Home » राजस्थान » रणकपुर महोत्सव में रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया सूर्यमंदिर, VIDEO:अरावली की पहाड़ियों में गूंजा ‘स्वराग’; मोबाइल की टॉर्च जलाकर झूमे दर्शक

रणकपुर महोत्सव में रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया सूर्यमंदिर, VIDEO:अरावली की पहाड़ियों में गूंजा ‘स्वराग’; मोबाइल की टॉर्च जलाकर झूमे दर्शक

पाली जिले के रणकपुर में सूर्य मंदिर परिसर में रणकपुर जवाई महोत्सव चल रहा है। शनिवार से शुरू हुए इस आयोजन का रविवार को दूसरा दिन था। रविवार रात स्टार नाइट का आयोजन किया गया। इसमें सूर्य मंदिर के मुक्ताकाश मंच पर स्वराग बैंड ने प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। दर्शकों ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया।

रंग-बिरंगी रोशनी के बीच अरावली की पहाड़ियों में देर रात तक मधुर स्वर गूंजे। कलाकारों ने समां बांध दिया। बैंड ने राजस्थानी लोकगीत, गजल और सूफी संगीत पेश किया। राजस्थान का स्वराग बैंड इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन बैंड है जो देश-विदेश में राजस्थानी संगीन को पेश कर रहा है।

स्वराग बैंड ने राजस्थानी स्वागत गीत 'केसरिया बालम पधारो म्हारे देश' की धुन पर कार्यक्रम की शुरुआत की।
स्वराग बैंड ने राजस्थानी स्वागत गीत ‘केसरिया बालम पधारो म्हारे देश’ की धुन पर कार्यक्रम की शुरुआत की।

सूर्य मंदिर मंच पर हुआ आयोजन

स्टार नाइट कार्यक्रम की शुरुआत सूर्य मंदिर मंच पर शाम 7.30 बजे हुई। बैंड ने राजस्थानी स्वागत गीत ‘केसरिया बालम पधारो म्हारे देश’ की धुन पेश की। इसके बाद सूफी संगीत की प्रस्तुति दी।

कलाकरों ने ‘सानू एक पल चैन नहीं आवे’, ‘उड़जा काले कौआ’, ‘म्हारो हेलो सुनोजी रामा पीर’, ‘तेरे नाम से जी लूं’ जैसे गीत पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके बाद ‘वंदे मातरम’, ‘मां तुझे सलाम’ और ‘मितवा धड़कने जैसे गीत पेश कर समां बांध दिया।

शनिवार को रणकपुर जैन मंदिर पेढ़ी द्वारा मंदिर को 1101 दीपक की रोशनी से सजाया गया।
शनिवार को रणकपुर जैन मंदिर पेढ़ी द्वारा मंदिर को 1101 दीपक की रोशनी से सजाया गया।
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने मोबाइल टॉर्च जलाकर स्टार नाइट प्रोग्राम को सपोर्ट किया।
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने मोबाइल टॉर्च जलाकर स्टार नाइट प्रोग्राम को सपोर्ट किया।

2014 में गोडवाड़ महोत्सव, अब रणकपुर महोत्सव बना पहचान

स्थापत्य शिल्प कला की विश्व-विख्यात धरोहर रणकपुर (पाली) जैन मंदिर और सूर्य मंदिर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में गोडवाड़ महोत्सव की शुरुआत हुई थी। यह अब रणकपुर महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

वर्तमान में पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन, उपखंड प्रशासन, और पालिका प्रशासन के प्रयासों से यह महोत्सव अपने चरम पर है।

इस आयोजन में सबसे खूबसूरत पारंपरिक वेशभूषा के लिए आरती चौहान को मिस गोडवाड़ और प्रकाश कुमावत टेवाली को गोडवाड़श्री का खिताब दिया गया। वहीं मूंछ प्रतियोगिता में कैलाश सोलंकी प्रथम स्थान पर रहे।
इस आयोजन में सबसे खूबसूरत पारंपरिक वेशभूषा के लिए आरती चौहान को मिस गोडवाड़ और प्रकाश कुमावत टेवाली को गोडवाड़श्री का खिताब दिया गया। वहीं मूंछ प्रतियोगिता में कैलाश सोलंकी प्रथम स्थान पर रहे।

रोमांचक प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन

स्टार नाइट से पहले रविवार को दिन में प्रतिभागियों ने प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रस्सा-कस्सी प्रतियोगिता में टीम A और टीम B के बीच रोमांचक मुकाबला हुआ, जिसमें टीम A विजेता बनी। मूंछ प्रतियोगिता में जोधपुर के कैलाश सोलंकी ने प्रथम स्थान हासिल किया।

जबकि मेलावास के रामसिंह राजपुरोहित दूसरे स्थान पर रहे। जोधपुर के ही हिमांशु गुर्जर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

साफा बांध प्रतियोगिता में दिकेन्द्र सिंह सिसोदिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि तेजवंत सिंह चौहान दूसरे स्थान पर रहे। तीसरा स्थान संयुक्त रूप से गणपत दास, विक्रमसिंह भैसाणा, पीयूष सेन और श्रवण कुमार ने हासिल किया।

साफा बांध प्रतियोगिता में साफा बांधते हुए प्रतिभागी।
साफा बांध प्रतियोगिता में साफा बांधते हुए प्रतिभागी।

चम्मच दौड़ प्रतियोगिता में लड़कों के वर्ग में ललित माली ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि द्वितीय स्थान आदित्य सिंह और राहुल माली ने साझा किया। तृतीय स्थान पर आरव राजपुरोहित रहे। लड़कियों के वर्ग में हर्षिता ने पहला स्थान हासिल किया, पूजा शेखावत और दिव्यांशी देवड़ा ने संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि अविशा तीसरे स्थान पर रहीं।

समारोह में ये गेस्ट रहे मौजूद

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, संसदीय मंत्री जोगाराम पटेल, बाली विधायक पुष्पेन्द्र सिंह राणावत, संभागीय आयुक्त प्रतिभा सिंह, कलक्टर लक्ष्मीनारायण मंत्री, पुलिस अधीक्षक चुनाराम जाट, एडीएम शैलेन्द्र सिंह बाली सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

 

ड्रोन वीडियो: आशीष परमार

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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