राजस्थान में रोड इंजीनियरिंग की सैकड़ों खामियों और ब्लैक स्पाट ठीक नहीं किए जाने का नतीजा है कि हर साल रोड एक्सीडेंट बढ़ते जा रहे हैं। प्रदेश में रोड एक्सीडेंट से मौतें किसी महामारी से भी ज्यादा हैं। 2014 से अब तक प्रदेश में 1 लाख 11 हजार से ज्यादा लोग सडक दुर्घटना में जान गंवा चुके हैं। 2024 का साल जाने के अंतिम दिनों में शुक्रवार को हुए प्रदेश के सबसे बड़े रोड एक्सीडेंट और अग्निकांड ने प्रदेश को दहला दिया। 2 साल में प्रदेश में रोड एक्सीडेंट में मरने वालों की संख्या सालाना 2 हजार बढ़ चुकी है। इस तरफ तमाम प्रयासों के दावों के बावजूद हादसे रुक नहीं रहे। निर्दोष लोग जान गंवा रहे।
रोज होती हैं 33 मौतें
प्रदेश में 2023 के रोड हादसे देखे तो पूरे देश में शीर्ष पर हैं। पिछले साल प्रदेश में 24,705 सड़क हादसे हुए। 11,762 लोगों की मौत हुई। प्रतिदिन 68 सड़क हादसों में 33 लोगों की जा जा रही है। सरकार की ओर से हर साल सड़क सुरक्षा पर 41 से 45 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं। केंद्रीय सड़क सुरक्षा एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक्सीडेंट की मौतों में 2025 में 50 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य दिया है।
प्रतिवर्ष एक हजार हादसे बढ़ रहे
राजस्थान में 2022 में 23,615 और 2023 में 24,707 रोड एक्सीडेंट हुए।
रोड पर 584 में से 546 ब्लैक स्पॉट आज भी मौजूद
पीडब्लूडी की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में 584 ब्लैक स्पॉट थे। 2022 से अब तक प्रदेश में 546 ब्लैक स्पॉट मौजूद हैं। इन पर ही सबसे अधिक मौतें होती हैं। इनमें से 382 नेशनल हाईवे पर, 118 स्टेट हाईवे पर व 46 छोटी सड़कों पर ब्लैक स्पॉट बने हैं।





