विधानसभा में अनुदान मांगों पर बहस और रिप्लाई के पहले ही दिन रात को माहौल बिगड़ गया। माहौल बिगाड़ने की शुरूआत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत के शब्दों से ही हुई।गहलोत ने अनुदान मांगों पर रिप्लाई की शुरूआत में ही विपक्ष के हंगामे में असंसदीय भाषा बोली। विपक्ष का आरोप है कि गहलोत ने टुकड़े टुकड़े कर देंगे। कांग्रेस तेरे तो टुकड़े होंगे जैसे शब्द बोले।
इस पर आपत्ति करने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली खड़े हुए तो उनका माइक बंद कर दिया। इससे विपक्ष उग्र हो गया और स्पीकर पर सत्ता पक्ष का साथ देने का आरोप लगाते हुए वेल में नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बावजूद मंत्री अपना भाषण बोलते रहे और पूरे समय स्पीकर भी विपक्ष पर चिल्लाते रहे कि मुझे धमकी नहीं चलेगी। मैं नहीं डरता। जाओ।
सदन चलने दोगे और कुर्सियों पर बैठोगे तो ही सुना जाएगा। एक साथ 3 तरह के शोरगुल में न मंत्री का जवाब कोई सुन पाया न स्पीकर की बात विपक्ष ने सुनी और न विपक्ष रिप्लाई में अपना पक्ष रख पाया। दिन भर 50 विधायकों ने मांगें रखी, मेहनत पर पानी फिर गया। जूली ने चेतावनी दी कि आसन धृतराष्ट्र नहीं बन सकता। ऐसा माहौल पहली बार देखा। पक्षपात करने पर हम इस तरह सदन नहीं चलने देंगे।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री की प्रमुख घोषणाए
एससी-एसपी एवं टीएसपी फंड्स को 1000 करोड़ से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपए किया।
ओबीसी और ईडब्लुएस के युवाओं को सामाजिक सुरक्षा के लिए पहली बार 150 करोड़ रुपए का प्रावधान किया।
पहली बार अनुजा निगम के माध्यम से ईडब्ल्यूएस को ऋण उपलब्ध कराने के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 31 मई, 2024 तक सभी लाभार्थियों को पेंशन का भुगतान कर दिया।
पहली बार मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रसित विशेष योग्यजनों को एक लाख रुपए तक की व्हील चेयर देने की घोषणा।
छात्रावासों में रहने वाले बालक-बालिकाओं का मासिक अनुदान 2500 रुपए से बढ़ाकर 3000 रुपए किया।
पहचान प्रमाण पत्र के लिए जिलों में घुमंतु सहायता शिविर लगाएंगे।
मुख्यमंत्री घुमंतु आवास योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।
एससी वर्ग के लिए अम्बेडकर तीर्थ योजना शुरू करेंगे।






