जोधपुर में एक ओवरस्पीड कार ने स्कूटी सवार दो भाइयों को कुचल दिया। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरा गंभीर घायल है। पुलिस के अनुसार स्विफ्ट कार नाकाबंदी तोड़कर भाग रही थी।
पुलिस के पीछा करने पर ड्राइवर ने स्पीड बढ़ा दी थी। एक्सीडेंट शुक्रवार सुबह 4 बजे महामंदिर थाना क्षेत्र के ज्योतिबा फुले मार्ग पर हुआ। घटना का सीसीटीवी फुटेज आज सामने आया है। आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके 2 साथी फरार हैं।

रेलवे स्टेशन जो रहे थे दोनों भाई
महामंदिर थानाधिकारी देवेंद्र देवड़ा ने बताया कि एक्सीडेंट में अमान (20) की मौत हुई है। उसका चचेरा भाई रेहान हादसे में गंभीर घायल हुआ है।
अमान की माता का थान क्षेत्र में फर्नीचर की दुकान है। दोनों उसी पर काम करते थे। शुक्रवार सुबह अहमदाबाद जाने के लिए रेलवे स्टेशन जा रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।

पुलिस को देख दौड़ाई कार
पुलिस के अनुसार स्विफ्ट कार रवि चौधरी चला रहा था। एक्सीडेंट के समय कार में उसके दो दोस्त भी थे। ये लोग बलदेव मिर्धा सर्किल के पास 100 की स्पीड से निकले तो वहां मौजूद पेट्रोलिंग गाड़ी को इन पर शक हुआ।
पुलिसकर्मियों ने इनका पीछा किया तो इन्होंने स्पीड बढ़ा दी। करीब डेढ़ किलोमीटर आग स्विफ्ट ने भाइयों की स्कूटी को टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी तेज थी कि कार का एक तरफ का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और स्कूटी काफी दूर तक सड़क पर घिसटती हुई गई। अमान का शरीर का कुछ हिस्सा कार के नीचे भी आ गया था।

आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार, 2 साथी फरार
एक्सीडेंट के बाद भी माता का थान निवासी आरोपी ड्राइवर रवि चौधरी ने कार नहीं रोकी। पुलिस वैन ने पीछा कर कार को रुकवाया। इस दौरान आरोपी के 2 साथी राहुल पंचारिया और भरत फरार हो गए। पुलिस इनकी तलाश कर रही है।
तमाशबीन खड़े रहे, किसी ने नहीं की मदद
आज सामने आए सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहा है एक्सीडेंट के दौरान सड़क पर चहल-पहल थी। राहगीर घायलों को सड़क पर तड़पते देखते रहे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की।
कई गाड़ियां भी उनके पास से निकलते हुए नजर आईं। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उठाकर एमजीएच हॉस्पिटल पहुंचाया।
गोल्डन आवर में मदद जरूरी
1980 में अमेरिकी सैन्य सर्जन आर एडम काउली ने ‘गोल्डन आवर’ शब्द को मशहूर किया था। इस शब्द का ज्यादातर इस्तेमाल मेडिकल इमरजेंसी में किया जाता है।
गोल्डन आवर का मतलब है- एक्सीडेंट या गंभीर चोट लगने के बाद पहला घंटा। इस दौरान अगर समय रहते इलाज शुरू कर दिया जाए, तो घायल की जान बचने के चांस बढ़ जाते हैं।
घायलों की मदद करने पर मिलता का प्राइज
पुलिस की गुड सेमेरिटन (नेक दिल) योजना हादसे के पीड़ितों की मददगारों को कानूनी और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। बिना किसी परेशानी की आजादी के साथ नकद प्राइज भी दिया जाता है। राजस्थान में यह 25 हजार रुपए तक है।





