गहलोत राज की एक और योजना को भजनलाल सरकार ने बंद कर दिया है। गहलोत सरकार में साल 2022 में शुरू की गई मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना (सीएमएडी) को 1 अप्रैल 2025 से बंद कर दिया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग ने योजना को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस योजना का 100 करोड़ का बजट था। भजनलाल सरकार अब इसकी जगह नई योजना लाने की तैयारी कर रही है। अगले बजट में नई योजना की घोषणा के आसार हैं।
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत ग्रामीण सड़कें, सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे पुल से लेकर वे काम करवाए जा सकते थे, जो मौजूदा योजनाओं में कवर नहीं होते थे। पिछड़े और दूरदराज के जिलों में विकास के कामों की प्राथमिकता थी। इस योजना में हर जिले में 2.77 करोड़ के काम हर साल करवाने का प्रावधान था। संभाग मुख्यालय वाले जिले में 4 करोड़ के काम करवाए जा सकते थे।
इस योजना में कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी जिले के कामों की सिफारिश भेजती थी। योजना के तहत जिलों से आई कामों की सिफारिशों को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी स्क्रूटनी करती थी। इस कमेटी की मंजूरी के बाद बजट जारी होता था।
गहलोत सरकार ने चार योजनाओं को बंद करके शुरू की थी स्कीम गहलोत सरकार ने 2022 में चार योजनाओं को बंद करके मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना शुरू की थी। इनमें तीन योजनाएं बीजेपी राज की और एक कांग्रेस सरकार की थी। वसुंधरा सरकार की श्री योजना, मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना और स्मार्ट विलेज योजना बंद की थी। इसके अलावा चौथी योजना महात्मा गांधी आदर्श ग्राम योजना थी।
2024 में अब मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना को बंद कर नई लाने की तैयारी ग्रामीण विकास की कई स्कीम्स के साथ लगातार बंद और चालू करने का सियासी प्रयोग जारी है। पहले वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने 2014-15 में श्री योजना और मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना शुरू की। 2017-18 में स्मार्ट विलेज योजना शुरू की। गहलोत सरकार ने 2019 में महात्मा गांधी आदर्श ग्राम योजना शुरू की। गहलोत सरकार ने 2022 में इन चारों स्कीम को बंद करके इनकी जगह नई योजना लाने का फैसला किया था। नई योजना दो साल भी ढंग से नहीं चली कि अब बीजेपी सरकार ने इसे बंद कर दिया था। अब नई स्कीम लाने की तैयारी है।
तीन योजनाओं को एक में मर्ज किया था भजनलाल सरकार ने इंदिरा महिला शक्ति उड़ान योजना, इंदिरा महिला शक्ति जागरूकता शिक्षा कार्यक्रम और इंदिरा महिला एवं बाल विकास शोध संस्थान योजना को मर्ज कर एक योजना बना दी थी। अब इसे कालीबाई भील संबल योजना के नाम से जाना जाता है।






