप मिश्रा और अन्य कर्मचारियों ने मिलीभगत कर बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के खाता चालू कर दिया। पीड़ित के पते पर चेकबुक या एटीएम कार्ड भी नहीं आया, जिसे आरोपी ने रास्ते में ही गायब कर लिया।
पंजाब पुलिस की छापेमारी से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
इस फर्जीवाड़े का खुलासा 29 मई 2025 को हुआ, जब पंजाब के संगरूर जिले की साइबर क्राइम पुलिस आयुष के घर पहुंची। पुलिस ने बताया कि करीब 1.43 करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड की जांच में इस खाते का लिंक मिला है। जांच में सामने आया कि आयुष के नाम से खुले इस फर्जी खाते में लाखों रुपए ट्रांसफर हुए और तुरंत एटीएम से निकाल लिए गए।
रिकॉर्डिंग में कबूला जुर्म
जब आयुष के परिजनों ने आरोपी अभिषेक बिश्नोई से फोन पर बात की, तो उसने स्वीकार किया कि यह खाता उसने ही खोला था और इसे अपने एक दोस्त रमेश को इस्तेमाल के लिए दिया था। बातचीत की यह रिकॉर्डिंग पुलिस और कोर्ट को सबूत के तौर पर दी गई है।
कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए देवनगर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने मुख्य आरोपी अभिषेक बिश्नोई, तत्कालीन बैंक मैनेजर भानु प्रताप मिश्रा और खाते में पैसा ट्रांसफर करने वाले मनीष खिलेरी, वाशिम राठौड़, सुबोध खिलेरी समेत कई अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, फर्जी दस्तावेज का उपयोग, आपराधिक षड्यंत्र, संगठित अपराध और आईटी एक्ट की धारा 66C, 66D के तहत मामला दर्ज किया है।





