सभी सरकारों ने देश के आज़ादी के अस्सी वर्ष में संविधान की मुख्य प्रस्तावना से परे जाकर सत्ता के लिए सवर्ण वर्ग से शिक्षा, नौकरी, छात्रवृत्ति व अन्य योजनाओं की नीतियों के आधार पर जातीय भेदभाव किया है और जातीय भेदभाव का अपराधी भी सवर्ण वर्ग को घोषित कर दिया गया है
भारत सरकार द्वारा हाल ही में लागू किया गया यूजीसी कानून देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है। यह कानून विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त करने, बच्चों में जातिगत भेदभाव भड़काने , एक पक्षीय कार्यवाही , शिक्षकों की आवाज़ दबाने और विद्यार्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में धकेलने का प्रयास है। इसी काले कानून के खिलाफ जनआक्रोश को संगठित करने व सरकार तक अपनी पीड़ा पहुँचाने हेतु शंखनाद सभा का आयोजन किया जा रहा है।
यह सभा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के मंदिरों को जातिवाद से बचाने का संकल्प है। यह उस तानाशाही और जातिवादी सोच के खिलाफ शंखनाद है, जो शिक्षा को केंद्रीकरण और नियंत्रण का साधन बनाना चाहती है। हम स्पष्ट शब्दों में कहना चाहते हैं — “यूजीसी काला कानून वापस लो”, “शिक्षा पर हमला बंद करो”और जातीय भेदभाव बंद करो ।
डिवाइड एंड रूल के आधार पर देश के लोगो को बाँट कर सत्ता की राजनीति बंद हो ।
शंखनाद सभा के माध्यम से विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और आम नागरिक एकजुट होकर यह संदेश देंगे कि शिक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। यह आंदोलन लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण लेकिन पूरी मजबूती के साथ सरकार तक अपनी आवाज़ पहुँचाएगा।
प्रेस कांफ्रेंस में विप्र महासभा के संस्थापक सुनील उदेईया, करनी सेना के प्रमुख महिपाल मकराना, परशुराम सेना के अध्यक्ष एड अनिल चतुर्वेदी, अग्रवाल समाज के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश भाड़ेवाला, वैश्य सेना के अध्यक्ष राजेंद्र मित्तल, गौड़ सनाधय के अध्यक्ष देवीशंकर शर्मा राज, योगेन्द्र भारद्वाज , ब्राह्मण महासभा के एसडी शर्मा, पूर्व मंत्री शैलेंद्र जोशी, राधेश्याम जैमिनि, पंकज जोशी, पंकज पंचलंगिया, दिनेश रणेजा , विप्र सेना के नवीन उपाध्याय, अजीत जोशी सहित प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे
कार्यक्रम विवरण:
📅 दिनांक: 1 फ़रवरी 2026 (रविवार)
📍 स्थान: शहीद स्मारक, जयपुर
⏰ समय: 12.00 बजे से
यह शंखनाद सभा उच्च शिक्षा की रक्षा, संविधान के उद्देश्य और लोकतंत्र को बचाने की निर्णायक लड़ाई का आरंभ है।






