‘मैं हर रात कहानी सुनाने के लिए तुम्हारे पास नहीं हूं। लोरी भी नहीं सुना सकूंगा। मैं वहां नहीं हूं तुम्हारे साथ पिलो फाइट के लिए। एक टब में साथ नहाने और मस्ती करने के लिए। मैं वहां नहीं हूं तुम्हारे साथ बाइक राइडिंग के लिए, कैंडी दिलाने के लिए। हर रात जब मैं लेटता हूं, तो कल्पना करता हूं कि तुमने मुझे कसकर पकड़ रखा है और मैंने तुम्हें।’
ये लाइनें बेंगलुरु के रहने वाले सैयद अहमद मखदूम ने 3 साल के बेटे के लिए लिखी थीं। पत्नी ने दहेज प्रताड़ना का केस लगाया और बेटे को लेकर मायके चली गई। मखदूम ने बेटे की कस्टडी मांगी, तो उससे सेक्शुअल रिलेशनशिप का आरोप लगा दिया। 19 दिसंबर, 2008 को मखदूम ने बेटे के लिए कुछ लाइनें लिखीं और खुदकुशी कर ली।
ऐसी ही कहानी दिल्ली के अरविंद की है। पत्नी ने घर में न्यूड कर बंधक बनाया। रेप, घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के केस लगाए। अरविंद ने भी एक दिन जान दे दी। अब बुजुर्ग मां और भाई उसका केस लड़ रहे हैं।
मखदूम और अरविंद, किरदार भले अलग हैं, लेकिन उनकी कहानी एक है। बेंगलुरु के AI इंजीनियर अतुल सुभाष सुसाइड केस ने दोनों के परिवारों को बेटे का दर्द याद दिला दिया। परिवार वालों का गुस्सा उनकी पत्नी से ज्यादा सिस्टम पर है, जिसने पीड़ित पक्ष की आवाज ही नहीं सुनी।
पहली कहानी मखदूम की… पत्नी ने 3 शादियों की बात छिपाई, घरेलू हिंसा का केस किया मखदूम के परिवार में उनकी बड़ी बहन आस्ना नौशीन ही हैं। हम उनसे मिलने नोएडा पहुंचे। वे बताती हैं, ‘मखदूम कनाडा में मिनिस्ट्री ऑफ चाइल्ड एंड वुमन वेलफेयर में काम करता था। वो 11 साल कनाडा में रहा, लेकिन शादी हिंदुस्तानी लड़की से करना चाहता था। उसने मेट्रोमोनियल वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाया। वहीं उसकी मुलाकात सबा (बदला हुआ नाम) से हुई।’
‘सबा ने प्रोफाइल में पहली शादी टूटने की बात लिखी थी। मखदूम को इससे फर्क नहीं पड़ा। वो लड़की से मिलने के लिए बेंगलुरु चला गया। हम भी दिल्ली से वहां पहुंच गए। मखदूम ने तय किया कि बिना किसी शोरशराबे के मस्जिद में निकाह पढ़ा जाए। हम सब भी राजी थे। 2004 में दोनों का निकाह हो गया।‘
आस्ना आगे कहती हैं, ‘शादी के बाद मखदूम ने भारत में रहने का फैसला लिया। उसने यहीं जॉब शुरू कर दी। शादी के कुछ दिन बाद सबा ने अपने पिछले रिश्तों के बारे में बताया कि मखदूम उसका दूसरा नहीं, चौथा शौहर है।’
‘मखदूम ने हमें इस बारे में कुछ नहीं बताया। फिर सबा प्रेग्नेंट हो गई। बच्चा होने के बाद मखदूम फैमिली में ऐसा इन्वॉल्व हुआ कि सब भूल गया। हमें सबा की तीन शादियों की बात तब पता चली, जब तलाक की नौबत आ गई।’
बच्चे के ऊपर पैसे खर्च करने पर भी ससुराल वाले ताने देते आस्ना आगे कहती हैं, ‘सबा का मायका घर से कुछ ही दूर था। उनका मखदूम की जिंदगी में बहुत दखल था। बच्चा कैसे पालें, घर कैसे चलाएं, हर छोटी-छोटी बात में वो मखदूम को टोकते थे। मखदूर बेटे के लिए रोज खिलौने या कपड़े लाता। इसके बावजूद ससुराल वालों के ताने सुनने पड़ते।’
‘झगड़े बढ़ने लगे तब मखदूम ने मुझे बताया। मैं बेंगलुरु में उसके घर जाती और दोनों को समझाती थी। मैं दिल्ली लौटती, वैसे ही सबा के घरवालों का दखल बढ़ने लगता। फिर झगड़े शुरू हो जाते।’
