आज क्राइम फाइल्स में 13 साल पुराना केस। एक विधायक के बेटे की किडनैपिंग और मर्डर। केस चौंकाने वाला था। क्योंकि ये किडनैपिंग हथियार के दम पर नहीं हुई थी। विधायक का बेटा खुद उनके साथ गाड़ी में बैठकर गया था। अगले दिन विधायक के बेटे का शव मिला। इस केस ने पूरे राजस्थान को हिलाकर रख दिया था। गृहमंत्री को विधानसभा में आकर बताना पड़ा…किशनगढ़ विधायक के बेटे की हत्या कर दी गई है। जब गृहमंत्री ये सूचना दी, तब विधायक बजट भाषण सुन रहे थे।
9 मार्च 2011, सुबह का वक्त। किशनगढ़ के सिनोदिया मार्बल गोदाम पर कुछ लोग बैठे थे। इनमें कांग्रेस के कद्दावर जाट नेता और विधायक नाथूराम सिनोदिया का बेटा भंवरलाल सिनोदिया भी था।
इसी दौरान वहां अमित भैंसा व अब्दुल गफ्फार आए। अमित ने भंवरलाल से कुछ बात की। इसके बाद भंवरलाल ने एक आदमी से फोन पर बात की।
अगले ही पल गुस्से में भंवरलाल भागचंद चोटिया और अब्दुल गफ्फार के साथ स्कॉर्पियो लेकर रूपनगढ़ के लिए निकल गया। वहां से निकलते ही गाड़ी में बैठे भागचंद के पास फोन आता है। फोन करने वाला भंवरलाल को फाेन देने के लिए कहता है। दोनों में बातचीत होती है और गाड़ी सुरसुरा गांव के सैनी ढाबा की तरफ मोड़ दी जाती है।
सैनी ढाबा पहुंचते ही स्कॉर्पियो के ब्रेक लगते हैं। थोड़ी ही देर बाद अचानक एक बोलेरो आकर रुकती है। स्कॉर्पियो में बैठा भंवरलाल सिनोदिया उतरकर बोलेरो के पास जाता है। बोलेरो में बैठे किसी शख्स से बात करता है।
ये देखकर भागचंद चोटिया और अब्दुल गफ्फार भी बोलेरो की तरफ जाने लगते हैं। भंवरलाल उन दोनों को रोक देता है और कहता है- मैं बोलेरो में इनके साथ जा रहा हूं। आप दोनों स्कॉर्पियो से मेरे पीछे आ जाना। इतना कहकर वो बोलेरो में बैठकर रवाना हो जाता है।
भागचंद चोटिया और अब्दुल गफ्फार स्कॉर्पियो से बोलेरो का पीछा करते हैं। वो बोलेरो में बैठे 4 लोगों में से दो को पहले से जानते-पहचानते थे। अचानक ही मेगा हाइवे पर बोलेरो की रफ्तार बढ़ जाती और स्कॉर्पियो से बहुत आगे निकल जाती है। भागचंद और अब्दुल परेशान हो जाते है। उन्हें भंवरलाल सिनोदिया की की चिंता होने लग जाती है।
भागचंद भंवरलाल के मोबाइल पर फोन लगाता है। फोन रिसीव नहीं होता। इसके बाद वो बोलेरो में बैठे एक दूसरे परिचित को फोन लगाता है। वो फोन उठाता है और कहता है कि भंवरलाल उनके साथ ही हैं। वो पांच-दस मिनट में लौट आएंगे।
इसके काफी देर बादभी जब वे नहीं लौटे तो उसे वापस कॉल लगाया गया। इस बार उसने 15 मिनट में लौट आने की बात कही। तकरीबन 20 मिनट के बाद जब वापस कॉल लगाया तो उसका फोन स्विच ऑफ़ आ रहा था। इसके साथ ही भंवरलाल का फोन भी स्विच ऑफ़ हो गया था।
अब मामला संगीन हो गया था क्योंकि बोलेरो में भंवरलाल सिनोदिया के साथ बलभाराम नाम का शख्स था, जो इलाके में दबंगई के लिए कुख्यात हो रहा था।
भंवर सिनोदिया और बलभाराम दोनों के मोबाइल बंद आने लगे तो भागचंद चोटिया ने तत्काल ही रूपनगढ़ पुलिस को कॉल किया। बलभाराम पर विधायक के बेटे भंवर सिनोदिया का अपहरण करने का शक जताया। ये सूचना मिलते ही प्रदेशभर की पुलिस एक्टिव हो गई।
CMO से लेकर PHQ तक हरकत में आ गया था। तत्कालीन गृह मंत्री शांति धारीवाल खुद मामले में पुलिस से पल-पल की अपडेट ले रहे थे। पुलिस पर लगातार प्रेशर बढ़ता जा रहा था। प्रदेश में विपक्ष में बैठी बीजेपी विधानसभा में कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमलवार हो गई थी।
घटना के अगले दिन गृह मंत्री शांति धारीवाल ने सदन को बताया कि किशनगढ़ विधायक नाथूराम सिनोदिया के बेटे भंवर की हत्या कर दी गई है। भंवर लाल सिनोदिया का शव जयपुर में नरेना थाना इलाके के एक गांव से बरामद किया गया है।
धारीवाल ने सदन को ये भी बताया कि भंवर को एक दिन पहले अजमेर जिले से बोलेरो में चार लोगों ने कथित तौर पर किडनैप किया था। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
उनमें से एक आरोपी सिकंदर ने कबूल किया कि उसके दूसरे साथी शहजाद ने ही भंवर पर गोली चलाई थी। हालांकि, धारीवाल ने कहा कि अभी इन्वेस्टिगेशन चल रही है। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
गृह मंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में दिए अपने स्पष्टीकरण में बलभाराम को भाजपा का कार्यकर्ता बताया। सदन में तब विपक्ष की नेता वसुंधरा राजे ने उनका विरोध करते हुए कहा कि एक अपराधी तो अपराधी ही होता है। इस मामले को दलगत राजनीति से दूर रख कर ही चर्चा की जाए।
इधर सदन में जैसे ही धारीवाल ने भंवर की हत्या की जानकारी दी तो हड़कंप मच गया। कांग्रेस के अन्य विधायक रघु शर्मा, प्रताप सिंह खाचरियावास, तत्कालीन संसदीय सचिव गिर्राज सिंह मलिंगा व अन्य MLA ने उनके व उनके परिजनों के लिए सवाल उठाने स्टार्ट कर दिए थे। इस बीच केस की इन्वेस्टिगेशन पुलिस से SOG को सौंप दी गई थी।






