जयपुर। मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ राजस्थान पुलिस के अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो साल से फरार चल रहे 25 हजार रुपए के इनामी डोडा-पोस्त तस्कर भैराराम पुत्र सालूराम देवासी निवासी अगवरी, थाना आहोर, जिला जालोर को पाली के तखतगढ़ से गिरफ्तार किया है। आरोपी पुलिस से बचने के लिए छह राज्यों में 16 से अधिक ठिकाने बदल चुका था। एएनटीएफ ने ‘ऑपरेशन मदभ्रमर’ के तहत इसे अपनी 90वीं बड़ी सफलता बताया है।
एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया कि महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा एवं अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एमएन के मार्गदर्शन में मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। भैराराम की गिरफ्तारी पर पुलिस अधीक्षक जालोर की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था।
भेड़-बकरियां चराने से तस्करी तक पहुंचा : पुलिस के अनुसार भैराराम ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की। पढ़ाई छोड़ने के बाद वह भेड़-बकरी चराने और खेती-बाड़ी का काम करने लगा। वर्ष 2019 में पिता की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ीं। इसी दौरान वह मादक पदार्थ तस्करों के संपर्क में आया। शुरुआत में वह वाहनों में डोडा-पोस्त की खेप लाने-ले जाने के लिए चालक के रूप में काम करता था और एक चक्कर के करीब 50 हजार रुपए कमाता था। धीरे-धीरे तस्करी के नेटवर्क में उसकी भूमिका बढ़ती गई और वह खुद इस अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया।
साथी पकड़े जाते रहे, खुद बच निकलता रहा: वर्ष 2024 में आहोर थाना पुलिस ने डोडा-पोस्त की खेप ले जा रहे उसके साथियों को वाहन सहित पकड़ लिया था। भैराराम भी उनके साथ था, लेकिन पुलिस को चकमा देकर मौके से फरार हो गया। इसके बाद उसने भाद्राजून क्षेत्र के एक अन्य तस्कर के साथ मिलकर दोबारा तस्करी शुरू कर दी। जब उसका साथी पुलिस के हत्थे चढ़ा और भैराराम का नाम सामने आया तो उसने फिर ठिकाना बदल लिया।
छह राज्यों में बदलता रहा ठिकाने : गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने करीब दो वर्षों तक लगातार अपना ठिकाना बदला। पुलिस के मुताबिक उसने हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर फरारी काटी। राजस्थान में वह चित्तौड़गढ़, जयपुर, पाली और उदयपुर सहित कई शहरों में छिपता रहा। परिवार और तस्कर साथियों से संपर्क के लिए वह राह चलते लोगों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था, जिससे उसकी लोकेशन और पहचान पुलिस से छिपी रहे।
दो साल बाद फिर तस्करी शुरू करना पड़ा भारी: करीब दो साल तक फरार रहने के बाद भैराराम ने लगभग 15 दिन पहले फिर डोडा-पोस्त की तस्करी शुरू कर दी। पुलिस से बचने के लिए उसने पाली के तखतगढ़ में किराये का कमरा लिया और वहीं रहने लगा। एएनटीएफ के सूचना तंत्र को उसके दोबारा तस्करी में सक्रिय होने की जानकारी मिली। टीम ने लगातार निगरानी और सूचना संकलन के बाद उसके ठिकाने का पता लगाया और योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
तस्करी की शेखी ने पहुंचाया सलाखों के पीछे: पुलिस के अनुसार भैराराम अपने एक तस्कर साथी के सामने अपनी तस्करी के तरीके की शेखी बघार रहा था। वह खुद को तस्करी का मुख्य सूत्रधार बताते हुए दावा कर रहा था कि वह हर बार पुलिस को चकमा देकर निकल जाता है और इस बार भी तीन-चार चक्कर लगाने के बाद यहां से निकल जाएगा, जबकि उसका साथी पकड़ा जाएगा। उसकी यही शेखी उसके लिए भारी पड़ गई। साथी ने एएनटीएफ से संपर्क कर उसके तखतगढ़ में होने की सूचना दे दी। सूचना मिलते ही टीम ने दबिश देकर 25 हजार रुपए के इनामी भैराराम को गिरफ्तार कर लिया।
नेटवर्क को लेकर पूछताछ जारी : आरोपी की गिरफ्तारी के बाद एएनटीएफ उससे मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े संपर्कों, साथियों और उसके नेटवर्क के संबंध में पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में डोडा-पोस्त तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
Author: newsinrajasthan
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