नागौर की राजनीति के सबसे रसूखदार मिर्धा परिवार की जोधपुर स्थित ‘मिर्धा फार्म’ की 150 गज की जमीन लड़ाई थाने पहुंच गई है। पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा की तरफ से चचेरे भाई मनीष मिर्धा और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। ज्योति मिर्धा की तरफ से उनके अधिकृत प्रतिनिधि प्रेमप्रकाश ने रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में सूथला स्थित फार्म हाउस पर जबरन कब्जे के प्रयास और तोड़फोड़ का आरोप लगाए गए हैं। प्रताप नगर थाने में रिपोर्ट दी गई है।
वहीं, दूसरे पक्ष का दावा है कि यह विवाद केवल जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि वहां बने पूर्वजों के ‘समाधि स्थल’ को लेकर है। इसे वो बचाने का दावा कर रहे हैं। ज्योति मिर्धा का पक्ष इसे अतिक्रमण और अवैध कब्जा बता रहा है। विवाद को देखते हुए पुलिस ने समाधि स्थल पर पुलिसकर्मी को तैनात किया है।

विवाद की जड़ में 150 गज का ‘समाधि स्थल’
इस पूरे विवाद का केंद्र फार्म हाउस के अंदर बना 150 वर्ग गज का वह समाधि स्थल है, जो परिवार की भावनाओं से जुड़ा है। मनीष मिर्धा पक्ष का दावा है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस बेशकीमती जमीन को बेचना चाहती है। लेकिन बीच में आ रहा पैतृक समाधि स्थल सौदे में बाधा बन रहा है।
मनीष का आरोप है कि ज्योति मिर्धा इस समाधि स्थल को हटाना चाहती हैं, जबकि वे अपने पूर्वजों की निशानी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां पर सबसे पहले 1982 में नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि बनाई गई थी। 1987 में मनीष के बड़े भाई रवि की समाधि बनी। नाथूराम मिर्धा के निधन के बाद 1996 में उनकी भी यही समाधि बनी।
अब मनीष अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा की समाधि स्थल यहीं बना रहे हैं, जिसका विरोध किया जा रहा है। शिकायत पक्ष का कहना है कि मनीष ने गुंडा तत्वों के साथ मिलकर मालिकाना हक वाली जमीन हड़पने की नीयत से यह हमला किया है।
चाबियां छीनीं और दी धमकी: ‘यहां से निकल जाना’
एफआईआर के मुताबिक, मामले की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे हुई। जब मनीष मिर्धा अपने 10-12 साथियों के साथ जबरन फार्म हाउस में घुस आए। आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद केयरटेकर सलीम को डरा-धमकाकर तालों की चाबियां छीन लीं। यह कहते हुए धमकाया कि निकल जाना, वरना अच्छा नहीं होगा”।
इसके अगले दिन यानी 14 जनवरी को आरोपी पक्ष ने दोबारा ताले तोड़े और वहां बने समाधि स्थल के साथ छेड़छाड़ व तोड़फोड़ शुरू कर दी। परिवादी प्रेमप्रकाश ने पुलिस को बताया कि मनीष और उनके साथी वीडियो में स्पष्ट रूप से तोड़फोड़ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
नाथूराम मिर्धा ने इजराइल से मंगवाए थे आम के पौधे
विवादित संपत्ति का इतिहास दिग्गज किसान नेता स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा से जुड़ा है। उन्होंने साल 1960 में जोधपुर के चौपासनी रोड सूंथला क्षेत्र में यह 50 बीघा जमीन खरीदी थी। यहां उन्होंने खेती और बागवानी के कई अनूठे प्रयोग किए थे, जिनमें इजराइल से मंगवाए गए आम के पौधे और पिग व मुर्गी फार्म शामिल थे।
इसी फार्म के एक हिस्से में सबसे पहले नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि बनाई गई थी। वर्तमान में राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 76, 77, 80, 82 और 90 की यह जमीन डॉ. ज्योति मिर्धा और उनकी बहन हेमश्वेता मिर्धा के नाम पर दर्ज है।
पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर जांच में जुटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। प्रतापनगर पुलिस ने परिवादी प्रेम प्रकाश की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मनीष मिर्धा के खिलाफ संपत्ति में अनधिकृत प्रवेश करने, चोट पहुंचाने की तैयारी के साथ जबरन घर में घुसने और गैर-कानूनी जमावड़ा कर हमला करने की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस ने मौके के वीडियो फुटेज भी साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित किए हैं और मामले की जांच थानाधिकारी भवानी सिंह कर रहे हैं।

फार्म में दोनों पक्ष के आधेःआधे हिस्से
मनीष मिर्धा ने बताया कि जमीन के पारिवारिक बंटवारे में करीब 50 बीघा के फॉर्म की जमीन के दोनों पक्षों को आधे आधे हिस्से मिले। समाधि स्थल वाला हिस्सा ज्योति मिर्धा के परिवार को मिला। बंटवारे में यह तय किया गया की समाधि स्थल सबका सांझा रहेगा। आने-जाने के लिए इसके आगे से एक रास्ता भी छोड़ा गया। इसके बाद में ज्योति मिर्धा फैमिली के द्वारा समाधि स्थल के आगे के हिस्से की जमीन बेच दी गई। लेकिन रास्ता अभी भी मौजूद और सभी आते जाते हैं। रास्ते की जमीन अभी भी परिवार के नाम ही दर्ज है। इसको लेकर विवाद नहीं है। समाधि स्थल के गेट की दो चाबियां हैं, जो दोनों पक्ष एक-एक रखते हैं।
मनीष मिर्धा का कहना कि समाधि स्थल के पीछे की जमीन अभी ज्योति मिर्धा परिवार के पास है, जिसे वह बेचना चाह रही है। जिसमें समाधि स्थल बाधा बन रहा है तो इसे हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है।






