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वसुंधरा के करीबियों को मिल सकता है मंत्रिमंडल में मौका:कृपलानी-बियानी रेस में, राठौड़ को नई जिम्मेदारी की तैयारी, राजनीतिक नियुक्तियों में भी फेरबदल संभव

भजनलाल सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार नए साल पर खत्म हो सकता है। खाली पड़े 6 मंत्री पदों को जल्द भरने की तैयारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के हाल ही में दिल्ली दौरे के बाद से इसकी हलचल तेज है। इसके अलावा राजनीतिक नियुक्तियों और पार्टी संगठन में बदलाव कर कई नेताओं को एडजस्ट किया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सक्रियता को देखते हुए उनके करीबी नेताओं को भी कहीं न कहीं जगह मिल सकती है। सीनियर नेता राजेंद्र राठौड़ को क्या जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व में अंदरखाने तेजी से काम चल रहा है। जनवरी से ही रिजल्ट देखने को मिल जाएंगे।

मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- नए साल पर बीजेपी में नियुक्तियों, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर क्या तैयारियां चल रही हैं?

तीन स्टेप पर होंगे बदलाव, इसलिए देरी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पहले कहा जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद और उप चुनाव से पहले भजनलाल सरकार में नए चेहरे शामिल हो जाएंगे। उपचुनाव के बाद अब विधानसभा सत्र भी शुरू होने वाला है। फिर भी मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार जारी है।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, सत्ता-संगठन ने मिलकर एक रणनीति तैयार की है। सभी तरह के बदलाव 3 स्टेप में होंगे। सबसे पहला फेरबदल संगठन में होगा। संगठन में कुछ विधायकों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके बाद राजनीतिक नियुक्ति के तहत आयोग-बोर्ड-निगम में नेताओं के मनोनयन में कुछ नेताओं को मौका दिया जाएगा। तीसरे नंबर पर मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री बीते दिनों कई बार दिल्ली जाकर आलाकमान से मुलाकात कर चुके हैं। यही कारण है कि आगामी बदलावों की पूरी चर्चा है।
मुख्यमंत्री बीते दिनों कई बार दिल्ली जाकर आलाकमान से मुलाकात कर चुके हैं। यही कारण है कि आगामी बदलावों की पूरी चर्चा है।

संगठन की बात करें तो मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी की बनाई टीम के साथ ही काम कर रहे हैं। सीपी जोशी ने प्रदेशाध्यक्ष रहने के दौरान दो बार टीम में बदलाव किए थे। जुलाई 2024 के आखिरी में मदन राठौड़ को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। तब से उन्होंने कोई बदलाव नहीं किया है। अब वे अपनी टीम में जल्दी ही बदलाव करेंगे।

इसके बाद राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए कुछ विधायकों को संतुष्ट किया जाएगा। भाजपा सूत्रों के अनुसार, बोर्ड-निगमों में भी नियुक्तियों को लेकर अंतिम सूची लगभग तैयार हो चुकी है। विधानसभा सत्र के दौरान जनवरी-फरवरी में ही आयोग-बोर्ड-निगमों में मनोनयन शुरू कर दिए जाएंगे।

इस कारण मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हो रही है। आगामी विधानसभा सत्र के दौरान आलाकमान राजस्थान के मंत्रिमंडल विस्तार पर काम शुरू कर देगा और इसके परिणाम भी मई तक आ जाएंगे।

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पीएम मोदी से दिल्ली में मुलाकात की थी।
हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पीएम मोदी से दिल्ली में मुलाकात की थी।

हटाने से ज्यादा, अनुभवी चेहरों को शामिल करने पर फोकस भाजपा सूत्रों की मानें तो आलाकमान का मंत्रिमंडल विस्तार में पुराने चेहरों को हटाने पर ज्यादा फोकस नहीं रहेगा, बल्कि कुछ नए अनुभवी चेहरों को मौका देने के प्रयास किए जाएंगे। ऐसे में वसुंधरा राजे समर्थक विधायकों में आस जगी हुई है।

पिछले मंत्रिमंडल में एक-दो चेहरों को छोड़ राजे समर्थकों को लगभग नजर अंदाज कर दिया गया था। कई सीनियर विधायक मंत्रिमंडल में शामिल होने की आस लगाए बैठे थे। फिर भी उन्हें मौका नहीं मिला। अब वसुंधरा राजे की सक्रियता को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि भजनलाल शर्मा की टीम के कुछ मंत्रियों की परफॉर्मेंस के आकलन के आधार पर उनकी जिम्मेदारियों को घटाया-बढ़ाया जाएगा। पिछले कई मौकों पर खासकर विधानसभा में देखा गया है कि अनुभव की कमी के कारण कई मंत्री-राज्यमंत्री विपक्ष के आगे घिरते नजर आए थे।

पिछली बार बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा सहित कांग्रेस के अनुभवी नेताओं ने अपने सवालों के जरिए मंत्रियों को जमकर घेरा। इसके अलावा डिप्टी सीएम स्तर के मंत्रियों सहित अन्य में भी अपने बयानों और काम करने के तरीकों में भी अनुभव की कमी देखने को मिली थी।

आलाकमान तक सभी सूचनाएं पहुंच रही हैं। अब कुछ अनुभवी चेहरों को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। इसी से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि राजे समर्थकों में गिने जाने वाले जयदीप बियानी, श्रीचंदकृपलानी, पुष्पेंद्र सिंह बाली, आदूराम मेघवाल, हंसराज मीणा, रामविलास मीणा, गोवर्धन वर्मा को तोहफा मिल सकता है। राजे सरकार में दो बार मंत्री रह चुकी अनिता भदेल भी दौड़ में शामिल हैं।

