उदयपुर जिले के मावली कस्बे में रहने वाली 108 साल की बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। उन्होंने अपने परिवार की 3 पीढ़ियों का सुख मिला, जिसमें 8 पड़पौते और 22 पड़पौतियां हैं। इस उम्र में भी वे परिवार के सदस्यों के बीच पुराने परम्परागत गीतों को गुनगुनाती थी। जिसे पूरा परिवार बैठकर सुनता था। 106 साल की उम्र तक तो अपना खाना भी खुद बनाती थी।
झमकू देवी (108) उदयपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर मावली कस्बे के गायरियावास की रहने वाली थी। उनका शुक्रवार सुबह 11 बजे निधन हो गया था। उनके पति स्व. मगनीराम पंचोली रेलवे डिपार्टमेंट में थे और मावली रेलवे स्टेशन पर पॉइंट्स मैन पर लगे थे। 70 साल की उम्र में उनकी 23 अक्टूबर 1992 की मौत हुई थी।
नियमित दिनचर्या करती थी फॉलो झमकू बाई के 3 बेटे और 5 बेटियां हैं। उनके 6 पोते, 1 पोती, 8 दोहिते और 7 दोहिती हैं। वे बताते है कि उनकी तीसरी और चौथी पीढ़ी में कुल 8 पड़पोते और 22 पड़पोतियां हैं। उनके बेटे यमुना शंकर पंचोली (टीचर) ने बताया- इस उम्र में भी मां बहुत मेहनत करती थी। सुबह जल्दी उठना, खाना खाकर दोपहर में आराम करना, रात में भी जल्दी खाना खाकर सो जाना।
हर दिन मंदिर जाकर करती थी पूजा नियमित मंदिर जाकर पूजा भी करती थी। वे पहले खेतों में भी काम करती थी। उनका एक रूटीन था। 106 साल तक तो अपने सारे काम खुद करती थी। अपना खाना भी खुद बनाती थी। कोविड के समय भी सभी वैक्सीन लगवा रहे थे लेकिन उन्होंने नहीं लगवाया था। बीपी-शुगर भी नहीं था। वे पूर्ण स्वस्थ थी। 2023 के विधानसभा चनुाव में मां ने होम वोटिंग सुविधा के जरिए अपना वोट किया था।
भजन और लोकगीतों में थी रुचि वे पूरे परिवार के साथ पुराने परम्परागत गीतों को गुनगुनाती थी। सब संग बैठकर आनंद लेते थे। भजन और लोकगीतों में उनकी अच्छी रुचि थी, जिसे वह याद कर लेती थी। उनका पीहर राजसमंद जिले के कुरज में है और उनके दो भाई और चार बहिने थी। झमकू बाई तीसरे नंबर की थी। छह भाई बहनों में से सिर्फ झमकू बाई ही जीवित थी।