अचानक बच्चे को ले गई सबा, पुलिस आई तब पता चला आस्ना बताती हैं, ‘2008 में एक दिन अचानक सबा बच्चे को लेकर गायब हो गई। किसी को कुछ नहीं बताया। हम खबर लगते ही बेंगलुरु पहुंचे। अगले दिन मखदूम के घर पुलिस आ गई। सबा ने उस पर घरेलू हिंसा का केस किया था।’
’15 साल पहले घरेलू हिंसा के केस में लड़के या उसके परिवार की सुनवाई नहीं होती थी। मेरे ही सामने पुलिस मखदूम को गिरफ्तार करके ले गई। मैं फौरन उसके पीछे थाने पहुंची। मखदूम कांप रहा था, वो पसीना-पसीना हो रहा था। मैंने पुलिस वालों से उसे अस्पताल ले जाने की गुजारिश की। वो बड़ी मुश्किल से राजी हुए।’
‘अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने उसे एडमिट कर लिया। उसका शुगर 400 पार जा चुका था। ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया था। नर्वस ब्रेकडाउन हो गया था। डॉक्टर ने मेडिकल कंडीशन देखते हुए उसे एडमिट रखा। उस वक्त अरेस्ट टल गया।‘
आस्ना आगे कहती हैं, ‘घरेलू हिंसा के साथ सबा ने ये भी आरोप लगाया कि वो ससुर की प्रॉपर्टी में हिस्सा चाहता है। मखदूम ने भी पत्नी पर कई आरोप लगाए थे। पिछली 3 शादियों की बात छिपाने पर धोखाधड़ी का केस किया था। बच्चे की परवरिश ठीक से न करने का भी आरोप लगाया।’
बेटे से दूरी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था मखदूम मखदूम ने बेटे की कस्टडी मांगी, तब उसने आरोप लगाया कि मखदूम बच्चा इसलिए चाहता है, ताकि वो उससे सेक्शुअल रिलेशन बना सके।
‘मखदूम बच्चे से दूरी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसने सुसाइड करने से पहले दो लेटर लिखे थे। पहले लेटर में बच्चे के लिए अंग्रेजी में एक कविता लिखी थी। दूसरे खत में उसने अपने लिए इंसाफ मांगा था।’
आस्ना खत दिखाते हुए कहती हैं, ‘ये जो अल्फाज मिटे से दिख रहे हैं, ऐसा लगता है कि जैसे लिखते वक्त उसकी आंखों से आंसू टपके होंगे।’
चलते-चलते मखदूम की बहन ने हमसे कहा, ‘हिम्मत हारकर मैं बैठूं मेरी फितरत ये नहीं। बनके समंदर की आईंदा लहर और पुरजोर मैं आऊंगा। शायद मेरा भाई अतुल सुभाष की मौत के बहाने फिर आया है। समाज को झंझोड़ने, सबको जगाने के लिए।’
दूसरी कहानी अरविंद की… पहले रेप का आरोप, फिर घरेलू हिंसा में केस किया अरविंद की कहानी जानने हम दिल्ली में उनके परिवार से मिले। भाई नितिन 2008 की बात याद करते हुए कहते हैं, ‘अरविंद उस वक्त महज 26 साल का था। एक दोस्त के घर ऋचा से मिला। दोनों रिलेशन में थे। पूजा के बहाने ऋचा उसे हरिद्वार ले गई। दोनों वहीं रात में रुके और फोटो खिंचवाई। इसमें एक फोटो में अरविंद उसकी मांग भरते दिख रहा था।’
‘अगले दिन लड़की ने लौटकर अरविंद के खिलाफ केस कर दिया। उसने रेप का आरोप लगाया। पुलिस ने अरविंद से पूछताछ की और उसे जेल में डाल दिया। इसके बाद ऋचा ने अरविंद को धमकाया। उसने कहा कि अगर मुझसे शादी नहीं की, तो तुम और तुम्हारा पूरा परिवार जेल जाएगा। तुम्हारी प्रेग्नेंट बहन भी जेल में ही बच्चे को जन्म देगी।’
नितिन आगे बताते हैं, ‘अरविंद डर गया और उसने आर्य समाज मंदिर में ऋचा से शादी कर ली। दोनों परिवार को बताए बिना साथ रहने लगे। शादी के दो महीने बाद ही ऋचा ने अरविंद के खिलाफ घरेलू हिंसा और दहेज का केस कर दिया। ऋचा हमारे घर भी आई। तब हमें पता चला कि दोनों ने शादी कर ली है।’
