*विश्व शौचालय दिवस 19 नवंबर को मनाया जाता है.आमजन को शौचालय के प्रयोग के प्रति जागरूक करना इसका उद्देश्य है.संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2013 में विश्व शौचालय दिवस की घोषणा की गई मानव जीवन में स्वास्थ्य ही सब कुछ है. वर्ल्ड टॉयलेट डे का उद्देश्य मानव को खुले में शौच करने से होने वाली बीमारियों के तंत्र से बचाने के लिए जागरूक करना है. खुले में शौच करने से पर्यावरण प्रदूषण तो होता ही है और वातावरण में कई बीमारियां भी पनपती है।डब्ल्यूएचओ के रिसर्च के अनुसार आज भी कई लोग टॉयलेट से वंचित हैं और खुले में शौच करने को मजबूर हैं।कई लोग शौचालय होने के बावजूद भी खुले में शौच करने के आदि हैं।विश्व शौचालय दिवस का उद्देश्य खुले में शौच करने से महिलाओं के शोषण को रोकना भी है।वर्ल्ड टॉयलेट डे की शुरुआत सबसे पहले सिंगापुर में 19 नवंबर 2001 को हुई।
*शौचालय के उपयोग से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें*
शौचालय के महत्व को इग्नोर नहीं किया जा सकता.शौचालय और स्वच्छता का सीधा संबंध है.
आजकल वेस्टर्न टॉयलेट का चलन काफी बढ़ गया है.कुछ रिसर्च से सामने आया है इससे संक्रमण का खतरा अधिक रहता है
ध्यान रहे वेस्टर्न टॉयलेट उपयोग करने से पहले उसे फ़्लश जरूर कर ले और टॉयलेट पेपर से सीट को साफ करना ना भूलें बाथरूम के कमोड सीट को टाइम से सफाई करते रहे.उपयोग के बाद अच्छे साबुन से हाथ धोना ना भूलें
इंडियन टॉयलेट उपयोग से संक्रमण का खतरा कम रहता है.इंडियन टॉयलेट के फ्लोर और सीट को नियमित अच्छे से साफ करें और उपयोग के बाद में हाथों को किसी अच्छे साबुन से धोना ना भूलें.
शौचालय की समय-समय पर सफाई करने से कई बीमारियों और संक्रमण से बचा सकता है।






