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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अति पिछड़ा वर्ग के सशक्तीकरण का नया अध्याय

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील, दूरदर्शी और कुशल नेतृत्व में प्रदेश का अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की मजबूत राह पर अग्रसर है। राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और ठोस नीतियों के परिणामस्वरूप अति पिछड़ा वर्ग के हजारों परिवार न केवल विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, संबल और सम्मान के जरिए सामाजिक न्याय के नए आयाम भी स्थापित कर रहे हैं।

छात्रवृत्ति योजनाओं से हजारों विद्यार्थियों को मिला संबल—

मुख्यमंत्री शर्मा के नेतृत्व में अति पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक उत्थान के लिए देवनारायण योजना के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों पर वर्ष 2025 में 248 करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 11 से उच्च शिक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए इस वित्तीय वर्ष में 102.42 करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय कर 37 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है। वहीं पूर्व मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (कक्षा 6 से 10) में 7.10 करोड़ रुपए व्यय कर 69 हजार से अधिक विद्यार्थियों को सहायता दी गई है।

देवनारायण छात्रावास योजना से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नींव मजबूत—

देवनारायण गुरुकुल योजना के तहत निजी प्रतिष्ठित विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर प्रतिभावान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रतिवर्ष 500 विद्यार्थियों के प्रवेश के प्रावधान वाली इस योजना में चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपए से अधिक व्यय किया जा चुका है। इसी तरह देवनारायण छात्रावास योजना के अंतर्गत स्वीकृत छात्रावासों में 3750 विद्यार्थी तथा देवनारायण आवासीय विद्यालय योजना के तहत स्वीकृत विद्यालयों में 5 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए विशेष पहल—

बालिका शिक्षा को बढ़ावा देते हुए एमबीसी छात्राओं के लिए करौली के नादौती एवं भरतपुर के बयाना में छात्रा महाविद्यालय मय हॉस्टल की स्थापना की गई है। नादौती कॉलेज में 74.80 लाख रुपए व्यय कर 177 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इसी तरह बयाना कॉलेज में 155.29 लाख रुपए व्यय कर 543 छात्राओं को शिक्षा का अवसर उपलब्ध हुआ है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का मार्ग हुआ प्रशस्त—

मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के माध्यम से एमबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को आईएएस, आरएएस, क्लैट, नीट, रीट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए चयनित संस्थाओं में कोचिंग उपलब्ध करवाई जा रही है। इस योजना में 4 करोड़ रुपए व्यय कर विद्यार्थियों को भविष्य की तैयारी का सशक्त मंच दिया गया है।

कौशल विकास से रोजगार की ओर कदम—

इसी तरह देवनारायण योजना के अंतर्गत स्वीकृत 6 आईटीआई संस्थानों में 365 लाख रुपए व्यय कर 500 से अधिक विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे युवा आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अति पिछड़ा वर्ग का सशक्तीकरण केवल योजना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की जीवंत मिसाल बन चुका है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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