जयपुर में टेंट कारोबारी और इवेंट कंपनी से जुड़े व्यापारियों के यहां हुई इनकम टैक्स की छापेमारी रविवार रात खत्म हो गई। आयकर अधिकारियों को सर्च के दौरान 9.65 करोड़ रुपए कैश मिले हैं। साथ ही 12.61 किलो सोने-चांदी के गहने भी जब्त किए गए हैं। इनकी कीमत कुल 10.25 करोड़ रुपए है।
आयकर की टीम ने जयपुर में तालुका टेंट हाउस, जय ओबराय कैटर्स, मेपसोर, भावना चारण, आनंद खंडेलवाल के कई ठिकानों पर सर्च किया। इसमें रिसोट्र्स, होटल संचालकों, वेडिंग प्लानर, इवेंट मैनेजमेंट कंपनी, कैटरर्स, फ्लोरिस्ट की मिली भगत सामने आई है।
आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि लग्जरी शादियों और डेस्टिनेशन वेडिंग में विभिन्न सेवा देने वाली ये सभी कंपनियां जीएसटी नहीं भर रही थीं। आयकर चोरी में पूरी तरह लिप्त हैं। इसी के कारण गुरुवार सुबह 7:30 बजे टेंट हाउस, इवेंट कंपनियों, कैटरिंग, डेकोरेशन से जुड़े व्यापारियों के 22 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सभी जगह टैक्स चोरी के सबूत मिले हैं।
रविवार को 16 ठिकानों पर आयकर की छापेमारी पूरी हो गई। आयकर विभाग के अधिकारी रविवार देर रात तक तालुका टेंट हाउस समूह के संचालक राजकुमार तालुका के दो ठिकानों, मेपसोर एक्सपेरिएंटल वेडिंग के मुकेश शर्मा, अखिलेश शर्मा, प्रितेश शर्मा के दो ठिकानों और इंडियन वेडिंग प्लानर के आनंद खंडेलवाल के दो ठिकानों पर डटे रहे।

क्रिप्टो करेंसी का खाता भी मिला सूत्रों के अनुसार, आयकर अधिकारियों को छापेमारी में एक क्रिप्टो करेंसी खाता भी मिला है। इससे संबंधित करदाता ने क्रिप्टोकरेंसी खाते का पासवर्ड देने से इनकार कर दिया। इस पर अधिकारियों ने खाते का संचालन करने वाली एजेंसी को यह खाता फ्रीज करने के आदेश दिए हैं। राजस्थान में हुई आयकर छापेमारी की कार्रवाई में यह पहला मौका है, जब किसी करदाता के यहां अधिकारियों ने क्रिप्टोकरेंसी खाता पकड़ने में सफलता मिली है।
कैश और गहने मिले आयकर छापेमारी में 9.65 करोड़ रुपए कैश जब्त किया गया है। इसी तरह विभागीय अधिकारियों ने अब तक 12.61 किलो के गहने जब्त किए हैं। इनका कीमत 10.25 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
सभी आपस में मिले हुए, ग्राहकों से मनमाने दाम वसूल रहे आयकर छापेमारी की इस कार्रवाई में वेडिंग मैनेजर, इवेंट मैनेज करने वाली कंपनियों, रिसोट्र्स, होटल संचालकों, कैटरिंग सेवा देने वाले, फ्लोरिस्ट और अन्य सेवाएं देने वालों के बीच गुप्त समझौतों का भी खुलासा किया है। यह सभी आपस में मिलकर एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। ग्राहकों से भी मनमाने दामों की वसूली कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, ये लोग सेवाओं का मूल्यांकन कम दिखाकर सरकार को जीएसटी व आयकर की चपत भी लगा रहे थे। कई मामलों में तो बिलिंग राशि तय राशि से केवल 25 फीसदी तक ही दिखाई जाती है। शेष राशि का भुगतान नकद में कर लिया जाता। नकद राशि को बैंकिंग चैनल से खपाने और निकलवाने के लिए फर्जी खातों का भी उपयोग किया जाता रहा।





