विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से सोमवार को विधानसभा में आदिवासी युवाओं का दल मिला। यह दल गृह मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में ‘माय भारत, जयपुर’ द्वारा आयोजित 07 दिवसीय 17वें आदिवासी युवा आदान–प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत जयपुर भ्रमण पर है ।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, कांकेर, सुकमा, झारखंड के वेस्ट सिंहभूम, ओडिशा के कंधमाल व कालाहांडी, मध्यप्रदेश के बालाघाट तथा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली सहित 05 राज्यों के 08 जिलों से आए 200 आदिवासी युवा एवं 20 एस्कॉर्ट ऑफिसर्स सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने राजस्थान विधानसभा का भ्रमण किया तथा देवनानी से संवाद किया।
देवनानी ने आदिवासी युवाओं का स्वागत करते हुए कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराएं एवं राष्ट्रभक्ति की भावना भारत की एकता और अखंडता को मजबूत आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आदान–प्रदान कार्यक्रम युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, जीवनशैली और विचारधाराओं से जोड़ते हैं तथा उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।
देवनानी ने युवाओं को संविधान, लोकतंत्र और संसदीय प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, जहाँ जनहित से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लौटकर शिक्षा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रनिर्माण और सकारात्मक सोच के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाने का कार्य करें। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने 17वें आदिवासी युवा दल कार्यक्रम के तहत हुई भाषण प्रतियोगिता में प्रथम तीन स्थानों पर आने वाले युवाओ को नगद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
युवाओं ने राजस्थान विधानसभा के सदन का अवलोकन किया तथा विधानसभा परिसर स्थित राजनैतिक आख्यान संग्रहालय का भी भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें राजस्थान की लोकतांत्रिक परंपराओं, विधायी इतिहास, संसदीय विकास यात्रा तथा लोकतंत्र के विभिन्न पड़ावों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं, जिससे युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी समझ और सम्मान का भाव विकसित हुआ।
युवाओं ने विधानसभा की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजदीक से समझा और अपने अनुभव साझा किए। युवाओं ने इस संवाद को अपने जीवन के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि इससे उनमें राष्ट्र के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की भावना और अधिक प्रबल हुई है।






