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डेढ़ साल पुराने मामले में नरेश मीणा को राहत नहीं:भीड़ के उकसाने के आरोप, हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई थी

डेढ़ साल पहले तत्कालीन मंत्री प्रमोद जैन भाया के निजी आवास के बाहर प्रदर्शन और भीड़ को उग्र करने के आरोप में आज नरेश मीणा की अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस सुदेश बंसल की अदालत ने पुलिस से केस डायरी मंगवाते हुए सुनवाई 20 जनवरी तक टाल दी।

दरअसल, सितम्बर 2023 को नरेश मीणा ने लोगों के साथ भाया के घर के बाहर धरना दिया था। नरेश मीणा पर भीड़ को उकसाने का आरोप भी है। घटना के बाद बारां कोतवाली में नरेश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने अभी तक नरेश को गिरफ्तार नहीं किया है। इस मामले में नरेश मीणा की ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई थी।

नरेश मीणा के वकील डॉ महेश शर्मा ने बताया- यह मामला राजनीति से प्रेरित है। इसमें नरेश मीणा पर प्रदर्शन में जनता को उकसाने का आरोप है। आज सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया- इस मामले में राज्य सरकार ने विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की है। इस पर कोर्ट ने हमें उन्हें कॉपी देने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा- यह मामूली मामला है। इसमें पहले भी अदालत कई लोगों को जमानत दे चुकी है। चूंकि यह मामला राजनीति से प्रेरित है। इसलिए सरकार ने नरेश मीणा पर दबाव बनाने के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त किया है। लेकिन हमें न्यायालय पर विश्वास है, हमें न्याय मिलेगा।

थप्पड़ मारने के मामले में भी आज सुनवाई हो सकती है

वहीं, देवली-उनियारा चुनाव में एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में जेल में बंद नरेश मीणा की जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है। जस्टिस अनिल उपमन की अदालत आज इस मामले में सुनवाई करेगी।

इससे पहले बुधवार को समरावता हिंसा मामले में हाईकोर्ट से नरेश मीणा को राहत नही मिल पाई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी तथ्यात्मक रिपोर्ट और नरेश मीणा का आपराधिक रिकॉर्ड लाने का निर्देश देते हुए सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी थी।

नरेश पर 4 एफआईआर, 2 में ही हुई गिरफ्तारी

हाईकोर्ट में नरेश मीणा के वकील फतेहराम मीणा ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन नरेश को जेल में रखने की साजिश कर रहा है। पुलिस ने नरेश के खिलाफ नगर फोर्ट थाने में चार एफआईआर दर्ज की है।

इसमें पहली एफआईआर एसडीएम द्वारा करवाई गई है। इसमें उसका कहना है कि नरेश ने ईवीएम से छेड़छाड़ और उसके साथ मारपीट की। दूसरी एफआईआर पुलिस ने दर्ज की है, जिसमें नरेश पर आगजनी का आरोप है। इन दोनों एफआईआर में नरेश को गिरफ्तार किया गया है।

तीसरी एफआईआर हाईवे जाम करने और चौथी एफआईआर रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से ईवीएम से छेड़छाड़ करने की दर्ज कराई है। इन दोनों मामलों में नरेश को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा- हमें डर है कि इन दोनों मामलों में पुलिस जमानत मिलने पर नरेश की रिहाई रोकने के लिए उसे गिरफ्तार कर सकती है।

उपचुनाव के दिन एसडीएम काे मारा था थप्पड़

दरअसल, देवली-उनियारा विधानसभा के समरावता (टोंक) गांव में उपचुनाव में वोटिंग का बहिष्कार किया गया था। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ग्रामीणों के साथ धरने पर थे। इसी दौरान नरेश मीणा ने अधिकारियों पर जबरन मतदान करवाने का आरोप लगाया था। नरेश मीणा पोलिंग बूथ पर आए और उन्होंने SDM अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था।

नरेश मीणा वापस जाकर धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की गाड़ी रोकने को लेकर विवाद हो गया था। पुलिस ने नरेश मीणा को हिरासत में ले लिया था। मीणा के समर्थकों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वे और भड़क गए थे। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी और पुलिस के जवान आमने-सामने हो गए थे और नरेश मीणा को छुड़ाकर ले गए था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। ग्रामीणों पर भी पथराव का आरोप लगाया था। घटना से पूरे गांव में आगजनी हो गई थी।

पुलिस ने 61 लोगों को किया था गिरफ्तार

समरावता हिंसा मामले में पुलिस ने करीब 61 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें से 18 लोगों को टोंक जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई। वहीं, 40 लोगों को 3 जनवरी को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके अलावा तीन नाबालिग भी पुलिस ने पकड़े थे, उन्हें भी टोंक के जिला जज ने जमानत दे दी थी।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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