RTO की ओर से स्लीपर बसों को लगातार सीज और चालान काटने से बस ऑपरेटर्स में गुस्सा है। ऑपरेटर्स का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी बदलाव कराने के बावजूद बसों को सीज किया जा रहा है।
लाखों रुपए का चालान काट रहे हैं। इससे बस ऑपरेटर्स के सामने संचालन बंद करने की स्थिति बन गई है। इन मुद्दों को लेकर बस ऑपरेटर्स ने गुरुवार को जयपुर में बैठक की। बस ऑपरेटर्स ने 24 जनवरी को प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
ऑपरेटर्स का कहना है- जैसलमेर बस हादसे के बाद से आरटीओ की ओर से स्लीपर बसों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है, जिससे पूरा सेक्टर दबाव में है। बता दें कि राजस्थान में फिलहाल करीब 10 हजार स्लीपर बसें संचालित हो रही हैं, जिनका संचालन लगभग 2 हजार बस ऑपरेटर्स करते हैं।

बस में सुरक्षा से जुड़े बदलाव किए, फिर भी कार्रवाई ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरीज बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने बताया- जैसलमेर बस हादसे के बाद आरटीओ की ओर से स्लीपर बसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई। इस दौरान बस बॉडी मेकर्स के कारखानों को भी सीज किया गया। इसके विरोध में बस ऑपरेटर्स ने सामूहिक हड़ताल की थी, जिससे कई दिनों तक बसों का संचालन बंद रहा।
प्रशासन के साथ हुई बातचीत में बसों के अंदर सुरक्षा से जुड़े बदलाव करने पर सहमति बनी थी। इसके तहत बसों में चार इमरजेंसी गेट (एक पीछे, एक साइड में और दो आगे की ओर), फायर सेफ्टी सिस्टम, ग्लास तोड़ने के लिए हथौड़े लगाने और बस की छत से करियर हटाने जैसे उपाय तय किए गए थे।
अधिकतर बस ऑपरेटर्स ने तय किए गए सुरक्षा उपायों की तत्काल पालना करते हुए बसों में जरूरी बदलाव करवा लिए। इसके बावजूद आरटीओ की ओर से बसों को फिर से सीज किया जा रहा है और धारा 182A के तहत लाखों रुपए के चालान काटे जा रहे हैं। बस ऑपरेटर्स का कहना है-
धारा 182A बस निर्माता पर लगती है, जिसमें 1 लाख से लेकर 100 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है लेकिन आरटीओ की ओर से यह धारा सीधे बस मालिकों पर लगाकर चालान काटे जा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।


अब बसों की साइज को लेकर भी चालान बस ऑपरेटर संग्राम सिंह ने बताया- पहले सुरक्षा नॉर्म्स के नाम पर चालान किए जा रहे थे और अब बसों की साइज को लेकर भी जुर्माना लगाया जा रहा है। कुल मिलाकर लगातार किसी न किसी आधार पर बसों का चालान हो रहा है। ऐसे में बस ऑपरेटर्स न तो सही तरीके से व्यापार कर पा रहे हैं और न ही खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने बताया- नया बस बॉडी कोड 1 सितंबर से लागू हुआ है, जबकि प्रदेश में चल रही अधिकतर स्लीपर बसें उससे पहले बनी हुई हैं। ये बसें लोकल बस बॉडी बिल्डर्स से बनवाई गई थीं, जिनमें साइज को लेकर कोई खास प्रावधान नहीं था। ये बसें परिवहन विभाग की जांच के बाद रजिस्टर्ड की गई थीं। अगर उस समय इनमें कोई कमी थी, तो इन्हें रजिस्ट्रेशन ही नहीं दिया जाना चाहिए था।
24 जनवरी को प्रदर्शन की चेतावनी लगातार हो रही कार्रवाई से आहत बस ऑपरेटर्स ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। राजेंद्र शर्मा ने बताया कि 24 जनवरी को सभी बस ऑपरेटर्स सामूहिक रूप से एकत्र होकर परिवहन विभाग की इन कार्रवाइयों के विरोध में प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि अगर कार्रवाई का यह सिलसिला नहीं रुका, तो एक साथ सभी तरह के बसों का संचालन पूरी तरह बंद करने की नौबत आ सकती है।