‘अरविंद ने पापा से कहा कि मैं बहुत बुरा फंस गया हूं। आप मुझे जायदाद से बेदखल कर दीजिए, नहीं तो ये सब बर्बाद कर देगी। पापा ने वकील की सलाह से ऐसा ही किया। इसके बाद वो हर 15-20 दिन में नए-नए आरोपों के साथ अरविंद की शिकायत लेकर थाने पहुंचने लगी।’
‘इसी बीच दोनों की बेटी हुई, लेकिन विवाद बढ़ता गया। अरविंद बेल पर बाहर आया। 2009 में उसे सरकारी नौकरी का ऑफर मिला। परिवार ने उसे समझाया कि ऋचा से मामला सेटल कर वो नौकरी जॉइन कर ले। अरविंद भी यही चाहता था।’
‘वकील की सलाह पर ऋचा भी समझौते के लिए राजी हो गई। हालांकि, मजिस्ट्रेट के सामने फिर मुकर गई। नतीजा ये हुआ कि अरविंद के हाथ से नौकरी का ऑफर भी निकल गया।’
केस लड़ने अरविंद ने कानून की पढ़ाई की नितिन आगे बताते हैं, ‘अरविंद हमारे घर का सबसे तेज बच्चा था। उसने 3 साल में लॉ की पढ़ाई पूरी की। रजिस्टर्ड वकील बना। अपना केस खुद लड़ना शुरू किया। 2013 में वो घरेलू हिंसा के केस से बरी भी हो गया। ऋचा समझ गई थी कि अब इससे लड़ना मुश्किल होगा।’
तलाक के बाद बेटी के नाम पर इमोशनल ब्लैकमेल किया ‘अरविंद अपने काम में बिजी हो गया, लेकिन ऋचा ने पीछा नहीं छोड़ा। 18 अप्रैल 2017 को बेटी के बर्थडे पर इमोशनल ब्लैकमेल कर घर बुलाया और रेप का आरोप लगा दिया। पुलिस अरविंद को उठा ले गई। हम थाने पहुंचे तो अरविंद का एक हाथ और एक पैर पुलिस ने टेबल से बांध रखा था। कहने पर भी नहीं खोला।’
‘हम दूसरे दिन थाने पहुंचे तो पुलिस ने कहा कि दोनों में समझौता हो गया। वो दोनों घर चले गए, जबकि अरविंद घर पहुंचा ही नहीं था। 4 दिन हर जगह तलाशने के बाद हम पुलिस को लेकर ऋचा के घर गए। पहले ऋचा ने मना किया, लेकिन पुलिस शक के आधार पर घर में घुसी तो ऊपर के कमरे में अरविंद न्यूड हालत में बंधा मिला। उसके होंठ सूखे थे। वो 4 दिन से भूखा था। ‘
‘अरविंद ने पूछताछ में बताया कि ऋचा चाहती थी कि मैं उसके साथ रिलेशन बनाऊं और वो फिर मुझे रेप के आरोप में जेल में डलवाए। हालांकि, पुलिस ने फिर रेप के आरोप में अरविंद को ही जेल में डाल दिया। पुलिस ने कहा- हमारे पास उसे काउंटर करने का कोई सबूत नहीं।’
फिर एक फोन आया और सब खत्म नितिन बताते हैं, ’15 दिन बाद अरविंद को जमानत मिली। अब तक वो बिल्कुल टूट चुका था। 14 दिसंबर 2017 की रात उसका फोन आया। बोला- आज रात ऑफिस में ही रुकूंगा। बॉस ने ड्यूटी लगा दी है। अगले दिन सुबह घर पर रखी उसकी जैकेट से 13 पेज का सुसाइड नोट मिला। हम भागे-भागे पुलिस के पास पहुंचे। मिसिंग की शिकायत लिखवाई।’

’15 दिसंबर को 8:30 बजे पापा के पास फोन आया। बताया गया कि अशोकनगर रेलवे ट्रैक पर एक लड़के की डेडबॉडी मिली है। हमने उसकी घड़ी देखी और कुछ सामान था। हमें यकीन हो गया कि ये अरविंद ही है।’
’18 दिसंबर को पोस्ट के जरिए एक लेटर आया। अरविंद ने ये लेटर सुसाइड से ठीक पहले लिखकर पोस्ट किया था। ये दूसरा सुसाइड नोट था।’
आखिरी सुसाइड नोट में लिखा –
वो मेरा बैग ले गई। मेरे पास पैसे नहीं हैं। मेरा ATM कार्ड, बॉस का चेक और लैपटॉप सब ले गई। मैं दिन-रात टॉर्चर झेलता हूं। अब नहीं झेल सकता। एक न एक दिन ये होना ही था।

