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जयपुर में सुबह-सुबह बारिश, 5 डिग्री तक गिरा तापमान:राजस्थान के 9 जिलों में बरसात का अलर्ट, नदियां उफान पर, कई इलाकों का संपर्क कटा

राजस्थान में मानसून की एंट्री के बाद से लगातार बारिश हो रही है। सोमवार सुबह-सुबह जयपुर सहित तमाम इलाकों में रिमझिम बारिश की शुरुआत हुई। कभी तेज तो कभी धीमी बारिश का दौर चलता रहा। उधर, मौसम विभाग ने आज और कल प्रदेश में मानसून की गतिविधियां धीमी होने की संभावना जताई थी। अब 10 जुलाई को प्रदेश के 9 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

सबसे ज्यादा बरसात भरतपुर के भुसावर में
रविवार को पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, अलवर, दौसा,करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, चूरू, हनुमानगढ़, बीकानेर, झुंझुनूं और गंगानगर जिलों में बरसात हुई। दौसा, गंगानगर, भरतपुर, अलवर, झुंझुनूं के एरिया में 25 से लेकर 84MM तक बरसात दर्ज हुई। सबसे ज्यादा बरसात भरतपुर के भुसावर में 84MM हुई। देर शाम अजमेर और टोंक के एरिया में भी बारिश हुई थी।

तापमान गिरा, गर्मी से राहत मिली
बारिश के चलते गंगानगर, हनुमानगढ़ में लोगों को गर्मी से राहत मिली। यहां शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस था। रविवार को पारा गिरकर 32 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज हुआ। चूरू, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर के तापमान में भी 3 से लेकर 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हुई। इन शहरों में शनिवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के नजदीक था, जो रविवार को गिरकर 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच आ गया।

नदियों का जलस्तर बढ़ने से सड़कों पर आवाजाही बाधित
पूर्वी राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से बनास, पार्वती समेत अन्य बरसाती नदियों का जलस्तर बढ़ गया। बनास नदी में पानी आने से सवाई माधोपुर के शिवाड़ एरिया का संपर्क सवाई माधोपुर शहर से कट गया। सवाई माधोपुर-शिवाड़ रोड से क्रॉस कर रही बनास नदी की रपट पर कल पानी बहने लगा। इससे वाहनों की आवाजाही रुक गई।

पार्वती नदी का भी जलस्तर बढ़ा
कोटा के खातोली (इटावा) में पार्वती नदी का भी जलस्तर बढ़ गया। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से इन नदी के रपट पर पानी ओवरफ्लो होकर बह रहा है। इसके कारण कई गांवों की शहरों से आवाजाही बंद हो गई। टोंक जिले की लावा पंचायत का संपर्क गणेशपुरा, भेरूपुरा, बालापुरा, नयागांव बागरियाा की ढाणी से कट गया। यहां विजय सागर बांध का भी जलस्तर बढ़ गया है। इससे ओवरफ्लो होकर पुलिया के ऊपर से पानी बह रहा है।

तेज बारिश का अलर्ट नहीं
मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर की ओर से आज और 9 जुलाई को राजस्थान में कहीं भी तेज बारिश का अलर्ट नहीं है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, जयपुर, बीकानेर और अजमेर संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर स्थानीय स्तर पर बादल बनने और हल्की बारिश हो सकती है।

10 जुलाई से मानसून फिर से एक्टिव होगा और बारिश का दौर शुरू होगा। 10 जुलाई को सवाई माधोपुर, करौली, दौसा, बूंदी, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, बारां और झालावाड़ के एरिया में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए इन सभी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

11 जुलाई को जयपुर, दौसा, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, बारां, झालावाड़, कोटा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा जिलों में मध्यम और कहीं-कहीं तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

राजस्थान के 691 में से 420 बांध अभी भी सूखे
मानसून आने के बाद प्रदेश के बांधों में रौनक लौटी है। अब तक हुई बारिश के बाद सबसे ज्यादा हाड़ौती अंचल के बांधों में 55.50% पानी हो पाया है। मारवाड़ क्षेत्र के अधिकांश बांध खाली हैं। जोधपुर जोन के बांधों में मात्र 7.45% पानी ही है। राजस्थान के 691 में से 420 बांध अभी भी सूखे हुए हैं।

255 बांधों में नाम मात्र का पानी आ पाया
255 बांधों में नाम मात्र का पानी आ पाया है। अब तक की बारिश में केवल 16 बांध पूर्ण रूप से भरे हैं। इसमें से तीन बड़े व 13 छोटे हैं। सभी बांधों में 34.84% पानी है, जबकि पिछले साल जुलाई के प्रारंभ में बांध 51.47% तक भरे हुए थे।

नहरों में सफाई नहीं, पानी का रास्ता बंद
मानसून आने से पहले जल संसाधन विभाग की ओर से बांधों तक आने वाले रास्तों के अतिक्रमण व अवरोध हटाए जाने थे, लेकिन विभाग की यह कार्यवाही फील्ड में कम और कागजों में ज्यादा होती है। यही वजह है कि अधिकांश बांधों तक पानी लाने वाली नहरों व नदियों के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण हो गए और बिल्डिंग व फार्म हाउस बन गए हैं। ऐसे में बांधों तक पानी नहीं पहुंच पाता है।

प्रदेश के 22 बड़े बांधों में केवल 46.64 प्रतिशत ही पानी
प्रदेश के 22 बड़े बांधों में केवल 46.64 प्रतिशत पानी है। इन बांधों की क्षमता 8104.66 एम.क्यूएम है, जबकि इनमें पानी 3780.111 एम.क्यूएम ही है। जयपुर का रामगढ़, छापरवाड़ा, कालख सागर सूखे पड़े हैं। वहीं, डीग के सिकरी बंध, पाली के सरदारसमंद भी सूखे पड़े हैं।

बूंदी का गुढ़ा बांध, पाली का जवाई बांध, भीलवाड़ा का मेजा बांध, बांसवाड़ा का होरा बांध में नाममात्र का पानी है। मारवाड़, ढूंढाड़ व मेवाड़ के बांधों में सबसे कम पानी है। वहीं, कोटा और बांसवाड़ा जोन के बांधों में अब तक पर्याप्त पानी आ चुका है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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