जयपुर। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा की मंशाओं के अनुरूप झालावाड़ पुलिस द्वारा कंजर समुदाय को अपराध के दुष्चक्र से बाहर निकालकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शुरू किया गया ‘नया सवेरा’ अभियान अब सकारात्मक परिणाम देने लगा है। पुलिस महानिरीक्षक, कोटा रेंज हरेन्द्र कुमार महावर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में कंजर पुनर्वास अभियान के तहत 360 लाभार्थियों को आवासीय पट्टों का लाभ दिया गया। इनमें 283 पट्टे वितरित किए गए, जबकि 77 पट्टों की प्रक्रिया जारी है।
कार्यक्रम में जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और राजस्थान टेक्सटाइल मिल (आरटीएम), भवानीमंडी के अध्यक्ष रोहित अरोड़ा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान अभियान की उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया।
अपराध के दुष्चक्र को तोड़ने का प्रयास
झालावाड़ जिले में कंजर समुदाय के 18 डेरों में लगभग 4,100 लोग निवास करते हैं। पिछले कई दशकों से इन डेरों से जुड़े लोगों के खिलाफ राजस्थान और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में चोरी, लूट, नकबजनी और डकैती जैसे अपराधों के मामले दर्ज होते रहे हैं। जिले में हर वर्ष औसतन 150 से 200 आपराधिक प्रकरण दर्ज होना एक बड़ी चुनौती थी।
झालावाड़ पुलिस ने यह महसूस किया कि केवल कानूनी कार्रवाई से स्थायी बदलाव संभव नहीं है। शिक्षा, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा के अभाव ने समुदाय को एक ऐसे चक्र में फंसा दिया था, जहां गरीबी और अपराध एक-दूसरे को बढ़ावा दे रहे थे। इसी सोच के साथ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में ‘नया सवेरा’ अभियान शुरू किया गया।
2,000 लोगों ने ली अपराध छोड़ने की शपथ
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचन्द्र मीणा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने प्रत्येक डेरे में जाकर घर-घर सर्वे किया और समुदाय के लोगों से संवाद स्थापित किया। अभियान के तहत अब तक लगभग 2,000 लोगों ने अपराध छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की शपथ ली है।
रोजगार से जुड़ रहे युवा, 100 परिवारों को मिला स्थायी काम
समुदाय के सामने रोजगार सबसे बड़ी समस्या थी। इसे देखते हुए 1 मार्च 2026 को राजस्थान टेक्सटाइल मिल, भवानीमंडी के साथ समझौता किया गया। इसके बाद विभिन्न डेरों में रोजगार शिविर आयोजित किए गए।
अब तक 170 लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है और लगभग 100 परिवारों को राजस्थान टेक्सटाइल मिल में स्थायी रोजगार से जोड़ा गया है। रोजगार के साथ-साथ श्रमिकों को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में आया बड़ा बदलाव
समुदाय के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। बच्चों को निःशुल्क गणवेश, पाठ्य सामग्री, पोषाहार और परिवहन जैसी सुविधाओं के बारे में जागरूक किया गया। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि चालू सत्र में 165 नए बच्चों का स्कूलों में नामांकन हुआ है, जबकि वर्तमान में लगभग 900 बच्चे नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं।
मानव तस्करी के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई
अभियान के दौरान कुछ नाबालिग बालिकाओं की खरीद-फरोख्त की जानकारी मिलने पर पुलिस ने विभिन्न राज्यों के साथ संयुक्त अभियान चलाया। इस कार्रवाई में अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 14 नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित रेस्क्यू कर पुनर्वासित किया गया।
आधार, बैंक खाते और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ रहे परिवार
जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग के सहयोग से कई परिवारों के आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बनवाए गए। अब तक 154 लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है। विभिन्न डेरों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर निःशुल्क जांच, उपचार और दवाइयों की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
इसके अलावा कई डेरों में इंटरलॉकिंग सड़कें और मुक्तिधाम जैसी आधारभूत सुविधाओं का भी विकास किया गया है।
होमगार्ड में चयन बना बदलाव का प्रतीक
अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक डेरा बिरियाखेड़ी निवासी मनोज कुमार का राजस्थान होमगार्ड में चयन है। यह इन डेरों से सरकारी सेवा में चयनित होने वाले पहले युवा हैं। इसे समुदाय में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।
अपराध के मामलों में ऐतिहासिक गिरावट
अभियान का प्रभाव अपराध के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। जहां पहले इस समुदाय से जुड़े लोगों के खिलाफ हर वर्ष 150 से 200 मामले दर्ज होते थे, वहीं 1 अप्रैल से 15 अगस्त 2026 तक केवल 9 मामले दर्ज हुए हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि पुनर्वास आधारित पुलिसिंग समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकती है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पुनर्वास के क्षेत्र में सहयोग देने वाले विभिन्न विभागों, संस्थाओं और पुलिसकर्मियों को भी सम्मानित किया गया। पुलिस महानिरीक्षक हरेन्द्र कुमार महावर ने कहा कि अपराध नियंत्रण केवल दंडात्मक कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार, आवास और सम्मान के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना ही स्थायी समाधान है।
Author: newsinrajasthan
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