राजस्थान मंत्रिपरिषद में अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 24 मंत्री हैं। इस लिहाज से अभी 6 पद खाली हैं। कैबिनेट में सबसे अनुभवी माने जाने वाले डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के इस्तीफे पर निर्णय अब तक नहीं हुआ है।

राठौड़ को मौका, 7 बड़े बोर्ड पर भी वरिष्ठ नेताओं की नजर पिछले विधानसभा चुनाव और भजनलाल सरकार बनने के बाद सबसे ज्यादा नजरें यदि किसी नेता पर टिकी हुई हैं, तो वे हैं राजेंद्र राठौड़। चुनाव हारने के बाद कई राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहे राठौड़ लगातार सक्रिय हैं और सत्ता-संगठन के साथ तालमेल बनाकर काम कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पिछले विधानसभा सत्र से लेकर सत्ता या संगठन के कामों में अब तक उनकी राय ली जा रही है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की पिछली गहलोत सरकार ने जिस तरह से अपने सीनियर नेता डॉ. चंद्रभान को 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन एवं समन्वय समिति के उपाध्यक्ष, रामेश्वर डूडी को राजस्थान स्टेट एग्रो इण्डस्ट्रीज डेवलपमेंट बोर्ड का अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बृजकिशोर शर्मा को राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का अध्यक्ष बना कर, तीनों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था। ठीक उसी तरह राजेंद्र राठौड़ को भी राजनीतिक नियुक्ति देकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। हालांकि पार्टी के बड़े नेता होने के कारण राठौड़ को लेकर कोई भी निर्णय भाजपा अलाकमान की मंजूरी पर निर्भर करता है।

राजस्थान के 7 बड़े बोर्ड-आयोग में पद खाली राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी), राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, राज्य महिला आयोग, यूथ बोर्ड, राज्य खेल परिषद, खादी बोर्ड और राजस्थान राज्य बीज निगम सबसे पावरफुल माने जाते हैं। सातों निगमों-बोर्ड में पदों पर दिग्गज नेताओं को मौका दिया जा सकता है।

हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी सरकार ने किसान आयोग का अध्यक्ष सीआर चौधरी, जीव जंतु कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष पूर्व सांसद जसवंत सिंह, देवनारायण बोर्ड में ओमप्रकाश भडाना, राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड में पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर, माटी कला बोर्ड में प्रहलाद टांक, राज्य एससी वित्त निगम में राजेंद्र नायक, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड में रामगोपाल सुथार को अध्यक्ष बनाया था। इसके अलावा कई बोर्ड-निगम-आयोग के पद खाली पड़े हुए हैं।

पार्टी में किसे मिलेगा बड़ा पद? : मिर्धा-दाधीच पर नजरें सूत्रों के अनुसार, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की टीम में जनवरी से बदलाव होने शुरू हो जाएंगे। प्रदेश कार्यकारिणी से कुछ नेता हटेंगे और नए चेहरे सामने आ सकते हैं। कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होकर चुनाव लड़ीं व इन उपचुनाव में खींवसर सीट पर बीजेपी की जीत में भूमिका निभाने वाली ज्योति मिर्धा और संगठन में लम्बा अनुभव रखने वाले व सीएम भजनलाल के करीबी नेता मुकेश दाधीच के नाम आगे चल रहे हैं। इन नेताओं को प्रदेश महामंत्री जैसे पद दिए जा सकते हैं। अभी ज्योति मिर्धा बीजेपी में प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर हैं।

मौजूदा टीम में शामिल दो प्रदेश उपाध्यक्ष चुन्नीलाल गरासिया राज्यसभा सांसद और सीआर चौधरी किसान आयोग के अध्यक्ष बन गए हैं। इसी तरह, प्रदेश महामंत्रियों में दामोदर अग्रवाल भीलवाड़ा से सांसद बन गए हैं और ओमप्रकाश भड़ाना को देवनारायण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया जा चुका है। इन सभी नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है। प्रदेश उपाध्यक्ष मोतीलाल मीणा व नाहर सिंह जोधा को बदला जा सकता है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि संगठन में बड़े स्तर पर कोई बदलाव नहीं होने वाला। राठौड़ नई टीम को जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए नजर आएंगे। मौजूदा समय में बीजेपी ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग पर फोकस कर सकती है। विशेषकर राठौड़ की नई टीम में आदिवासी, जाट, गुर्जर समुदाय से नए चेहरे जरूर शामिल होंगे।

अधिकतर नेताओं की संगठन के पदों से छुट्टी होना तय राजस्थान बीजेपी में 13 प्रदेश मंत्रियों में से भी अधिकतर नेताओं की संगठन के पदों से छुट्टी होना तय है। वैसे भी प्रदेश कार्यकारिणी में अधिकतम 5 से 6 प्रदेश मंत्री ही बनाए जाते हैं। प्रदेश बीजेपी की टीम में वर्तमान में 10 उपाध्यक्ष, 05 महामंत्री, 13 प्रदेश मंत्री, एक कोषाध्यक्ष और सह कोषाध्यक्ष हैं।

बीजेपी में संगठनात्मक दृष्टि से 44 जिले और 7 मोर्चे हैं। प्रदेश की टीम के गठन के बाद इन जिलों में जिलाध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। वहीं मोर्चा अध्यक्षों की भी नियुक्ति नए सिरे से होगी।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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