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वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रणाली तहस-नहस 

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गुरुवार को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में ‘बांग्लादेश में मानवाधिकार एवं लोकतंत्र’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि 1971 में शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान एक नए देश के रूप में बांग्लादेश बना। बांग्लादेश को एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित करने में भारत का बहुत बड़ा योगदान था। तब से लेकर बांग्लादेश को भारत की ओर से हमेशा मदद की जाती रही है, लेकिन हाल में घटित कुछ घटनाक्रमों के बाद बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रणाली तहस-नहस हो चुकी है। वहां किसी सरकार के होने की भी कोई अनुभूति नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में चुनावों की घोषणा जरूर हुई है लेकिन वहां यह चुनाव स्वतंत्र होंगे, इसकी संभावना नगण्य है।
 देवनानी ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे हैं। उनकी संपत्तियां लुटी जा रही हैं और उनकी हत्या की घटनाएं भी मीडिया के माध्यम से सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के इस घटना क्रम पर विश्व के कई देशों ने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने पूछा कि बांग्लादेश में मानवाधिकारों के हनन पर विश्वभर में मानवाधिकार पर बोलने वाले देश एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएं चुप क्यों हैं।
  विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन परिस्थितियों में हमारा दायित्व बनता है कि हमारे सबसे निकटतम पड़ोसी जिसे एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है वहां अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई जाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में वर्ष 2025 में मंदिरों पर हमले, घरों में आगजनी, संपत्ति लुटना एवं अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमले जैसी 258 घटनाएं हुई हैं। ऐसे में हमारा दायित्व बनता है कि लोकतंत्र और मानवाधिकारों के हनन पर विश्व पटल पर अपनी बात रखते हुए वहां अल्पसंख्यक हिन्दुओं को बचाने के प्रयास किए जाएं।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत देश आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। विश्व के देशों को साथ में लेते हुए बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाना पड़ोसी देश होने के नाते हमारा कर्तव्य बनता है। अल्पसंख्यक होने के कारण बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार असहनीय है। वहां भीड़तंत्र स्थापित हो चुका है जिस पर सेना का भी प्रभावी नियंत्रण नहीं है। आज की स्थिति में वहां चुनाव हुए तो ये चुनाव निष्पक्ष होंगे, इसमें संदेह है। संयुक्त राष्ट्र संघ अथवा अन्य किसी स्वतंत्र एजेंसी की निगरानी में ये चुनाव करवाए जाएं ताकि वहां लोकतंत्र को बचाया जा सके।
उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों की बांग्लादेश की घटनाओं पर चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि देश में छोटी-छोटी घटनाओं पर मानवाधिकार हनन की बात करने वाले बांग्लादेश की इतनी बड़ी घटनाओं पर क्यों नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने भारत सरकार से बांग्लादेश में हो रहे मानवाधिकार हनन एवं अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार के मामलों में उचित कदम उठाने की अपील की और कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नाते हमारा दायित्व है कि हमारे सबसे निकटतम पड़ोसी देश में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और मानवाधिकारों की रक्षा की जाए।
देवनानी ने ऐसे गंभीर विषय पर चर्चा आयोजित करने के लिए वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीएल वर्मा को साधुवाद दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के डिजिटल न्यूज लेटर मीरा का भी विमोचन किया।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीएल वर्मा ने विशेष व्याख्यान के विषय पर प्रकाश डालते हुए बांग्लादेश में मानवाधिकारों के हनन एवं लोकतंत्र के समक्ष उपस्थित चुनौतियों से निपटने के लिए विश्व समुदाय से हस्तक्षेप का आह्वान किया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. सुबोध कुमार जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। अंत में प्रो. सुनीता चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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