‘अतुल की मां को रोते देखा तो लगा मैं बिलख रही’ अरविंद की मां ने कहा, ‘मैंने अतुल सुभाष का वीडियो देखा। उसकी मां को रोते देखा तो लगा मैं बिलख रही हूं। लगा मेरे अरविंद ने फिर से आत्महत्या कर ली। कानून को इंसाफ को तौलना चाहिए। अभी और कितने बेटों की मौत के बाद ये सब खत्म होगा।‘
‘बेटियां प्यारी हैं तो किसी के बेटे भी पेड़ से नहीं झड़ते। उन्हें कितनी उम्मीद से हम पालते-पोसते हैं। पढ़ाते-लिखाते हैं। शादी का सपना देखते हैं और फिर ये हो जाता है। उस बेटे को कैसे भूलें।’
कैंडल मार्च के बाद पुलिस ने लिखी FIR नितिन बताते हैं, ‘पुलिस अब तक हमारा पक्ष सुन ही नहीं रही थी। हमने अरविंद की मौत के बाद कैंडल मार्च निकाला। मार्च के बाद शाम को FIR लिखी गई। केस SIT को सौंपा गया। 5 महीने जांच हुई और 18 मई, 2018 को ऋचा को गिरफ्तार किया गया। वो 9 महीने जेल में रही। उसके बाद उसे बेल मिली। केस अभी चल रहा है। फैसला आना बाकी है।’
रिटायर्ड जस्टिस बोले- दहेज विरोधी कानून एकतरफा मेट्रोमोनियल कोर्ट में 3 साल रहने वाले रिटायर्ड जस्टिस एसएन ढींगरा कहते हैं, ‘दहेज विरोधी कानून फैमिली डिस्प्यूट को हैंडल करने के लिए बने थे। इसे एकतरफा बना दिया गया। ये सारे कानून जेंडर बायस्ड हैं। सारे एक्ट औरतों को सुरक्षित करने के लिए बने। शादी के झगड़े खत्म करने के लिए नहीं बने। अगर ये शादी को बचाने के लिए बनते, तो ऐसा नहीं होता। तब कानून दोनों को सुरक्षा देता।’
वे आगे कहते हैं, ‘दहेज विरोधी कानून बना, तब उसमें एक प्रावधान जोड़ा गया था। इसके तहत कुछ रूल्स बनाए जाने थे, जो आज तक नहीं बने। अगर बन जाते, तो कानून दोनों पक्षों के लिए होता।‘
वे रूल्स क्या थे? जवाब में जस्टिस ढींगरा बताते हैं, ‘सबसे खास रूल था कि शादी के वक्त दोनों परिवार गिफ्ट के रूप में जो भी एक-दूसरे को देंगे, उसकी लिस्ट एक्सचेंज होगी। दोनों के साइन होंगे और लिस्ट SDM या मजिस्ट्रेट के पास जमा होगी। अगर ये लिस्ट होती तो सबसे पहले कोर्ट इसकी जांच करता। ये पहला कदम ही नहीं उठाया गया।’
‘अगर ये रूल कानून के साथ अप्लाय होता तो दहेज के आरोप की जांच करने का कोर्ट के पास एक लिखित प्रमाण होता। दहेज की वजह से लड़कियों पर अत्याचार हुए हैं, लेकिन हर शादी में डिस्प्यूट की वजह दहेज नहीं होता। कुछ और वजहें भी होती हैं। हर बार लड़का ही क्रूर नहीं होता। क्रूरता जेंडर के हिसाब से नहीं आती।’
ग्राफिक में पढ़िए अतुल सुसाइड केस
2023 में शादी में प्रताड़ित 800 पुरुषों की गई जान अतुल सुभाष का मामला कोई पहला केस नहीं है। हालांकि, शादी या रिलेशनशिप से प्रताड़ित कितने पुरुषों की जान गई, इसका आंकड़ा NCRB के डेटा में नहीं है। ये डेटा जरूर है कि कितने पुरुषों ने सुसाइड किया। इसके मुताबिक 2022 में 1,14,485 शादीशुदा लोगों ने सुसाइड किया, जिनमें करीब 74% पुरुष थे।
ये आंकड़ा औरतों के सुसाइड से काफी बड़ा है। एकम न्याय फाउंडेशन नाम की संस्था ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर एक डेटा तैयार किया। 2023 की जनवरी से लेकर दिसंबर तक मीडिया में रिपोर्ट हुए मामलों की डिटेल इस संस्था ने इकट्ठा की।
डेटा के मुताबिक, सिर्फ एक साल में 517 पुरुषों ने सुसाइड किया और 213 पुरुषों की फीमेल पार्टनर ने मर्डर किया। रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि ये डेटा बहुत कम है, क्योंकि हमने सिर्फ उस डेटा को इकट्ठा किया, जिसमें साफ-साफ शादी का हवाला था






